हर घर की रसोई से रोज फल और सब्जियों के छिलके, चाय की पत्ती और दूसरा गीला कचरा निकलता है। आमतौर पर यह सब कूड़ेदान में चला जाता है और फिर लैंडफिल में सड़कर बदबू और गैस पैदा करता है। यही गीला कचरा अगर घर पर सही तरीके से रखा जाए तो कुछ ही हफ्तों में पौधों के लिए पोषक खाद में बदल सकता है। इसे कंपोस्ट कहते हैं और बागवानी करने वाले इसे काला सोना भी कहते हैं। घर पर कंपोस्ट बनाने के लिए न बड़ा बगीचा चाहिए, न महंगी मशीन। एक बाल्टी और थोड़ी सावधानी काफी है।
कंपोस्ट क्या है और यह कैसे बनता है
कंपोस्ट बनाने की प्रक्रिया में सूक्ष्मजीव जैविक कचरे को तोड़कर उसे मिट्टी जैसी पोषक खाद में बदल देते हैं। घर पर अक्सर एरोबिक कंपोस्टिंग की जाती है, जिसमें ऐसे सूक्ष्मजीव काम करते हैं जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत होती है। बेंगलुरु के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट राउंड टेबल की पहल स्वच्छाग्रह के मुताबिक अच्छी हवा मिलने से बदबू नहीं आती और कचरा जल्दी गलता है।
अमेरिका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी EPA भी बताती है कि कंपोस्ट के लिए तीन चीजें जरूरी हैं: हरी सामग्री जैसे सब्जियों के छिलके, भूरी सामग्री जैसे सूखे पत्ते या कोकोपीट, और पानी। हरी सामग्री नाइट्रोजन देती है, भूरी सामग्री कार्बन देती है और नमी सूक्ष्मजीवों को काम करने में मदद करती है।

बाल्टी में कंपोस्ट बनाने का तरीका
स्वच्छाग्रह की बताई विधि के आधार पर ये स्टेप अपनाए जा सकते हैं:
- ढक्कन वाली एक बाल्टी लें और उसके चारों ओर हवा के लिए छोटे-छोटे छेद कर दें। छेद बड़े न हों, वरना सामग्री बाहर गिर सकती है। ढक्कन फल मक्खियों और दूसरे कीड़ों को दूर रखता है।
- माइक्रोबियल कोकोपीट का ब्लॉक लगभग आधा लीटर पानी में भिगो दें। दो-तीन घंटे में यह भुरभुरे पाउडर में बदल जाता है। ज्यादा पानी न डालें और इसे ढक्कन वाले डिब्बे में रखें।
- बाल्टी की तली में तीन मुट्ठी कोकोपीट डालें। यह कचरे की अतिरिक्त नमी सोख लेता है।
- इसके ऊपर रसोई के गीले कचरे की एक परत डालें। शुरुआत में सिर्फ फल और सब्जियों के छिलके डालें। बचा हुआ खाना और तरल पदार्थ न डालें, क्योंकि इससे नमी बढ़ती है।
- कचरे को कोकोपीट की परत से पूरी तरह ढक दें।
- रोज यही दोहराएं: एक परत छिलके, एक परत कोकोपीट, फिर ढक्कन बंद।
- बाल्टी भर जाए तो ढक्कन बंद करके उसे बारिश से बचे किसी छायादार जगह पर 3 से 4 हफ्ते के लिए छोड़ दें।
इसके बाद बाल्टी में रखा कचरा गहरी भूरी, भुरभुरी और गीली मिट्टी जैसी खुशबू वाली खाद में बदल जाता है।
क्या डालें और क्या न डालें
घर की बाल्टी कंपोस्टिंग में ये चीजें आसानी से डाली जा सकती हैं:
- फल और सब्जियों के छिलके
- इस्तेमाल की गई चाय की पत्ती और कॉफी के अवशेष
- अंडे के छिलके, कूटकर
- सूखे पत्ते, कोकोपीट और बिना छपाई वाला गत्ता भूरी सामग्री के तौर पर
EPA के अनुसार घर के कंपोस्ट में मांस, मछली, हड्डियां, डेयरी उत्पाद, तेल और चर्बी नहीं डालनी चाहिए, क्योंकि इनसे बदबू आती है और चूहे-मक्खियां आकर्षित होती हैं। बीमार पौधे और कीटनाशक लगे घास-पत्ते भी नहीं डालने चाहिए। पालतू जानवरों का मल भी कंपोस्ट में डालने से बचना चाहिए। प्लास्टिक, कांच और धातु तो किसी भी हालत में नहीं डालने चाहिए।
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बदबू और कीड़ों की समस्या कैसे दूर करें
कंपोस्ट से बदबू आने की सबसे बड़ी वजह ज्यादा नमी और हवा की कमी है। अगर बाल्टी की सामग्री गीली और चिपचिपी लगे तो उसमें और कोकोपीट या सूखे पत्ते डालें। हर परत को अच्छी तरह ढकने से फल मक्खियां भी दूर रहती हैं।
कंपोस्टिंग के दौरान कभी-कभी सफेद लार्वा दिख सकते हैं। स्वच्छाग्रह बताता है कि ये अक्सर ब्लैक सोल्जर फ्लाई के लार्वा होते हैं और कंपोस्टिंग में यह सामान्य बात है। इन्हें कम करने के लिए छोटे छेद रखें, नमी नियंत्रित करें और ढेर में दो चम्मच हल्दी या नीम पाउडर मिला सकते हैं।
खाद तैयार हुई या नहीं, कैसे पहचानें
तैयार कंपोस्ट सड़ी सब्जियों जैसी नहीं, बल्कि ताजी मिट्टी जैसी महकती है। इसका रंग गहरा भूरा होता है और यह हाथ में भुरभुरा लगता है। अगर अब भी छिलकों के टुकड़े साफ दिख रहे हों तो उसे कुछ दिन और छोड़ दें। बड़े टुकड़ों को छानकर अगली बाल्टी में डाला जा सकता है।
कंपोस्ट का इस्तेमाल कैसे करें
तैयार खाद को गमलों की मिट्टी में मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। नए गमले भरते समय मिट्टी में कंपोस्ट मिलाने से मिट्टी भुरभुरी बनती है और उसमें पानी रोकने की क्षमता बढ़ती है। EPA के मुताबिक कंपोस्ट मिट्टी को नमी बनाए रखने में मदद करता है और रासायनिक खाद की जरूरत घटा सकता है। पुराने गमलों में ऊपर की परत पर थोड़ी खाद डालकर हल्की गुड़ाई कर दें।
घर पर कंपोस्ट बनाने के फायदे
- घर से निकलने वाला गीला कचरा कम होता है, जिससे कूड़ा उठाने वाली व्यवस्था पर बोझ घटता है।
- लैंडफिल में सड़ने वाले कचरे से निकलने वाली मीथेन जैसी गैस कम होती है।
- पौधों के लिए मुफ्त और पोषक खाद मिलती है।
- बच्चों को कचरा अलग करने और प्रकृति के चक्र को समझने का व्यावहारिक तरीका मिलता है।
फ्लैट में रहने वालों के लिए सुझाव
छोटे फ्लैट में बालकनी कंपोस्टिंग के लिए सबसे अच्छी जगह है। बाल्टी के नीचे एक ट्रे रख दें ताकि अगर कोई तरल निकले तो फर्श खराब न हो। दो बाल्टियां रखें, ताकि एक भरकर पकने के लिए रखी हो तब दूसरी में रोज का कचरा डाला जा सके। कई शहरों में सोसाइटी स्तर पर सामुदायिक कंपोस्टिंग भी होती है, जहां ज्यादा कचरे को एक साथ खाद में बदला जाता है।
क्या कंपोस्ट के लिए कोकोपीट जरूरी है
कोकोपीट नमी सोखने और भूरी सामग्री का काम करता है। इसकी जगह सूखे पत्ते या कटा हुआ बिना छपाई वाला गत्ता भी भूरी सामग्री के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
बाल्टी कंपोस्ट कितने समय में तैयार होता है
स्वच्छाग्रह की विधि के मुताबिक बाल्टी भरने के बाद लगभग 3 से 4 हफ्ते में खाद तैयार हो जाती है। मौसम और नमी के हिसाब से समय कुछ आगे-पीछे हो सकता है।
स्रोत: Swachagraha (SWMRT Bengaluru): DIY Composting, US EPA: Composting At Home





