बालूशाही उत्तर भारत की पारंपरिक मिठाई है, जिसे दक्षिण में बादुशा कहा जाता है। बाहर से हल्की कुरकुरी, अंदर से परतदार और ऊपर चाशनी की पतली परत, यही अच्छी बालूशाही की पहचान है। भाई दूज 11 नवंबर को है और इस मौके पर घर की बनी मिठाई का स्वाद अलग होता है। बाजार की मिठाई में मिलावट की चिंता भी रहती है। जानिए आसान बालूशाही रेसिपी।
सामग्री
आटे के लिए:
- 2 कप मैदा
- आधा कप घी, जमा हुआ या हल्का ठोस
- चौथाई कप दही
- एक चौथाई छोटा चम्मच बेकिंग सोडा
- जरूरत के अनुसार ठंडा पानी
चाशनी के लिए:
- डेढ़ कप चीनी
- पौना कप पानी
- चार-पांच इलायची, कुटी हुई
- कुछ बूंद नींबू का रस
तलने के लिए घी या तेल।

आटा कैसे तैयार करें
1. एक बड़े बर्तन में घी, दही और बेकिंग सोडा डालकर हाथ से अच्छी तरह फेंटें, जब तक मिश्रण हल्का न हो जाए
2. इसमें मैदा डालें और उंगलियों से मिलाएं, ताकि घी हर दाने तक पहुंचे
3. थोड़ा-थोड़ा ठंडा पानी डालकर आटा इकट्ठा करें
4. आटा गूंथना नहीं है, बस मोड़कर दबाते हुए इकट्ठा करना है। ज्यादा गूंथने से बालूशाही खस्ता नहीं बनती
5. आटे को ढककर आधा घंटा रखें
परतें कैसे बनाएं
आटे को हल्का फैलाएं, आधा मोड़ें और फिर दबाएं। यह काम तीन-चार बार करें। इससे अंदर परतें बनती हैं। अब आटे के बराबर हिस्से लेकर गोल पेड़ा बनाएं, बीच में अंगूठे से हल्का गड्ढा करें। किनारे थोड़े फटे दिखें तो चिंता न करें, यही बालूशाही का रूप है।
यह भी पढ़ें: गुलाब जामुन रेसिपी: घर पर नरम और बिना फटे गुलाब जामुन बनाने का आसान तरीका | भाई दूज का खाना: बहन के घर बनने वाले पारंपरिक पकवान, आसान मेन्यू, समय बचाने की तैयारी और मीठे के विकल्प
तलने का सही तरीका
बालूशाही की सबसे जरूरी बात धीमी आंच है।
- कड़ाही में घी गुनगुना हो, बहुत गर्म नहीं
- बालूशाही डालें, वे कुछ देर नीचे बैठी रहेंगी और धीरे-धीरे ऊपर आएंगी
- ऊपर आने के बाद आंच हल्की मध्यम करें
- दोनों तरफ सुनहरा होने तक पलटते हुए तलें
- तेज आंच पर तलने से बाहर से रंग आ जाएगा, पर अंदर कच्ची रहेगी
चाशनी बनाना
चीनी और पानी उबालें। जब चाशनी उंगली और अंगूठे के बीच एक तार बनाने लगे, तब गैस बंद करें। इलायची और नींबू का रस डालें। नींबू से चाशनी जमती नहीं है।
चाशनी में डुबोना
तली हुई बालूशाही को थोड़ा ठंडा होने दें। फिर हल्की गर्म चाशनी में दो-तीन मिनट डुबोकर निकाल लें। प्लेट पर रखें, ऊपर पिस्ता की कतरन डालें। चाशनी ठंडी होकर सफेद परत बना देगी।
आम गलतियां
- घी कम डालना, जिससे बालूशाही सख्त बनती है
- आटा ज्यादा गूंथना
- घी बहुत गर्म रखना
- बहुत गाढ़ी चाशनी, जिससे ऊपर मोटी परत जम जाती है
कितने दिन चलती है
एयरटाइट डिब्बे में बालूशाही सामान्य तापमान पर कुछ दिन तक अच्छी रहती है। नमी से बचाकर रखें।
क्या कम मीठी बन सकती है
हां, चाशनी में डुबोने का समय कम करें। इससे मिठास हल्की रहेगी। चाहें तो चाशनी में चीनी थोड़ी कम रखकर उसे पतला भी बना सकते हैं, पर तब बालूशाही को तुरंत परोसना बेहतर रहता है।
स्रोत: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





