संक्षेप में: भारत में कानून कैसे बनता है, यह संविधान के अनुच्छेद 107 से 111 में तय है। कोई भी विधेयक संसद के दोनों सदनों से पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अधिनियम (कानून) बनता है। धन विधेयक, संविधान संशोधन और दोनों सदनों में असहमति की स्थिति के लिए अलग नियम हैं। यहां पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से समझिए।
विधेयक क्या है और कितने प्रकार के होते हैं
कानून कैसे बनता है, यह समझने के लिए पहले विधेयक को समझना जरूरी है। किसी नए कानून या मौजूदा कानून में बदलाव का प्रस्ताव विधेयक (बिल) कहलाता है। मंत्री द्वारा लाया गया विधेयक सरकारी विधेयक और किसी अन्य सांसद द्वारा लाया गया विधेयक निजी सदस्य विधेयक कहलाता है। मुख्य प्रकार हैं:
- साधारण विधेयक: किसी भी सदन में पेश हो सकता है।
- धन विधेयक (अनुच्छेद 110): टैक्स, सरकारी उधार या संचित निधि से जुड़ा। यह केवल लोकसभा में राष्ट्रपति की सिफारिश से पेश होता है।
- संविधान संशोधन विधेयक (अनुच्छेद 368): इसके लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत चाहिए।
संसद में कानून कैसे बनता है: तीन वाचन
- पहला वाचन: मंत्री या सांसद सदन की अनुमति से विधेयक पेश करता है और यह राजपत्र में छपता है।
- दूसरा वाचन: विधेयक के सिद्धांतों पर सामान्य चर्चा होती है। सदन चाहे तो इसे स्थायी समिति, प्रवर समिति या संयुक्त समिति को जांच के लिए भेज सकता है। फिर हर खंड पर चर्चा होती है और संशोधनों पर वोटिंग होती है।
- तीसरा वाचन: पूरे विधेयक को स्वीकार या अस्वीकार करने पर मतदान होता है।
एक सदन से पास होने के बाद विधेयक दूसरे सदन में जाता है, जहां यही प्रक्रिया दोहराई जाती है। राज्यसभा की संरचना के बारे में हमारा राज्यसभा एक्सप्लेनर पढ़ें।
सदनों में असहमति हो तो कानून कैसे बनता है
अगर एक सदन विधेयक को खारिज कर दे, संशोधनों पर सहमति न बने या छह महीने तक विधेयक पर कोई फैसला न हो, तो राष्ट्रपति अनुच्छेद 108 के तहत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। इसकी अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं और फैसला उपस्थित व मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से होता है। संयुक्त बैठक धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक के लिए नहीं बुलाई जा सकती।
धन विधेयक से कानून कैसे बनता है
कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, यह लोकसभा अध्यक्ष तय करते हैं। लोकसभा से पास होने के बाद राज्यसभा को इसे 14 दिन के भीतर लौटाना होता है। राज्यसभा केवल सिफारिश कर सकती है, जिसे मानना या न मानना लोकसभा पर निर्भर है। 14 दिन में न लौटाने पर विधेयक दोनों सदनों से पास माना जाता है (अनुच्छेद 109)।
राष्ट्रपति की मंजूरी: अंत में कानून कैसे बनता है
दोनों सदनों से पास विधेयक राष्ट्रपति के पास जाता है। अनुच्छेद 111 के तहत राष्ट्रपति मंजूरी दे सकते हैं, मंजूरी रोक सकते हैं या धन विधेयक को छोड़कर अन्य विधेयक को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं। संसद दोबारा पास कर दे तो मंजूरी देनी होती है। विस्तार से जानने के लिए हमारा राष्ट्रपति की शक्तियों पर एक्सप्लेनर देखें। मंजूरी के बाद अधिनियम राजपत्र में प्रकाशित होता है और सरकार की अधिसूचना में बताई गई तारीख से लागू होता है। कई बार कानून के अलग-अलग हिस्से अलग तारीखों पर लागू होते हैं और नियम बाद में बनाए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कोई आम सांसद भी विधेयक ला सकता है?
हां, कोई भी सांसद निजी सदस्य विधेयक पेश कर सकता है, हालांकि ऐसे विधेयक बहुत कम पास होते हैं।
राज्यसभा धन विधेयक को कितने दिन रोक सकती है?
अधिकतम 14 दिन। इसके बाद विधेयक दोनों सदनों से पास माना जाता है।
कानून कैसे बनता है, यह राज्यों में भी ऐसा ही है?
राज्य विधानमंडल में भी प्रक्रिया मिलती-जुलती है, जहां राज्यपाल मंजूरी देते हैं। इसके नियम अनुच्छेद 196 से 201 में हैं।
स्रोत: भारत का संविधान, विधायी विभाग, संसद की आधिकारिक वेबसाइट।





