Sarso Mandi Bhav: देशभर की प्रमुख तिलहन मंडियों में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को सरसों की कीमतों और नई आवक को लेकर किसानों, तेल मिलर्स और कमोडिटी कारोबारियों की सक्रियता स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों, विशेष रूप से शुद्ध सरसों तेल की खुदरा मांग में भारी उछाल आया है, जिससे पेराई मिलों द्वारा कच्ची सरसों की लिवाली लगातार मजबूत बनी हुई है। उत्तर प्रदेश और राजस्थान की मंडियों से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, कई प्रमुख व्यापारिक केंद्रों पर सरसों के भाव 7,000 रुपये प्रति क्विंटल से काफी ऊपर बने हुए हैं, जबकि कुछ चुनिंदा मंडियों में यह आंकड़ा 9,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को भी पार करता दिखा है। विभिन्न मंडियों में नमी की मात्रा, तेल का प्रतिशत और स्थानीय आवक के आधार पर कीमतों में अंतर मौजूद है, जिसके चलते किसानों को अपनी उपज बेचने से पहले स्थानीय कृषि उपज मंडी समिति से उस दिन के सत्यापित भाव की पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
Sarso Mandi Bhav: राष्ट्रीय और प्रांतीय स्तर पर सरसों के औसत मॉडल भाव की स्थिति
तिलहन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश की रिपोर्टिंग मंडियों में सरसों का औसत मॉडल भाव 7,619 रुपये से लेकर 7,807 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास दर्ज किया गया है। प्रदेश के विभिन्न बाजारों में दर्ज न्यूनतम भाव 5,400 रुपये और अधिकतम भाव 13,000 रुपये प्रति क्विंटल तक रहा है। यह व्यापक दायरा यह स्पष्ट करता है कि केवल एक औसत दर पूरे राज्य का वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं करती, बल्कि स्थानीय माल की ग्रेडिंग, तेल की मात्रा और बाजार में मांग-आपूर्ति का संतुलन ही अंतिम दाम तय करता है।
अखिल भारतीय स्तर पर संकलित आंकड़ों के मुताबिक, विभिन्न राज्यों की मंडियों में सरसों का सामान्य मॉडल भाव 7,676 रुपये से लेकर 7,976 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में कारोबार कर रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम कीमतें 4,000 रुपये से लेकर अधिकतम 12,400 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई हैं। अलग-अलग कमोडिटी पोर्टलों द्वारा एकत्रित किए जाने वाले नमूनों और मंडियों की संख्या में भिन्नता होने के कारण औसत दरों में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है।
राजस्थान की मंडियों में सरसों के ताजा भाव और रुझान
देश के सबसे बड़े सरसों उत्पादक राज्य राजस्थान में शनिवार को भी कई प्रमुख कृषि उपज मंडियों में भावों को मजबूत समर्थन मिलता दिखाई दिया है। टोंक जिले की टोडारायसिंह मंडी में सरसों का मॉडल भाव 9,150 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो राज्य के उच्चतम स्तरों में शामिल है। इसके अतिरिक्त टोंक की मालपुरा मंडी में 8,500 रुपये और दौसा मंडी में 8,602 रुपये प्रति क्विंटल के मॉडल भाव पर व्यापार हुआ।
हनुमानगढ़ जिले की भादरा मंडी में सरसों का भाव 8,461 रुपये प्रति क्विंटल रहा। कोटा संभाग की इटावा मंडी में 8,663 रुपये और उदयपुर की फतेहनगर मंडी में 8,361 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर कारोबार दर्ज किया गया। बूंदी की देई मंडी में मॉडल भाव 7,850 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि डीग जिले की सीकरी मंडी में भाव 8,200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहे। राजस्थान के अधिकांश बाजारों में पिछले एक सप्ताह से कीमतों में निरंतर सुधार का रुख बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश की मंडियों में क्या रहा सरसों का बाजार?
उत्तर प्रदेश की प्रमुख कृषि उपज मंडियों में भी स्थानीय तेल मिलों की सीधी मांग के चलते सरसों के भाव ऊंचे स्तरों पर टिके हुए हैं। लखीमपुर खीरी जिले की गोला गोकर्णनाथ मंडी में सरसों का मॉडल भाव 7,813 रुपये प्रति क्विंटल और सीतापुर जिले की हरगांव मंडी में 8,304 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। कानपुर देहात की रूरा मंडी में मॉडल भाव 8,200 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि पुखरायां मंडी में भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर दर्ज किए गए।
बुंदेलखंड और मध्य यूपी के अन्य केंद्रों पर नजर डालें तो चित्रकूट की मऊ मंडी में 7,900 रुपये, हमीरपुर की मौदहा मंडी में 7,500 रुपये और फर्रुखाबाद की कायमगंज मंडी में भाव 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा व खैरागढ़ क्षेत्र में काली सरसों के भाव 7,700 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किए गए। स्थानीय कोल्हू संचालकों और सॉल्वेंट एक्सट्रैक्शन प्लांटों द्वारा नियमित खरीदारी किए जाने से मंडियों में माल का उठाव तेजी से हो रहा है।
सरसों की कीमतों में तेजी और उतार-चढ़ाव के प्रमुख कारण
सरसों के मंडी भाव मुख्य रूप से खाद्य तेलों की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू त्योहारी मांग के सीधे प्रभाव से संचालित होते हैं। आयातित पाम ऑयल और सोयाबीन तेल पर लगने वाले सीमा शुल्क तथा वैश्विक स्तर पर खाद्य तेलों में आई तेजी ने घरेलू सरसों तेल को प्रतिस्पर्धी बना दिया है। दिवाली और भैयादूज के त्योहारों पर पारंपरिक पकवानों और मिठाइयों के निर्माण में सरसों के तेल की भारी खपत होती है, जिससे पेराई मिलें अपने प्लांटों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए मंडियों से लगातार कच्ची सरसों खरीद रही हैं।
इसके अलावा, मंडियों में पुराने स्टॉक की उपलब्धता धीरे-धीरे कम होना और आगामी रबी सत्र के लिए किसानों द्वारा उन्नत बीजों के रूप में सरसों के दाने का संचयन भी बाजार में आपूर्ति को सीमित बनाए हुए है। जब तक मंडियों में नई फसल की बड़े पैमाने पर आवक शुरू नहीं होती, तब तक मौजूदा आपूर्ति और उच्च खपत का यह संतुलन कीमतों को नीचे गिरने से रोके रखता है।
गुणवत्ता, नमी और तेल प्रतिशत का अंतिम मूल्य पर प्रभाव
किसानों को यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि मंडी में प्रदर्शित औसत या मॉडल भाव हर प्रकार के माल पर समान रूप से लागू नहीं होता। सरसों का वास्तविक विक्रय मूल्य दानों में मौजूद तेल की मात्रा (Oil Content) और नमी (Moisture) के स्तर पर निर्भर करता है। सामान्यतः 40 से 42 प्रतिशत तेल की मात्रा वाली अच्छी तरह सूखी और साफ सरसों को ही व्यापारी उच्चतम या प्रीमियम दर पर खरीदते हैं।
यदि सरसों में नमी की मात्रा 8 प्रतिशत से अधिक पाई जाती है या उसमें मिट्टी, तिनके व कचरे का मिश्रण होता है, तो आढ़ती वजन और मूल्य में कटौती करते हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी जाती है कि वे फसल को मंडी लाने से पूर्व खलिहान में अच्छी तरह सुखा लें और छलनी से छानकर कंकड़-पत्थर अलग कर लें ताकि उन्हें उनकी उपज का अधिकतम और न्यायसंगत मूल्य मिल सके।
Sarso Mandi Bhav: फसल बेचने से पूर्व किसानों के लिए आवश्यक मार्गदर्शन
सरसों बेचने की योजना बना रहे किसानों को केवल किसी एक आढ़ती या व्यापारी की बात पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसानों को अपने स्मार्टफोन के जरिए ई-नाम (e-NAM) पोर्टल या संबंधित राज्य के कृषि विपणन बोर्ड की वेबसाइट पर जाकर आसपास की दो से तीन मंडियों के न्यूनतम, अधिकतम और मॉडल भाव की तुलना करनी चाहिए। यदि परिवहन लागत निकालने के बाद किसी पड़ोसी जिले की मंडी में काफी बेहतर दर मिल रही हो, तो वहां माल ले जाना अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकता है।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और खुले बाजार में मिल रहे वास्तविक भाव का मिलान जरूर करें। चूंकि वर्तमान में खुले बाजार के भाव सरकारी एमएसपी से काफी ऊंचे स्तरों पर चल रहे हैं, इसलिए अधिकांश किसान खुली नीलामी में अपनी उपज बेचकर बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। किसान किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए मंडी में खुली बोली प्रक्रिया में ही भाग लें और भुगतान की पक्की रसीद अवश्य प्राप्त करें।
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