नमो भारत की वैश्विक पहचान
दिल्ली-एनसीआर में सफर का समय घटाने और सड़क पर यातायात का दबाव कम करने वाली नमो भारत अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना रही है। 99.9 प्रतिशत समयपालन के साथ परिचालन करने वाली इस क्षेत्रीय रेल प्रणाली की तकनीक और यात्री सुविधाओं की जर्मनी से लेकर स्पेन तक सराहना हो रही है। भारत की पहली क्षेत्रीय तीव्र परिवहन प्रणाली (आरआरटीएस) अब दुनिया के सामने आधुनिक शहरी और क्षेत्रीय परिवहन के एक नए मॉडल के रूप में पेश की जा रही है। स्पेन के बार्सिलोना में आयोजित स्मार्ट सिटी एक्सपो वर्ल्ड कांग्रेस 2026 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) नमो भारत की उपलब्धियों और तकनीक का प्रदर्शन कर रहा है। यहां यह प्रणाली आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहां वैश्विक परिवहन एजेंसियों और शहरी नियोजकों को इसके संचालन के बारे में जानकारी दी जा रही है। यह उपलब्धि न केवल भारत की परिवहन क्षमता को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक मंचों पर भारतीय इंजीनियरिंग के प्रति विश्वास भी बढ़ाती है।

तकनीकी नवाचार और परिचालन क्षमता
नमो भारत कॉरिडोर की सफलता का एक प्रमुख आधार इसमें उपयोग की गई एलटीई आधारित ईटीसीएस हाइब्रिड लेवल 3 सिग्नलिंग तकनीक है। यह तकनीक वैश्विक स्तर पर पहली बार लागू की गई है, जो ट्रेनों के सुरक्षित और सटीक संचालन को सुनिश्चित करती है। इस उन्नत सिग्नलिंग तकनीक को भी बार्सिलोना में प्रदर्शित किया गया है। इस प्रणाली का उद्देश्य बड़े शहरों और उनके आसपास के क्षेत्रों के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन को सुगम बनाना है। इससे पहले इस साल सितंबर में जर्मनी के बर्लिन में आयोजित इनोट्रांस अंतरराष्ट्रीय परिवहन प्रदर्शनी में भी इसकी तकनीक और परिचालन मॉडल प्रदर्शित किया गया था। वहां भी इस प्रणाली की कार्यक्षमता को अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया था। एनसीआरटीसी लगातार वैश्विक मंचों पर भागीदारी कर रहा है ताकि भारत में विकसित परिवहन तकनीक और परियोजना से जुड़े अनुभवों को दूसरे देशों तक पहुंचाया जा सके।
यात्री संख्या और नेटवर्क विस्तार
अक्टूबर 2023 में शुरू हुए 82.15 किलोमीटर लंबे दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ कॉरिडोर पर अब तक 4.8 करोड़ से अधिक यात्री यात्राएं दर्ज की गई हैं। वर्तमान में प्रतिदिन एक लाख से अधिक यात्री इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं। भविष्य की योजनाओं के तहत एनसीआर में नेटवर्क विस्तार के लिए दो प्रमुख कॉरिडोर को प्राथमिकता दी जा रही है। इनमें दिल्ली, पानीपत, करनाल कॉरिडोर और दिल्ली, गुरुग्राम, बावल, अलवर कॉरिडोर शामिल हैं। दिल्ली, पानीपत, करनाल कॉरिडोर लगभग 136.30 किलोमीटर लंबा होगा, जो सोनीपत, गन्नौर, समालखा, पानीपत और करनाल को दिल्ली से जोड़ेगा। वहीं, दिल्ली, गुरुग्राम, बावल, अलवर कॉरिडोर की लंबाई करीब 196 किलोमीटर होगी, जो सराय काले खां से शुरू होकर मुनिरका, एयरोसिटी, गुरुग्राम और बावल से होते हुए राजस्थान के एसएनबी क्षेत्र तक जाएगी। इसके अलावा, देश भर में 2900 किलोमीटर तक के संभावित क्षेत्रीय तीव्र परिवहन नेटवर्क की पहचान की गई है, जिसमें बेंगलुरु, मैसूरु, तुमकुरु, होसुर, चेन्नई, वेल्लोर, विल्लुपुरम, चेंगलपट्टू और हैदराबाद, वारंगल जैसे प्रमुख शहरी समूह शामिल हैं। साथ ही, गाजियाबाद से नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक के कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट भी सरकार को सौंपी जा चुकी है।
प्रशिक्षण और भविष्य की दिशा
भारतीय रेलवे वित्त प्रबंधन संस्थान के प्रशिक्षु अधिकारियों ने हाल ही में नमो भारत परियोजना के बुनियादी ढांचे और परिचालन का अध्ययन किया है। एनसीआरटीसी ने 2022 ईओएल और 2023 बैच के अधिकारियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया था। गतिशक्ति भवन में आयोजित प्रस्तुति के दौरान अधिकारियों को आरआरटीएस की विशेषताओं और उद्देश्यों से अवगत कराया गया। एनसीआरटीसी के प्रबंध निदेशक शलभ गोयल और निदेशक वित्त नमिता मेहरोत्रा के साथ संवाद के माध्यम से प्रशिक्षु अधिकारियों ने परियोजना के विकास और वित्तीय प्रबंधन के पहलुओं को समझा। सराय काले खां स्टेशन पर उन्हें मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन यानी विभिन्न परिवहन साधनों के एकीकरण की जानकारी दी गई। स्टेशन का दौरा करने के बाद अधिकारियों ने सराय काले खां से आनंद विहार होते हुए मेरठ साउथ तक ट्रेन में यात्रा भी की। यह अनुभव उन्हें आधुनिक क्षेत्रीय परिवहन प्रणाली की परिचालन व्यवस्था को प्रत्यक्ष रूप से समझने में सहायक रहा। यह परियोजना भारत के शहरी परिवहन परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह भी पढ़ें: टॉप 50 हेडलाइंस 3 नवंबर 2026 (दोपहर): देश, प्रदेश और दुनिया की बड़ी खबरें एक नज़र में
स्रोत: Amar Ujala





