धरती पर सबसे ऊंची जगह माउंट एवरेस्ट है, तो सबसे गहरी जगह प्रशांत महासागर की मारियाना ट्रेंच में है। यह समुद्र के नीचे फैली एक विशाल खाई है, जिसका सबसे गहरा हिस्सा चैलेंजर डीप करीब 11 किलोमीटर नीचे है। यहां इतना अंधेरा, ठंड और दबाव है कि इंसान अब तक बहुत कम बार वहां पहुंच पाया है। इस लेख में जानिए मारियाना ट्रेंच कहां है, कैसे बनी, वहां तक कौन पहुंचा और वहां जीवन कैसा है।
कहां है मारियाना ट्रेंच
मारियाना ट्रेंच पश्चिमी प्रशांत महासागर में मारियाना द्वीप समूह के पूर्व और दक्षिण में फैली है। यह इलाका गुआम के पास है, जो अमेरिका का क्षेत्र है। यह खाई अर्धचंद्राकार है और करीब 2500 किलोमीटर लंबी है, जबकि इसकी औसत चौड़ाई लगभग 70 किलोमीटर है।

चैलेंजर डीप
मारियाना ट्रेंच का सबसे गहरा हिस्सा चैलेंजर डीप कहलाता है। इसका नाम ब्रिटिश जहाज HMS चैलेंजर के नाम पर पड़ा, जिसके अभियान ने 1875 में यहां की गहराई मापी थी। अलग अलग मापों में इसकी गहराई लगभग 10900 से 11000 मीटर के बीच बताई गई है। तुलना के लिए, माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई करीब 8849 मीटर है। यानी एवरेस्ट को यहां रख दिया जाए तो उसकी चोटी के ऊपर भी 2 किलोमीटर से ज्यादा पानी रहेगा।
कैसे बनी यह खाई
पृथ्वी की ऊपरी परत कई बड़ी प्लेटों में बंटी है, जो बहुत धीरे धीरे खिसकती रहती हैं। मारियाना ट्रेंच वहां बनी है, जहां प्रशांत प्लेट एक दूसरी प्लेट के नीचे धंस रही है। इस प्रक्रिया को सबडक्शन कहते हैं। प्लेट के नीचे जाने से समुद्र तल पर गहरी खाई बन जाती है। इसी प्रक्रिया से इलाके में ज्वालामुखी और भूकंप भी आते हैं, और मारियाना द्वीप भी इसी ज्वालामुखी गतिविधि से बने हैं।
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इंसान की पहली यात्रा
23 जनवरी 1960 को स्विस वैज्ञानिक जैक्स पिकार्ड और अमेरिकी नौसेना के अधिकारी डॉन वॉल्श ट्रिएस्ट नाम की गहरे पानी की नौका में चैलेंजर डीप की तली तक पहुंचे। नीचे उतरने में करीब पांच घंटे लगे और वे तली पर लगभग 20 मिनट रहे। इसके बाद दशकों तक कोई इंसान वहां नहीं गया।
बाद की यात्राएं
2012 में फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरून डीपसी चैलेंजर नाम की पनडुब्बी में अकेले चैलेंजर डीप की तली तक पहुंचे। वे वहां अकेले पहुंचने वाले पहले व्यक्ति बने। 2019 में अमेरिकी खोजकर्ता विक्टर वेस्कोवो ने अपने अभियान में कई बार यहां गोता लगाया। इसके बाद कुछ और वैज्ञानिक और खोजकर्ता भी वहां पहुंच चुके हैं, लेकिन यह संख्या अब भी बहुत कम है।
वहां के हालात
चैलेंजर डीप में पानी का दबाव समुद्र तल के वायुमंडलीय दबाव से 1000 गुना से भी ज्यादा है। यहां सूरज की रोशनी बिल्कुल नहीं पहुंचती और पानी का तापमान कुछ ही डिग्री सेल्सियस रहता है। इतने दबाव में साधारण पनडुब्बी कुचल सकती है, इसलिए यहां जाने के लिए खास तरह के मजबूत वाहन बनाए जाते हैं।
वहां भी है जीवन
इतने कठिन हालात के बावजूद मारियाना ट्रेंच में जीवन पाया गया है। वैज्ञानिकों ने वहां एम्फीपोड जैसे छोटे झींगा जैसे जीव, समुद्री खीरे और कई तरह के सूक्ष्म जीव देखे हैं। कुछ गहरे पानी की मछलियां भी 8000 मीटर तक की गहराई में दर्ज की गई हैं। दुख की बात है कि इतनी गहराई में भी प्लास्टिक का कचरा मिला है, जो समुद्री प्रदूषण के फैलाव को दिखाता है।
संरक्षण
2009 में अमेरिका ने इस क्षेत्र के बड़े हिस्से को मारियाना ट्रेंच मरीन नेशनल मॉन्यूमेंट घोषित किया, ताकि यहां के अनोखे समुद्री तंत्र को बचाया जा सके।
भारत की गहरे समुद्र की तैयारी
भारत भी गहरे समुद्र की खोज में आगे बढ़ रहा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के डीप ओशन मिशन के तहत समुद्रयान परियोजना में मत्स्य 6000 नाम का वाहन तैयार किया जा रहा है, जिसका लक्ष्य तीन लोगों को 6000 मीटर की गहराई तक ले जाना है।
गहराई कैसे मापी जाती है
पहले समुद्र की गहराई वजन बंधी रस्सी डालकर मापी जाती थी। बाद में ध्वनि तरंगों से गहराई मापने की तकनीक आई, जिसे सोनार कहते हैं। जहाज से ध्वनि की तरंग भेजी जाती है और तल से टकराकर लौटने में लगे समय से गहराई का हिसाब लगाया जाता है। आज मल्टीबीम सोनार से समुद्र तल का पूरा नक्शा बनाया जाता है। फिर भी पानी के तापमान, दबाव और खारेपन के कारण मापों में थोड़ा अंतर रह जाता है, इसलिए चैलेंजर डीप की गहराई के अलग अलग आंकड़े मिलते हैं।
दूसरी गहरी खाइयां
प्रशांत महासागर में टोंगा ट्रेंच, कुरील कामचटका ट्रेंच और फिलीपीन ट्रेंच भी बहुत गहरी हैं। टोंगा ट्रेंच का हॉराइजन डीप दुनिया का दूसरा सबसे गहरा बिंदु माना जाता है।
मारियाना ट्रेंच कहां है
पश्चिमी प्रशांत महासागर में मारियाना द्वीपों के पास।
चैलेंजर डीप कितना गहरा है
लगभग 10.9 से 11 किलोमीटर।
वहां सबसे पहले कौन पहुंचा
1960 में जैक्स पिकार्ड और डॉन वॉल्श।
क्या वहां जीवन है
हां, एम्फीपोड, समुद्री खीरे और सूक्ष्म जीव पाए गए हैं।
स्रोत: NOAA Ocean Exploration, Britannica: Mariana Trench, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय: डीप ओशन मिशन





