हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई तरह के पुरस्कार दिए जाते हैं, पर फिल्मफेयर अवॉर्ड्स का अपना खास स्थान है। सरकार की ओर से दिए जाने वाले राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के बाद यह देश के सबसे पुराने फिल्म पुरस्कारों में गिना जाता है। काली महिला आकृति वाली इसकी ट्रॉफी, जिसे ब्लैक लेडी कहा जाता है, कई कलाकारों के लिए करियर की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। आइए जानते हैं कि इस पुरस्कार की शुरुआत कैसे हुई और पहले समारोह में किसे सम्मान मिला।
पहला समारोह: 21 मार्च 1954
फिल्मफेयर पत्रिका की अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित इतिहास के अनुसार पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड्स समारोह 21 मार्च 1954 को बंबई, जो अब मुंबई है, के मेट्रो सिनेमा में हुआ था। इसमें उस समय की चर्चित हिंदी फिल्मों को सम्मानित किया गया। शुरुआत में इन पुरस्कारों को क्लेयर अवॉर्ड्स कहा गया था, जो तब के एक जाने-माने फिल्म समीक्षक के नाम पर था। बाद में इनका नाम फिल्मफेयर अवॉर्ड्स हो गया।
पहले समारोह में केवल पांच श्रेणियों में पुरस्कार दिए गए थे।

पहले समारोह के विजेता
- बेस्ट फिल्म: दो बीघा जमीन
- बेस्ट डायरेक्टर: बिमल रॉय, दो बीघा जमीन के लिए
- बेस्ट एक्टर: दिलीप कुमार, दाग के लिए
- बेस्ट एक्ट्रेस: मीना कुमारी, बैजू बावरा के लिए
- बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर: नौशाद, बैजू बावरा के लिए
दो बीघा जमीन क्यों खास थी
बिमल रॉय की दो बीघा जमीन एक गरीब किसान शंभू की कहानी है, जो अपनी दो बीघा जमीन बचाने के लिए कलकत्ता जाकर रिक्शा चलाता है। फिल्म में बलराज साहनी ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फ्रंटलाइन पत्रिका के एक लेख के अनुसार इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा में यथार्थवादी फिल्मों की नई धारा को बढ़ावा दिया। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली थी। आज भी इसे भारतीय सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है।
यह भी पढ़ें: बिग बॉस 20 में काजी तौकीर को डेंगू हुआ? मेकर्स ने बाहर किया? टीम ने बताया पूरा सच | Bigg Boss 20: रीति तिवारी और काजी तौकीर के बीच विवाद, आज के एपिसोड में क्या हुआ
दिलीप कुमार और मीना कुमारी: पहले विजेता, लंबा सफर
दिलीप कुमार को पहला बेस्ट एक्टर पुरस्कार दाग के लिए मिला। आगे चलकर वे इस श्रेणी में सबसे सफल अभिनेताओं में शामिल हुए और कई बार यह पुरस्कार जीता। मीना कुमारी ने बैजू बावरा के लिए पहला बेस्ट एक्ट्रेस पुरस्कार जीता। उनकी भावनात्मक भूमिकाओं के कारण उन्हें ट्रेजेडी क्वीन कहा गया। नौशाद का संगीत बैजू बावरा की सबसे बड़ी पहचान बना, जिसके शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीत आज भी याद किए जाते हैं।
ब्लैक लेडी ट्रॉफी
फिल्मफेयर ट्रॉफी में हाथ ऊपर उठाए एक नृत्य करती महिला की आकृति है। इसकी गहरी काली या कांस्य रंगत के कारण इसे ब्लैक लेडी कहा जाता है। यह ट्रॉफी समय के साथ इस पुरस्कार की पहचान बन गई।
श्रेणियां कैसे बढ़ीं
पांच श्रेणियों से शुरू हुआ यह समारोह दशकों में काफी बड़ा हो गया। बाद में सहायक अभिनेता-अभिनेत्री, गीतकार, गायक, पटकथा, संवाद, कहानी, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग, कोरियोग्राफी, बेस्ट डेब्यू और लाइफटाइम अचीवमेंट जैसी कई श्रेणियां जोड़ी गईं। समीक्षकों के चुनाव वाली क्रिटिक्स श्रेणियां भी शुरू हुईं, जिनमें लोकप्रिय और कलात्मक दोनों तरह की फिल्मों को जगह मिलती है।
विजेता कैसे चुने जाते हैं
फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में आम तौर पर पॉपुलर श्रेणियों के लिए नामांकन और विजेताओं के चयन में दर्शकों की राय और विशेषज्ञ जूरी दोनों की भूमिका बताई जाती है, जबकि क्रिटिक्स श्रेणियां समीक्षकों की जूरी तय करती है। चयन प्रक्रिया की ताजा जानकारी हर साल आयोजक जारी करते हैं।
क्षेत्रीय फिल्मफेयर अवॉर्ड्स
हिंदी के अलावा दक्षिण भारत की फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड्स साउथ, और मराठी, बांग्ला व पंजाबी जैसी भाषाओं के लिए भी अलग समारोह होते हैं। OTT के बढ़ते चलन के बाद वेब सीरीज और ओरिजिनल फिल्मों के लिए फिल्मफेयर OTT अवॉर्ड्स भी शुरू किए गए।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से अंतर
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भारत सरकार देती है और सभी भारतीय भाषाओं की फिल्में इसमें शामिल होती हैं। फिल्मफेयर एक मीडिया समूह की पत्रिका की ओर से दिया जाने वाला निजी पुरस्कार है। दोनों की चयन प्रक्रिया, श्रेणियां और उद्देश्य अलग हैं।
बैजू बावरा और दाग: दो यादगार फिल्में
पहले समारोह में बैजू बावरा ने दो बड़े पुरस्कार जीते। विजय भट्ट की इस फिल्म में भारत भूषण और मीना कुमारी मुख्य भूमिकाओं में थे। फिल्म की कहानी संगीत और गुरु-शिष्य परंपरा के इर्द-गिर्द घूमती है और इसके गीतों में शास्त्रीय रागों का खुलकर इस्तेमाल हुआ था। दूसरी ओर अमिय चक्रवर्ती की दाग में दिलीप कुमार ने एक ऐसे युवक का किरदार निभाया जो शराब की लत से जूझता है। इस भावनात्मक भूमिका ने उन्हें पहला बेस्ट एक्टर पुरस्कार दिलाया। इन दोनों फिल्मों से साफ है कि शुरुआती दौर में भी पुरस्कार गंभीर विषयों और दमदार अभिनय को मिले।
पुरस्कारों पर बहस भी
हर बड़े पुरस्कार की तरह फिल्मफेयर पर भी समय-समय पर सवाल उठे हैं। कभी चयन को लेकर तो कभी किसी बड़े कलाकार के समारोह में न आने को लेकर चर्चा हुई। कुछ कलाकारों ने अलग-अलग दौर में पुरस्कार समारोहों से दूरी भी बनाई। इसके बावजूद यह पुरस्कार दर्शकों और इंडस्ट्री दोनों के बीच लोकप्रिय बना हुआ है।
सात दशक का सफर
1954 से अब तक फिल्मफेयर अवॉर्ड्स ने हिंदी सिनेमा के बदलते दौर को देखा है, श्वेत-श्याम फिल्मों से रंगीन फिल्मों तक, सिंगल स्क्रीन से मल्टीप्लेक्स और अब OTT तक। हर दौर के बड़े सितारों और फिल्मकारों के नाम इसकी विजेता सूची में दर्ज हैं, जो इसे हिंदी सिनेमा के इतिहास का एक दिलचस्प दस्तावेज बनाता है।
पहले फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में कितनी श्रेणियां थीं
पांच: बेस्ट फिल्म, डायरेक्टर, एक्टर, एक्ट्रेस और म्यूजिक डायरेक्टर।
पहला समारोह कहां हुआ था
बंबई के मेट्रो सिनेमा में।
स्रोत: Filmfare: Throwback to the first Filmfare Awards, Frontline: Do Bigha Zamin





