नई दिल्ली/तेहरान: ईरान में 23 वर्षीय छात्रा नजमे अमीनी को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। ओस्लो स्थित मानवाधिकार संगठन ईरान ह्यूमन राइट्स (IHRNGO) और ब्रिटिश अखबार द गार्डियन की रिपोर्टों के अनुसार, यह सजा अभी अंतिम नहीं है और इसके खिलाफ ईरान के सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।
कौन हैं नजमे अमीनी
इंडियन एक्सप्रेस और NDTV की रिपोर्टों के मुताबिक, नजमे अमीनी उत्तर-पूर्वी ईरान के शहर मशहद की रहने वाली हैं और अकाउंटिंग की छात्रा हैं। वे फिलहाल मशहद की वकीलाबाद सेंट्रल जेल में बंद हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें पहली बार जनवरी 2026 में आर्थिक मुद्दों को लेकर हुए देशव्यापी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिरासत में लिया गया था।
गिरफ्तारी और आरोप
ईरान ह्यूमन राइट्स के अनुसार, ईरानी अखबार खोरासान ने 7 अक्टूबर को नाम के शुरुआती अक्षरों के साथ इस फैसले की पुष्टि की। रिपोर्ट के मुताबिक, अमीनी को 3 फरवरी 2026 को मशहद में ईरान की साइबर पुलिस (FATA) की निगरानी के बाद गिरफ्तार किया गया। उन पर इमामों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप लगाया गया। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है।
संगठन के अनुसार, खोरासान रजवी प्रांत की क्रिमिनल कोर्ट वन की शाखा 6 ने उन्हें ‘साब्ब अल-नबी’ (पैगंबर का अपमान) का दोषी ठहराया। NDTV के अनुसार यह सजा 16 सितंबर को सुनाई गई। ईरान की इस्लामी दंड संहिता की धारा 262 में इस अपराध के लिए मौत की सजा का प्रावधान है।

बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
ईरान ह्यूमन राइट्स और BBC मुंडो की रिपोर्ट के अनुसार, बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि टिप्पणी जुबान फिसलने से हुई और नशे की हालत में होने के कारण इसमें इरादा नहीं था। दंड संहिता की धारा 263 ऐसी परिस्थितियों में छूट का प्रावधान करती है, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने ये दलीलें स्वीकार नहीं कीं।
रिपोर्टों के अनुसार, अमीनी को एक अलग मामले में मशहद की रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने और सरकार विरोधी प्रचार जैसे आरोपों में 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा भी सुनाई है।
जेल से अपील
BBC के अनुसार, सितंबर में उनसे जुड़ी बताई जा रही एक ऑडियो रिकॉर्डिंग सामने आई, जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अपने मामले की जांच की मांग करती हैं। द गार्डियन के हवाले से इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि रिकॉर्डिंग में उन्होंने कहा, “मैं आज खुद को हीरो नहीं बनाना चाहती। मैं बस एक चीज चाहती हूं: मेरी आवाज बनो।”
मानवाधिकार संगठन UN Watch ने एक्स पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से उनकी रिहाई की मांग उठाने को कहा है। BBC के अनुसार, ईरान सरकार पहले “सबसे गंभीर अपराधों” के लिए मौत की सजा का बचाव करती रही है। इस मामले पर ईरानी अधिकारियों की अलग से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
स्रोत: Iran Human Rights, The Guardian, BBC मुंडो, इंडियन एक्सप्रेस, NDTV।





