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राष्ट्रपति की शक्तियां: चुनाव कैसे होता है, अध्यादेश, क्षमादान, आपातकाल और संविधान की सीमाएं

राष्ट्रपति का चुनाव, कार्यपालिका, विधायी, न्यायिक और आपातकालीन शक्तियां तथा मंत्रिपरिषद की सलाह से जुड़ी संवैधानिक सीमाएं।

भारत के राष्ट्रपति की संवैधानिक शक्तियां समझाने वाला डेमोक्रेटिक भारत लाइव का ग्राफिक
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सारांश

  • संक्षेप में: राष्ट्रपति भारत के राष्ट्राध्यक्ष और संविधान के संरक्षक हैं।
  • अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं।
  • भारत में संसदीय व्यवस्था है, इसलिए राष्ट्रपति की शक्तियां ज्यादातर मंत्रिपरिषद की सलाह पर इस्तेमाल होती हैं।
  • संविधान के उल्लंघन के आरोप में अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग से, जिसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।

संक्षेप में: राष्ट्रपति भारत के राष्ट्राध्यक्ष और संविधान के संरक्षक हैं। संविधान के अनुच्छेद 53 के तहत संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, लेकिन अनुच्छेद 74 के अनुसार वे मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं। यहां आसान भाषा में समझिए राष्ट्रपति की शक्तियां, चुनाव की प्रक्रिया और उनके विवेक की सीमाएं।

राष्ट्रपति का चुनाव कैसे होता है

राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती। अनुच्छेद 54 के तहत एक निर्वाचक मंडल उन्हें चुनता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों तथा दिल्ली व पुडुचेरी की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं। मनोनीत सदस्य वोट नहीं देते। मतदान आनुपातिक प्रतिनिधित्व की एकल संक्रमणीय मत प्रणाली से गुप्त रूप से होता है। उम्मीदवार की उम्र कम से कम 35 साल होनी चाहिए और कार्यकाल पांच साल का होता है। राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया अनुच्छेद 61 में दी गई है। संसद में चुनाव की प्रक्रिया समझने के लिए हमारा लोकसभा चुनाव एक्सप्लेनर और राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया भी पढ़ें।

राष्ट्रपति की शक्तियां: कार्यपालिका

  • लोकसभा में बहुमत वाले दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करना और उनकी सलाह पर मंत्रियों की नियुक्ति (अनुच्छेद 75)।
  • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज, राज्यों के राज्यपाल, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और मुख्य चुनाव आयुक्त जैसे पदों पर नियुक्ति।
  • राष्ट्रपति तीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर हैं (अनुच्छेद 53)।

अनुच्छेद 74 के तहत राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य हैं। वे सलाह को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं, लेकिन दोबारा भेजी गई सलाह माननी होती है। इस तरह राष्ट्रपति की शक्तियां संसदीय व्यवस्था के ढांचे में काम करती हैं।

राष्ट्रपति की शक्तियां: विधायी

  • संसद सत्र: राष्ट्रपति संसद का सत्र बुलाते और स्थगित करते हैं और लोकसभा भंग कर सकते हैं (अनुच्छेद 85)।
  • विधेयक पर मंजूरी: संसद से पास हर विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बनता है। धन विधेयक को छोड़कर वे विधेयक को एक बार पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं (अनुच्छेद 111)।
  • अध्यादेश: संसद सत्र न चलने पर जरूरी हालात में अध्यादेश जारी कर सकते हैं, जिसे सत्र शुरू होने के छह हफ्ते के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होती है (अनुच्छेद 123)।

राष्ट्रपति की शक्तियां: न्यायिक और आपातकालीन

अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति सजा माफ करने, कम करने या टालने का अधिकार रखते हैं, जिसमें मृत्युदंड के मामले भी शामिल हैं। अनुच्छेद 143 के तहत वे किसी कानूनी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं। संविधान में तीन तरह के आपातकाल का प्रावधान है: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352), राज्यों में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) और वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)। राष्ट्रीय आपातकाल केवल केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर ही लगाया जा सकता है।

राष्ट्रपति की शक्तियां: नाममात्र या वास्तविक

भारत में संसदीय व्यवस्था है, इसलिए राष्ट्रपति की शक्तियां ज्यादातर मंत्रिपरिषद की सलाह पर इस्तेमाल होती हैं। फिर भी कुछ स्थितियों में उनका विवेक अहम हो जाता है, जैसे किसी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर प्रधानमंत्री चुनना या विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना। संविधान विशेषज्ञ इसे संवैधानिक प्रमुख की भूमिका कहते हैं। द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई 2022 से देश की 15वीं राष्ट्रपति हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या राष्ट्रपति किसी विधेयक को हमेशा के लिए रोक सकते हैं?

धन विधेयक को वे लौटा नहीं सकते। अन्य विधेयक एक बार लौटाए जा सकते हैं, लेकिन संसद दोबारा पास करके भेजे तो मंजूरी देनी होती है। संविधान संशोधन विधेयक पर मंजूरी देना अनिवार्य है।

राष्ट्रपति को पद से कैसे हटाया जा सकता है?

संविधान के उल्लंघन के आरोप में अनुच्छेद 61 के तहत महाभियोग से, जिसके लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है।

क्या राष्ट्रपति शासन राष्ट्रपति खुद लगाते हैं?

अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन राज्यपाल की रिपोर्ट या अन्य जानकारी के आधार पर केंद्र सरकार की सलाह पर लगाया जाता है।

स्रोत: भारत का संविधान, विधायी विभाग, राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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