उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की कुल संख्या में 2.29 करोड़ की बड़ी कमी दर्ज की गई है। चुनाव आयोग और राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इन पांच राज्यों में पुनरीक्षण प्रक्रिया से पहले कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 18.71 करोड़ थी, जो अब घटकर 16.43 करोड़ रह गई है। इस गिरावट में सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश का है, जहां अकेले दो करोड़ से अधिक मतदाता कम हुए हैं। निर्वाचन आयोग ने इन आंकड़ों के साथ ही अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की प्रशासनिक तैयारियां भी तेज कर दी हैं।

मतदाता सूची पुनरीक्षण का व्यापक प्रभाव और आंकड़े
पांच राज्यों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के परिणामों ने मतदाता संख्या में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि इन राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या में लगभग 12.2 प्रतिशत की गिरावट आई है। पुनरीक्षण से पहले जहां इन पांच राज्यों में 18.71 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, वहीं अंतिम सूची के प्रकाशन के बाद यह संख्या सिमटकर 16.43 करोड़ पर आ गई है। इसका सीधा अर्थ है कि मतदाता सूची से करीब 2.29 करोड़ नाम हटाए गए हैं। यह प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को शुद्ध और सटीक बनाने के उद्देश्य से संचालित की गई थी। इस पूरी प्रक्रिया में उत्तर प्रदेश की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही क्योंकि कुल गिरावट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी राज्य से संबंधित है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि केवल पात्र और वास्तविक मतदाता ही सूची में बने रहें।
उत्तर प्रदेश में मतदाता संख्या में सबसे बड़ी गिरावट
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू होने से पहले मतदाताओं की कुल संख्या 15.44 करोड़ दर्ज थी। जब ड्राफ्ट सूची तैयार की गई, तो यह संख्या घटकर 12.56 करोड़ तक पहुंच गई थी। हालांकि, इसके बाद सुधार की प्रक्रिया अपनाई गई और अंतिम सूची के प्रकाशन के समय लगभग 84 लाख नामों को दोबारा शामिल किया गया। इन संशोधनों के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की अंतिम संख्या 13.40 करोड़ निर्धारित की गई है। इसके बावजूद, राज्य में कुल 2.04 करोड़ मतदाताओं की कमी आई है, जो प्रतिशत के लिहाज से 13.24 प्रतिशत की गिरावट है। उत्तर प्रदेश में हुई यह कमी पांचों राज्यों में हुई कुल कमी का एक विशाल हिस्सा है। राज्य की 403 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 22 मई को समाप्त होने वाला है, जिसे देखते हुए यह पुनरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब और उत्तराखंड की स्थिति का विश्लेषण
पंजाब और उत्तराखंड में भी मतदाता सूची के आंकड़ों में उल्लेखनीय परिवर्तन देखे गए हैं। पंजाब में पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू होने से पहले मतदाताओं की संख्या 2.15 करोड़ थी। ड्राफ्ट सूची के दौरान यह संख्या घटकर 1.94 करोड़ रह गई थी, लेकिन अंतिम सूची में सुधार करते हुए करीब 7 लाख नामों को वापस जोड़ा गया। इसके परिणामस्वरूप पंजाब में अब मतदाताओं की संख्या 2.01 करोड़ है, जो कुल 14 लाख यानी 6.34 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है। पंजाब में ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों में से लगभग 34 प्रतिशत नामों की वापसी हुई है। दूसरी ओर, उत्तराखंड में पुनरीक्षण से पहले 80 लाख मतदाता थे। ड्राफ्ट सूची में यह संख्या 71 लाख पर आ गई थी और अंतिम सूची में यह मामूली बढ़त के साथ 72 लाख दर्ज की गई। उत्तराखंड में कुल 8 लाख मतदाताओं की कमी हुई है, जो 10.07 प्रतिशत की गिरावट है। यहां हटाए गए नामों में से केवल 3 प्रतिशत नाम ही वापस सूची में स्थान बना पाए।
मणिपुर और गोवा के मतदाता आंकड़ों में बदलाव
पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर और तटीय राज्य गोवा में भी मतदाता सूचियों का शुद्धिकरण किया गया है। मणिपुर में पुनरीक्षण से पहले लगभग 20.9 लाख मतदाता पंजीकृत थे। ड्राफ्ट सूची में यह आंकड़ा 19.3 लाख तक गिर गया था, जिसे अंतिम सूची में सुधार कर 19.6 लाख किया गया। इस प्रकार मणिपुर में कुल 1.3 लाख मतदाताओं की कमी हुई है, जो 6.33 प्रतिशत की गिरावट है। यहां हटाए गए नामों में से 17 प्रतिशत नामों को दोबारा शामिल किया गया। गोवा की स्थिति इन सभी राज्यों से अलग रही क्योंकि यहां अंतिम सूची में ड्राफ्ट सूची के मुकाबले भी मतदाताओं की संख्या कम हो गई। गोवा में पुनरीक्षण से पहले 11.85 लाख मतदाता थे, जो ड्राफ्ट सूची में 10.85 लाख हुए और अंतिम सूची में और घटकर 10.58 लाख रह गए। गोवा में कुल 1.3 लाख यानी 10.76 प्रतिशत मतदाता कम हुए हैं और यहां हटाए गए नामों की कोई वापसी दर्ज नहीं की गई है।
चुनाव आयोग की तैयारियां और आगामी विधानसभा चुनाव
इन पांचों राज्यों में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं, जिसके लिए चुनाव आयोग ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश की विधानसभा का कार्यकाल 22 मई को समाप्त हो रहा है, जबकि मणिपुर, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च 2027 में अलग-अलग तिथियों पर समाप्त होगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के नियमों के अनुसार, चुनाव आयोग कार्यकाल समाप्त होने से छह महीने पहले भी चुनाव कराने का अधिकार रखता है। आयोग के अधिकारियों ने चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए राज्यों का दौरा शुरू कर दिया है। अक्टूबर के महीने में मणिपुर, उत्तराखंड और पंजाब में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इन बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की स्थिति और मतदाता सूची की शुद्धता जैसे विषयों पर चर्चा की गई। आयोग का लक्ष्य है कि 1 जनवरी तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले सभी युवाओं को सूची में शामिल किया जाए ताकि वे आगामी लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी कर सकें।
स्रोत: Aaj Tak





