संक्षेप में: आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) चुनाव आयोग के वे दिशानिर्देश हैं, जो चुनाव की घोषणा से लेकर नतीजे आने तक राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकार पर लागू रहते हैं। इसका मकसद है कि चुनाव निष्पक्ष हों और सत्ता में बैठा दल सरकारी संसाधनों का फायदा न उठा सके।
आदर्श आचार संहिता क्या है
आदर्श आचार संहिता किसी कानून के तहत बना नियम नहीं, बल्कि राजनीतिक दलों की सहमति से विकसित नैतिक नियमों का संग्रह है। इसकी शुरुआत 1960 में केरल विधानसभा चुनाव से मानी जाती है। बाद में भारत निर्वाचन आयोग ने इसे विस्तार दिया और समय-समय पर इसमें नए हिस्से जोड़े। चुनाव कराने का अधिकार आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 से मिलता है, और इसी के तहत वह आदर्श आचार संहिता लागू कराता है।
आदर्श आचार संहिता कब लागू होती है
जिस दिन चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करता है, उसी समय से आदर्श आचार संहिता लागू हो जाती है और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक रहती है। लोकसभा चुनाव में यह पूरे देश में लागू होती है, जबकि विधानसभा चुनाव में केवल संबंधित राज्य में। उपचुनाव में यह आम तौर पर संबंधित जिले या क्षेत्र तक सीमित रहती है। पंचायत और नगर निकाय चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग अपनी आचार संहिता लागू करते हैं। उपचुनाव से जुड़ी एक रिपोर्ट: नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव।
सरकार और मंत्रियों पर क्या पाबंदियां रहती हैं
- मंत्री नई योजनाओं, परियोजनाओं या आर्थिक अनुदान की घोषणा नहीं कर सकते और न ही नई परियोजनाओं का शिलान्यास कर सकते हैं।
- सरकारी गाड़ी, विमान, कर्मचारी और मशीनरी का इस्तेमाल चुनाव प्रचार में नहीं हो सकता।
- सरकारी खर्च पर उपलब्धियां बताने वाले विज्ञापन नहीं दिए जा सकते।
- चुनाव से जुड़े अधिकारियों के तबादले के लिए आम तौर पर आयोग की अनुमति जरूरी होती है।
पहले से चल रहे काम और जरूरी सेवाएं जारी रहती हैं। प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में राहत कार्यों पर रोक नहीं होती।
दलों और उम्मीदवारों के लिए नियम
आदर्श आचार संहिता के तहत जाति, धर्म या भाषा के आधार पर वोट मांगना मना है। मंदिर, मस्जिद, चर्च या किसी भी पूजा स्थल का इस्तेमाल प्रचार के लिए नहीं हो सकता। विरोधियों की निजी जिंदगी पर हमले, मतदाताओं को पैसे या शराब बांटना और डराना-धमकाना प्रतिबंधित है। रैली, सभा और जुलूस के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेनी होती है और लाउडस्पीकर के नियम मानने होते हैं। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनावी घोषणापत्रों से जुड़े दिशानिर्देश भी जोड़े गए। मतदान खत्म होने से 48 घंटे पहले सार्वजनिक प्रचार बंद हो जाता है; यह रोक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 से आती है।
उल्लंघन पर क्या कार्रवाई होती है
आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होने पर आयोग नोटिस जारी करता है, चेतावनी देता है और गंभीर मामलों में नेताओं के प्रचार पर कुछ घंटों या दिनों की रोक भी लगा सकता है। अगर कोई काम आपराधिक कानून या जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अपराध है, जैसे रिश्वत देना या धमकाना, तो FIR भी दर्ज हो सकती है। आम नागरिक cVIGIL ऐप पर फोटो या वीडियो के साथ शिकायत कर सकते हैं; आयोग ने ऐसी शिकायतों पर 100 मिनट के भीतर कार्रवाई का लक्ष्य रखा है। स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ा उदाहरण: राजस्थान नगर निकाय चुनाव।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या आदर्श आचार संहिता कानून है?
नहीं, यह कानूनी रूप से बनाया गया अधिनियम नहीं है। लेकिन आयोग इसे लागू कराता है और कई उल्लंघन दूसरे कानूनों के तहत अपराध भी होते हैं।
आचार संहिता के दौरान क्या सरकारी काम रुक जाते हैं?
नहीं। रोजमर्रा का प्रशासन और पहले से शुरू हुए काम चलते रहते हैं; रोक नई घोषणाओं और नई शुरुआत पर होती है।
आम आदमी शिकायत कैसे करे?
cVIGIL ऐप, हेल्पलाइन 1950 या जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में शिकायत की जा सकती है।
स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग (Model Code of Conduct दिशानिर्देश), cVIGIL, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





