अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की है, जिससे मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान तेज करने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पिछले कुछ हफ्तों से ईरान के खिलाफ कई गुप्त और छोटे पैमाने के हमले किए गए थे, लेकिन केशम द्वीप पर हुआ यह नवीनतम हमला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने फिलहाल किसी बड़े युद्ध की संभावना से इनकार करते हुए कूटनीतिक समाधान और संभावित समझौते के संकेत दिए हैं।

केशम द्वीप पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विवरण
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने सोमवार को जानकारी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित केशम द्वीप पर कई शक्तिशाली धमाके सुने गए। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सेना ने इस द्वीप पर सीमित लेकिन प्रभावी हमला किया है। अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन ने जानबूझकर इन हमलों को सार्वजनिक नहीं किया था ताकि यह संदेश न जाए कि अमेरिका एक बड़े और पूर्ण सैन्य अभियान की शुरुआत कर रहा है। केशम द्वीप ईरान का सबसे बड़ा द्वीप है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्ग, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, के मुहाने पर स्थित है। यहां किसी भी प्रकार की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है।
नेतन्याहू का दबाव और इजरायल की राजनीतिक स्थिति
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव डाल रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने हाल ही में ट्रंप के साथ फोन पर लंबी बातचीत की और ईरानी परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को रोकने के लिए सैन्य विकल्प अपनाने की पैरवी की। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू को पिछले सप्ताह इजरायली संसद में बहुमत का नुकसान हुआ है, ऐसे में ईरान के साथ संघर्ष उनके लिए राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर राजनीतिक समर्थन जुटाने का एक जरिया हो सकता है। वह इस स्थिति का उपयोग एक आपातकालीन सरकार बनाने के लिए भी कर सकते हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के बावजूद, फिलहाल किसी बड़े हमले पर अंतिम सहमति नहीं बनी है।
आर्थिक प्रभाव और ट्रंप के कूटनीतिक संकेत
सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने आर्थिक मोर्चे पर सकारात्मक संकेत दिए हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि तेल की कीमतों में प्रति बैरल लगभग 10 डॉलर की रिकॉर्ड गिरावट आई है। ट्रंप का मानना है कि ईरान जल्द से जल्द अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है क्योंकि वह आर्थिक प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बीच घिरा हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसेन रेजाई को एक पत्र भेजा है और समझौते की उम्मीद जताई है। वेंस ने कहा कि ईरान के साथ कई दौर की बातचीत हुई है और राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति को प्राथमिकता दे रहे हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वह मंगलवार के चुनाव के बाद किसी बड़े हमले की योजना नहीं बना रहे हैं, लेकिन सैन्य विकल्प हमेशा खुला रखा गया है।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
मध्य पूर्व के कई देश इस सैन्य टकराव को लेकर चिंतित हैं। संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति सलाहकार अनवर गर्गाश ने मनामा डायलॉग में चेतावनी दी कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद दूर नहीं हुए तो पूरा क्षेत्र अस्थिर हो सकता है। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलअत्ती ने भी कहा कि अगला सैन्य टकराव विनाशकारी साबित हो सकता है। इस बीच, चीन ने भी अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने बताया कि चीन का एक विशेष दूत ईरान, ओमान और सऊदी अरब का दौरा करेगा। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी जोर दिया है कि फारस की खाड़ी को बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का मैदान नहीं बनना चाहिए। ईरान के सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने भी सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर किसी भी हमले का तत्काल जवाब देने की तैयारी रखने का निर्देश दिया है।
केशम द्वीप का रणनीतिक इतिहास
यह पहली बार नहीं है जब केशम द्वीप को निशाना बनाया गया है। इससे पहले 2 जून को भी अमेरिका ने यहां एक ईरानी सैन्य ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन पर हमला किया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, उस समय इस स्टेशन का उपयोग नागरिक जहाजों पर हमला करने वाले ड्रोनों को निर्देशित करने के लिए किया जा रहा था। केशम द्वीप की भौगोलिक स्थिति इसे ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण सैन्य और निगरानी केंद्र बनाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के निकट होने के कारण, यहां से गुजरने वाले हर जहाज पर ईरान की नजर रहती है। अमेरिका का तर्क है कि वह केवल आत्मरक्षा में और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ये हमले कर रहा है। फिलहाल, कतर के मध्यस्थों के माध्यम से बातचीत जारी है ताकि ईरान होर्मुज में हमले बंद करे और बदले में अमेरिका उसकी बंदरगाहों से नाकेबंदी हटा ले।
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स्रोत: India TV, Aaj Tak, Prabhat Khabar





