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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है: 5 स्थायी सदस्य, वीटो पावर और भारत अब तक कितनी बार रहा सदस्य

दुनिया में शांति और सुरक्षा से जुड़े सबसे अहम फैसले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होते हैं। जानिए इसका ढांचा, वीटो का मतलब और भारत की भूमिका।

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और विश्व मानचित्र का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • जब भी दुनिया में कहीं युद्ध, बड़ा संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का संकट खड़ा होता है, तो एक नाम बार-बार सुनाई देता है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद।
  • हर साल पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव होता है। अस्थायी सीटें क्षेत्रीय आधार पर बंटी होती हैं, ताकि अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप सहित दूसरे देशों को…
  • संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड और न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन के अनुसार भारत आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है:
  • सुरक्षा परिषद के ढांचे को बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा।

जब भी दुनिया में कहीं युद्ध, बड़ा संघर्ष या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का संकट खड़ा होता है, तो एक नाम बार-बार सुनाई देता है, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद। यह संयुक्त राष्ट्र के छह मुख्य अंगों में से एक है और इसके पास ऐसे फैसले लेने का अधिकार है जिन्हें मानना सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होता है। भारत लंबे समय से इसमें स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है। इस लेख में समझिए कि सुरक्षा परिषद कैसे काम करती है और भारत की इसमें क्या भूमिका रही है।

सुरक्षा परिषद का गठन और काम

संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के बाद हुई थी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर ने सुरक्षा परिषद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की मुख्य जिम्मेदारी दी। इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क में है। परिषद के मुख्य काम हैं:

  • किसी विवाद या खतरे की जांच करना और शांतिपूर्ण समाधान के उपाय सुझाना
  • किसी देश पर आर्थिक या दूसरे प्रतिबंध लगाना
  • शांति स्थापना मिशन यानी पीसकीपिंग ऑपरेशन को मंजूरी देना
  • जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई को अधिकृत करना
  • संयुक्त राष्ट्र महासचिव की नियुक्ति के लिए महासभा को सिफारिश करना
  • नए देशों को संयुक्त राष्ट्र की सदस्यता देने की सिफारिश करना
मुख्य बातें: संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और विश्व मानचित्र का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

परिषद का ढांचा: 15 सदस्य

संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार सुरक्षा परिषद में 15 सदस्य हैं।

  • 5 स्थायी सदस्य: चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका
  • 10 अस्थायी सदस्य, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा दो साल के लिए चुनती है

हर साल पांच अस्थायी सदस्यों का चुनाव होता है। अस्थायी सीटें क्षेत्रीय आधार पर बंटी होती हैं, ताकि अफ्रीका, एशिया-प्रशांत, लैटिन अमेरिका, पूर्वी यूरोप और पश्चिमी यूरोप सहित दूसरे देशों को प्रतिनिधित्व मिले। चुनाव जीतने के लिए महासभा में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। कोई अस्थायी सदस्य कार्यकाल खत्म होते ही तुरंत दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकता।

परिषद की अध्यक्षता हर महीने बदलती है और सदस्य देशों के अंग्रेजी नामों के वर्णक्रम के अनुसार बारी-बारी से मिलती है।

वीटो पावर क्या है

सुरक्षा परिषद में ठोस मामलों पर फैसले के लिए 15 में से कम से कम 9 वोट चाहिए, और इनमें पांचों स्थायी सदस्यों में से किसी का विरोध नहीं होना चाहिए। अगर कोई स्थायी सदस्य किसी प्रस्ताव के खिलाफ वोट दे दे तो वह प्रस्ताव पास नहीं हो सकता, भले ही बाकी सभी देश समर्थन में हों। इसी को वीटो कहा जाता है। स्थायी सदस्य मतदान से दूर रहे तो उसे वीटो नहीं माना जाता। प्रक्रिया से जुड़े मामलों में वीटो लागू नहीं होता।

वीटो की व्यवस्था की सबसे बड़ी आलोचना यह है कि बड़े संकटों में स्थायी सदस्य अपने या अपने सहयोगियों के हितों के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं, जिससे परिषद कोई फैसला नहीं ले पाती।

यह भी पढ़ें: ब्रिक्स क्या है, इतिहास और भारत की भूमिका, 11 सदस्य, 2006 से सफर और 2026 की अध्यक्षता | UN Equal Earth Map: संयुक्त राष्ट्र ने बदला दुनिया का नक्शा, इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन को मिली मंजूरी

भारत और सुरक्षा परिषद

संयुक्त राष्ट्र के रिकॉर्ड और न्यूयॉर्क में भारत के स्थायी मिशन के अनुसार भारत आठ बार सुरक्षा परिषद का अस्थायी सदस्य रह चुका है:

  • 1950-51
  • 1967-68
  • 1972-73
  • 1977-78
  • 1984-85
  • 1991-92
  • 2011-12
  • 2021-22

2021-22 के कार्यकाल में भारत ने अगस्त 2021 और दिसंबर 2022 में परिषद की अध्यक्षता की। इस दौरान भारत ने आतंकवाद विरोध, समुद्री सुरक्षा और शांति स्थापना से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

भारत स्थायी सदस्यता क्यों मांगता है

  • भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है
  • दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है
  • संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में भारत सबसे ज्यादा सैनिक भेजने वाले देशों में लगातार शामिल रहा है
  • 1945 की दुनिया और आज की दुनिया में बड़ा फर्क है, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका से कोई स्थायी सदस्य नहीं है

भारत, जर्मनी, जापान और ब्राजील ने मिलकर G4 नाम का समूह बनाया है, जो सुरक्षा परिषद में सुधार और स्थायी सदस्यता के विस्तार की मांग करता है। कई स्थायी सदस्य देशों ने अलग-अलग मौकों पर भारत की दावेदारी का समर्थन किया है।

सुधार में अड़चन कहां है

सुरक्षा परिषद के ढांचे को बदलने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा। इसके लिए महासभा के दो-तिहाई सदस्यों की मंजूरी और फिर पांचों स्थायी सदस्यों समेत दो-तिहाई सदस्य देशों द्वारा उसकी पुष्टि जरूरी है। यानी कोई भी स्थायी सदस्य सुधार रोक सकता है। इसके अलावा कुछ देशों का समूह, जिसे यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस कहा जाता है, नए स्थायी सदस्यों के बजाय केवल अस्थायी सीटें बढ़ाने के पक्ष में है। महासभा में इस पर अंतर-सरकारी वार्ता कई साल से चल रही है।

परिषद के प्रस्ताव कितने बाध्यकारी

संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत लिए गए फैसले सभी सदस्य देशों पर बाध्यकारी माने जाते हैं। प्रतिबंध, हथियारों पर रोक या सैन्य कार्रवाई की मंजूरी आम तौर पर इसी अध्याय के तहत दी जाती है।

महासभा और सुरक्षा परिषद में क्या अंतर है

महासभा में सभी सदस्य देशों को बराबर एक वोट मिलता है, पर उसके ज्यादातर प्रस्ताव सिफारिश के रूप में होते हैं। सुरक्षा परिषद छोटी है, पर उसके कुछ फैसले बाध्यकारी होते हैं।

क्या भारत को वीटो के साथ स्थायी सदस्यता मिल सकती है

यह पूरी तरह चार्टर संशोधन और सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर है। अभी तक सुधार प्रक्रिया किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंची है।

स्रोत: UN Security Council: Current Members, UN Security Council: Elected Members, Permanent Mission of India to the UN

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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