संक्षेप में: द्रिक पंचांग के अनुसार छठ पूजा 2026 का चार दिन का पर्व शुक्रवार 13 नवंबर को नहाय-खाय से शुरू होगा। 14 नवंबर को खरना, 15 नवंबर को संध्या अर्घ्य और 16 नवंबर को उषा अर्घ्य के साथ व्रत का पारण होगा। नई दिल्ली में 15 नवंबर को सूर्यास्त शाम 5:28 बजे और 16 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:44 बजे है।
छठ पूजा 2026 का चार दिन का कैलेंडर
छठ पूजा कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से सप्तमी तक मनाई जाती है। द्रिक पंचांग (नई दिल्ली) के अनुसार:
- पहला दिन, 13 नवंबर (शुक्रवार): नहाय-खाय। सूर्योदय 6:42 बजे, सूर्यास्त 5:28 बजे।
- दूसरा दिन, 14 नवंबर (शनिवार): लोहंडा और खरना। सूर्योदय 6:43 बजे, सूर्यास्त 5:28 बजे।
- तीसरा दिन, 15 नवंबर (रविवार): छठ पूजा और संध्या अर्घ्य। सूर्यास्त शाम 5:28 बजे।
- चौथा दिन, 16 नवंबर (सोमवार): उषा अर्घ्य और पारण। सूर्योदय सुबह 6:44 बजे।
षष्ठी तिथि 14 नवंबर रात 11:23 बजे शुरू होकर 15-16 नवंबर की दरमियानी रात 2:00 बजे खत्म होगी। अर्घ्य सूर्यास्त और सूर्योदय के समय दिया जाता है, और यह समय हर शहर में अलग होता है। बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सूर्यास्त दिल्ली से पहले होता है, इसलिए अपने शहर का समय स्थानीय पंचांग से देख लें।
छठ पूजा का महत्व और मान्यताएं
छठ पूजा सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का पर्व है। द्रिक पंचांग इसे सूर्य षष्ठी, डाला छठ और छठ पर्व के नाम से भी बताता है। मान्यता के अनुसार यह व्रत परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की कुशलता और आरोग्य की कामना से रखा जाता है। यह मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में मनाया जाता है, लेकिन अब दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे शहरों में भी बड़े पैमाने पर घाटों पर आयोजन होते हैं। इस पर्व की खासियत यह है कि इसमें डूबते और उगते, दोनों सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
छठ से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। एक मान्यता इसे रामायण काल से जोड़ती है, जिसमें अयोध्या लौटने के बाद सीता ने सूर्य उपासना की थी। दूसरी कथा महाभारत के कर्ण से जुड़ी है, जिन्हें सूर्य पुत्र माना जाता है। ये कथाएं परंपरा का हिस्सा हैं, ऐतिहासिक प्रमाण नहीं।
नहाय-खाय से पारण तक: छठ पूजा की विधि
नहाय-खाय: व्रती स्नान करके घर की सफाई करते हैं और शुद्ध सात्विक भोजन, आम तौर पर कद्दू-भात और चने की दाल, ग्रहण करते हैं।
खरना: दिनभर उपवास के बाद शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद बनाकर पूजा की जाती है। प्रसाद ग्रहण करने के बाद लगभग 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।
संध्या अर्घ्य: तीसरे दिन व्रती परिवार के साथ नदी, तालाब या घाट पर जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। बांस के सूप और डाले में ठेकुआ, फल, गन्ना और नारियल सजाए जाते हैं।
उषा अर्घ्य और पारण: चौथे दिन सूर्योदय से पहले घाट पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद प्रसाद बांटकर व्रत खोला जाता है।
घाट पर सुरक्षा और सेहत का ध्यान
लंबे निर्जला व्रत में बुजुर्ग व्रती और किसी बीमारी से जूझ रहे लोग डॉक्टर से सलाह जरूर लें। घाटों पर भीड़ में बच्चों का ध्यान रखें, गहरे पानी में न जाएं और प्रशासन की बैरिकेडिंग का पालन करें। प्रदूषित जल वाले घाटों के बजाय प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाबों का विकल्प भी कई शहरों में होता है। छठ पर घर जाने वालों के लिए पढ़ें: छठ-दिवाली स्पेशल ट्रेनें। संतान के लिए रखे जाने वाले एक और व्रत पर हमारी रिपोर्ट: जितिया व्रत की कथा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
छठ पूजा 2026 कब है?
मुख्य छठ पूजा और संध्या अर्घ्य रविवार, 15 नवंबर 2026 को है। पर्व 13 से 16 नवंबर तक चलेगा।
खरना कब है?
शनिवार, 14 नवंबर 2026 को।
दिल्ली में संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य का समय क्या है?
15 नवंबर को सूर्यास्त शाम 5:28 बजे और 16 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6:44 बजे है।
छठ में कितने घंटे का निर्जला व्रत होता है?
परंपरा के अनुसार खरना के प्रसाद के बाद से उषा अर्घ्य तक, लगभग 36 घंटे।
स्रोत: द्रिक पंचांग छठ पूजा कैलेंडर 2026, छठ पूजा तिथि (नई दिल्ली)। धार्मिक मान्यताएं परंपरा के अनुसार दी गई हैं।





