दिन में सबके पास 24 घंटे ही होते हैं, फिर भी कुछ छात्र पढ़ाई, खेल और शौक, सब कुछ संभाल लेते हैं, जबकि कुछ को हमेशा समय कम लगता है। इसका बड़ा कारण समय का सही इस्तेमाल है। टाइम मैनेजमेंट का मतलब हर मिनट पढ़ाई करना नहीं, बल्कि यह तय करना है कि कौन सा काम कब और कितनी देर करना है। जानिए छात्रों के लिए आसान तरीके।
पहले देखें कि समय कहां जा रहा है
दो-तीन दिन तक एक नोटबुक में लिखें कि आपने किस काम में कितना समय लगाया। इसमें स्कूल या कॉलेज, कोचिंग, पढ़ाई, मोबाइल, टीवी, खेल और सोने का समय शामिल करें। अक्सर पता चलता है कि सोशल मीडिया या बिना मकसद के वीडियो देखने में अनुमान से कहीं ज्यादा समय चला जाता है। फोन की सेटिंग में स्क्रीन टाइम का विकल्प भी यह जानकारी देता है।

दिन की योजना बनाएं
- रात को सोने से पहले अगले दिन के जरूरी कामों की छोटी सूची बनाएं
- सूची में से सबसे जरूरी तीन काम चुनें और उन्हें पहले पूरा करें
- कठिन विषय उस समय पढ़ें, जब आप सबसे ज्यादा तरोताजा महसूस करते हैं
- स्कूल और कोचिंग के बीच के खाली समय में छोटे काम, जैसे रिवीजन या सवाल हल करना, करें
बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें
“पूरा अध्याय पढ़ना है” जैसा लक्ष्य भारी लगता है और टालने का मन करता है। इसके बजाय “आज पहले दो टॉपिक पढ़ूंगा और पांच सवाल हल करूंगा” जैसे छोटे और साफ लक्ष्य बनाएं। कई छात्र 25 से 45 मिनट पढ़ाई और फिर 5 से 10 मिनट के छोटे ब्रेक का तरीका अपनाते हैं। इससे ध्यान बना रहता है और थकान कम होती है। काम पूरा होने पर उसे सूची में काटें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
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मोबाइल और ध्यान भटकाने वाली चीजें
पढ़ाई के समय फोन को साइलेंट करके दूसरे कमरे में या पहुंच से दूर रखें। जरूरी हो तो नोटिफिकेशन बंद करें। पढ़ाई की जगह साफ और शांत हो, और वहां सिर्फ जरूरी किताबें रखें। ऑनलाइन क्लास या पढ़ाई के दौरान दूसरे टैब खोलने से बचें। मोबाइल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं, बल्कि उसके लिए एक तय समय रखना बेहतर है।
टालमटोल से कैसे बचें
टालमटोल अक्सर इसलिए होता है, क्योंकि काम कठिन, उबाऊ या बहुत बड़ा लगता है। ऐसे में बस पांच मिनट के लिए शुरुआत करने का नियम अपनाएं। एक बार काम शुरू हो जाए, तो आगे बढ़ना आसान हो जाता है। दोस्तों के साथ पढ़ाई का लक्ष्य साझा करना या स्टडी ग्रुप बनाना भी मदद करता है, बशर्ते ग्रुप में बातचीत से ज्यादा पढ़ाई हो।
आराम भी योजना का हिस्सा
अच्छे टाइम मैनेजमेंट में नींद, खेल, परिवार के साथ समय और शौक भी शामिल हैं। पूरी नींद न लेने से अगले दिन पढ़ाई का असर कम होता है। हफ्ते में एक बार अपनी योजना देखें कि क्या काम किया और क्या बदलने की जरूरत है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या टाइम टेबल बहुत सख्त होना चाहिए?
नहीं, टाइम टेबल लचीला और व्यावहारिक हो, ताकि उसे लंबे समय तक निभाया जा सके।
स्रोत: नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





