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लोकसभा चुनाव कैसे होता है: 543 सीटें, 272 का बहुमत, नामांकन से मतगणना और सरकार गठन तक पूरी प्रक्रिया

लोकसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया: सीटें, बहुमत, नामांकन, जमानत राशि, मतदान, मतगणना और सरकार गठन।

लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया समझाने वाला डेमोक्रेटिक भारत लाइव का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • संक्षेप में: लोकसभा चुनाव में देश के मतदाता सीधे वोट देकर 543 सांसद चुनते हैं।
  • लोकसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है, जिसे अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव की निगरानी और संचालन का अधिकार मिला है।
  • भारत में "फर्स्ट पास्ट द पोस्ट" प्रणाली लागू है, यानी किसी सीट पर जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है, भले उसे 50 प्रतिशत से कम वोट मिले हों।
  • 543 निर्वाचित सीटों वाली लोकसभा में सामान्य बहुमत के लिए 272 सीटें चाहिए।

संक्षेप में: लोकसभा चुनाव में देश के मतदाता सीधे वोट देकर 543 सांसद चुनते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी दल या गठबंधन को कम से कम 272 सीटों का बहुमत चाहिए। इस लेख में समझिए कि लोकसभा चुनाव की घोषणा से लेकर नतीजों और सरकार गठन तक की पूरी प्रक्रिया कैसे चलती है।

लोकसभा क्या है और इसमें कितनी सीटें हैं

लोकसभा संसद का निचला सदन है, जिसके सदस्य जनता सीधे चुनती है। संविधान के अनुच्छेद 81 के तहत इस समय लोकसभा में 543 निर्वाचित सीटें हैं। एंग्लो-इंडियन समुदाय के दो सदस्यों को मनोनीत करने की व्यवस्था 104वें संविधान संशोधन के बाद 2020 में खत्म हो चुकी है। लोकसभा का कार्यकाल पहली बैठक से पांच साल का होता है (अनुच्छेद 83), हालांकि राष्ट्रपति इसे पहले भी भंग कर सकते हैं।

चुनाव कौन कराता है और कौन वोट दे सकता है

लोकसभा चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है, जिसे अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव की निगरानी और संचालन का अधिकार मिला है। 18 साल या उससे अधिक उम्र का हर भारतीय नागरिक, जिसका नाम मतदाता सूची में दर्ज है, वोट दे सकता है। वोट देने से पहले सूची में अपना नाम जरूर देख लें, इसका तरीका हमारे वोटर लिस्ट गाइड में बताया गया है। चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 25 साल होनी चाहिए।

घोषणा से नामांकन तक: लोकसभा चुनाव के चरण

  • कार्यक्रम की घोषणा: निर्वाचन आयोग तारीखों का ऐलान करता है और उसी समय से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है।
  • अधिसूचना: हर चरण के लिए राष्ट्रपति के नाम से अधिसूचना जारी होती है, जिसके बाद नामांकन शुरू होते हैं।
  • नामांकन और जमानत राशि: लोकसभा उम्मीदवार को 25,000 रुपये जमानत राशि जमा करनी होती है, जबकि SC/ST उम्मीदवार के लिए यह 12,500 रुपये है। कुल वैध मतों का छठा हिस्सा न मिलने पर यह राशि जब्त हो जाती है।
  • जांच और नाम वापसी: नामांकन पत्रों की जांच के बाद तय तारीख तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकते हैं।
  • प्रचार: मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले प्रचार बंद हो जाता है। बड़े राज्यों में लोकसभा उम्मीदवार के खर्च की सीमा 95 लाख रुपये है।

मतदान और मतगणना कैसे होती है

मतदान EVM से होता है और हर EVM के साथ VVPAT मशीन जुड़ी रहती है, जिसकी पर्ची पर मतदाता सात सेकंड तक देख सकता है कि वोट किसे गया। किसी उम्मीदवार को पसंद न करने पर NOTA का विकल्प भी है। लोकसभा चुनाव कई चरणों में होता है; 2024 का चुनाव सात चरणों में हुआ था। सभी चरण पूरे होने के बाद एक तय दिन पर मतगणना होती है।

भारत में “फर्स्ट पास्ट द पोस्ट” प्रणाली लागू है, यानी किसी सीट पर जिस उम्मीदवार को सबसे ज्यादा वोट मिलते हैं, वही जीतता है, भले उसे 50 प्रतिशत से कम वोट मिले हों।

नतीजों के बाद सरकार कैसे बनती है

लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद निर्वाचन आयोग जीते हुए सांसदों की सूची राष्ट्रपति को सौंपता है। जिस दल या गठबंधन के पास 272 या उससे ज्यादा सांसदों का समर्थन होता है, उसके नेता को राष्ट्रपति प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं। अगर किसी के पास स्पष्ट बहुमत न हो, तो राष्ट्रपति अपने विवेक से उस नेता को बुलाते हैं जिसके बहुमत साबित करने की संभावना सबसे ज्यादा हो, और उसे सदन में विश्वास मत हासिल करना होता है। राज्यसभा का चुनाव इससे बिल्कुल अलग, अप्रत्यक्ष तरीके से होता है, जिसे राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया वाले लेख में समझाया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

लोकसभा में बहुमत के लिए कितनी सीटें चाहिए?

543 निर्वाचित सीटों वाली लोकसभा में सामान्य बहुमत के लिए 272 सीटें चाहिए।

क्या एक उम्मीदवार दो सीटों से चुनाव लड़ सकता है?

हां, जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत एक उम्मीदवार अधिकतम दो सीटों से लड़ सकता है, लेकिन दोनों जीतने पर उसे 14 दिन के भीतर एक सीट छोड़नी होती है।

लोकसभा चुनाव में NOTA को सबसे ज्यादा वोट मिलें तो क्या होगा?

मौजूदा नियमों में NOTA के वोट किसी उम्मीदवार के पक्ष में नहीं गिने जाते, इसलिए बाकी उम्मीदवारों में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला ही विजेता घोषित होता है।

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, भारत का संविधान (अनुच्छेद 81, 83, 84 और 324), जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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