Anaj Mandi Bhav: देशभर की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को खरीफ फसलों की नई आवक और रबी फसलों की निरंतर मांग के बीच खाद्यान्न, दलहन और तिलहन के भावों में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, आटा मिलों और पोल्ट्री उद्योग की सक्रिय लिवाली से बाजार में हलचल तेज है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा की मंडियों से प्राप्त ताजा बाजार आंकड़ों के अनुसार, गेहूं और धान की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई है, जबकि मक्का और सोयाबीन की दरों में आवक के दबाव के चलते हल्का सुधार या नरमी का दौर देखा गया है। कृषि उपज पोर्टल के औसत मॉडल आंकड़ों के मुताबिक गेहूं का औसत मॉडल भाव 2,722 रुपये प्रति क्विंटल और धान का भाव 2,733 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर रिपोर्ट हुआ है, जबकि मोटे अनाजों में मक्का 2,365 रुपये और बाजरा 2,446 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास कारोबार कर रहा है।
Anaj Mandi Bhav: गेहूं और धान के बाजार में लिवाली का जोर, कीमतों में दर्ज हुआ सुधार
देश के प्रमुख खाद्यान्नों में गेहूं के बाजार में लगातार मजबूती का रुख बना हुआ है। आटा मिलों (Flour Mills) की दैनिक खपत बढ़ने और बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाले टुकड़ी व शरबती गेहूं की सीमित उपलब्धता के कारण भावों को मजबूत समर्थन मिल रहा है। औसत मॉडल आंकड़ों के अनुसार गेहूं में लगभग 80 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़त दर्ज की गई है और यह 2,722 रुपये प्रति क्विंटल के औसत स्तर पर पहुंच गया है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की मंडियों में बढ़िया मिल क्वालिटी गेहूं 2,650 से 2,850 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रहा है।
खरीफ की प्रमुख फसल धान की मंडियों में आवक अब चरम की ओर बढ़ रही है। विभिन्न कृषि मंडियों में सामान्य धान (कॉमन पैडी) से लेकर बासमती और 1509, 1718 जैसी संकर किस्मों की खरीद जोरों पर है। औसत आंकड़ों में धान के मॉडल भाव में 54 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई, जिससे इसका भाव 2,733 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर आ गया। हालांकि, बासमती किस्मों की बात करें तो न्यूनतम नमी वाले सूखे धान की नीलामी मंडियों में 3,200 रुपये से लेकर 3,800 रुपये प्रति क्विंटल तक के ऊंचे स्तरों पर हो रही है, जबकि अधिक नमी वाले सामान्य धान के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के आसपास बने हुए हैं।
मक्का और बाजरा के मंडियों में क्या हैं ताजा रुझान?
मोटे अनाजों के वर्ग में मक्के की कीमतों पर नई फसल की भारी आवक का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, बिहार के खगड़िया और उत्तर प्रदेश के बहराइच व कन्नौज अंचल की मंडियों में किसानों द्वारा ताजा काटा गया मक्का भारी मात्रा में लाया जा रहा है। आवक में तेजी आने और दानों में प्रारंभिक नमी की मात्रा अधिक होने के कारण मक्के के मॉडल भाव में लगभग 28 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी दर्ज की गई है, जिससे इसका औसत भाव 2,365 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। पोल्ट्री फीड निर्माताओं और स्टार्च मिलों द्वारा केवल सूखे और साफ मक्के की खरीद पर ही प्रीमियम मूल्य दिया जा रहा है।
दूसरी ओर, बाजरे के बाजार में त्योहारी मांग और शीत ऋतु की शुरुआत के मद्देनजर ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों से मांग बनी हुई है। राजस्थान के जयपुर, दौसा और अलवर तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा व अलीगढ़ मंडियों में बाजरे का औसत मॉडल भाव 2,446 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जिसमें पिछले सत्र के मुकाबले 9 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली बढ़त देखी गई। स्थानीय पशु आहार निर्माताओं और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों द्वारा बाजरे की नियमित खरीद से भावों को निचला समर्थन मिल रहा है।
चना, मसूर और सोयाबीन के दामों में भारी उतार-चढ़ाव
अनाज के साथ-साथ दलहन और तिलहन मंडियों में भी महत्वपूर्ण उठापटक दर्ज की गई है। दलहन श्रेणी में चने के भाव में जोरदार तेजी का रुख देखा गया, जहां औसत मॉडल भाव में 337 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल आया और यह 7,130 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया। आगामी त्योहारों पर बेसन और दाल की बढ़ती मांग तथा मंडियों में चने के पुराने स्टॉक में कमी इस तेजी का मुख्य कारण मानी जा रही है। इसके विपरीत, मसूर की कीमतों में मुनाफावसूली का असर दिखा और इसका औसत भाव 321 रुपये घटकर 6,633 रुपये प्रति क्विंटल रह गया।
तिलहन वर्ग में मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की मंडियों में पीली सोयाबीन की नई आवक तेज होने से कीमतों में सुधार देखा गया। औसत आंकड़ों के अनुसार सोयाबीन का मॉडल भाव 95 रुपये की गिरावट के साथ 6,730 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रहा है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स और खाद्य तेल रिफाइनरियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोया तेल की कीमतों की समीक्षा के आधार पर ही घरेलू मंडियों में तिलहन की बोली लगाई जा रही है।
फसल बेचने से पूर्व किसानों के लिए जरूरी व्यावहारिक सावधानियां
कृषि उपज को मंडी में लाने से पहले किसानों को अपनी फसल की गुणवत्ता प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए। वर्तमान में बरसात के बाद आ रही नई फसलों में नमी (Moisture) सबसे बड़ा निर्णायक पहलू बनी हुई है। यदि अनाज में सरकारी मानकों (सामान्यतः 12 से 14 प्रतिशत) से अधिक नमी पाई जाती है, तो व्यापारी या आढ़ती वजन और कीमत में भारी कटौती कर देते हैं। इसलिए किसान उपज को खलिहान या पक्के फर्श पर अच्छी तरह सुखाकर और उसमें से धूल, मिट्टी व तिनकों की छनाई करके ही मंडी लाएं।
इसके साथ ही, किसानों को अपने राज्य के ई-नाम (e-NAM) पोर्टल अथवा कृषि विभाग के डिजिटल डैशबोर्ड के माध्यम से अपनी नजदीकी तीन-चार मंडियों के न्यूनतम, अधिकतम और मॉडल भाव की तुलना अवश्य करनी चाहिए। अपनी उपज को केवल किसी एक आढ़ती पर निर्भर होकर तुरंत बेचने के बजाय खुली नीलामी (Open Auction) में हिस्सा लेना चाहिए। यदि खुले बाजार का भाव सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मिल रहा हो, तो किसानों को सरकारी खरीद केंद्रों पर पंजीकरण कराकर अपनी उपज एमएसपी पर बेचने का विकल्प चुनना चाहिए।
Anaj Mandi Bhav: आगामी दिनों में कैसा रहेगा अनाज मंडियों का कारोबारी परिदृश्य?
कृषि अर्थशास्त्रियों और कमोडिटी जानकारों के अनुसार, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह और नवंबर के शुरुआती दिनों में धान, मक्का और सोयाबीन की दैनिक आवक अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगी। आवक के इस दबाव के कारण औसत गुणवत्ता वाले अनाजों की कीमतों में सीमित नरमी बनी रह सकती है, किंतु अच्छी गुणवत्ता वाले सूखे अनाज और दलहन की मांग त्योहारी सीजन के चलते लगातार ऊंची बनी रहेगी। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की दैनिक चाल, मौसम के पूर्वानुमान और स्थानीय मंडियों के लाइव भावों की सटीक पुष्टि करने के बाद ही अपनी उपज की चरणबद्ध बिक्री का निर्णय लें।
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