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दशहरे की परंपराएं: नीलकंठ दर्शन, पान, जलेबी, सोना पत्ती और देश के अलग-अलग राज्यों के रीति-रिवाज

विजयादशमी पर नीलकंठ पक्षी के दर्शन की मान्यता, पान खाने और जलेबी की परंपरा, आपटा पत्ते, नए काम की शुरुआत, विद्यारंभ और मैसूर, कुल्लू व बस्तर दशहरे की खास बातें।

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सारांश

  • दशहरा पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य और समुदाय में इसके रीति-रिवाज अलग हैं।
  • उत्तर भारत के कई हिस्सों में दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता है।
  • महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई हिस्सों में आपटा या शमी के पत्तों को "सोना" मानकर रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।
  • मेलों और रावण दहन में भीड़ का ध्यान रखें, बच्चों को साथ रखें और कचरा फैलाने से बचें।

दशहरा पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन हर राज्य और समुदाय में इसके रीति-रिवाज अलग हैं। कहीं रावण दहन, कहीं देवी पूजा, तो कहीं कई दिनों तक चलने वाला मेला। दशहरा 2026 मंगलवार, 20 अक्टूबर को है। जानिए दशहरे की परंपराएं और उनके पीछे की मान्यताएं।

नीलकंठ दर्शन

उत्तर भारत के कई हिस्सों में दशहरे के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को शुभ माना जाता है। नीलकंठ को भगवान शिव के नीलकंठ रूप से जोड़ा जाता है। कुछ कथाओं में कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण से युद्ध से पहले नीलकंठ के दर्शन किए थे। ध्यान रखें कि यह जंगली पक्षी है और वन्यजीव कानून के तहत संरक्षित है। इसे पकड़कर पिंजरे में रखना या पैसे लेकर दर्शन कराना गलत है। प्राकृतिक माहौल में खेतों या पेड़ों पर दिख जाए, तो दर्शन करें।

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पान और जलेबी

कई जगहों पर दशहरे पर पान खाने की परंपरा है, जिसे विजय और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। रावण दहन के बाद जलेबी और फाफड़ा खाने का चलन, खासकर गुजरात में, बहुत लोकप्रिय है। उत्तर भारत में भी दशहरे के मेले में जलेबी खूब बिकती है।

सोना पत्ती बांटना

महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई हिस्सों में आपटा या शमी के पत्तों को “सोना” मानकर रिश्तेदारों और दोस्तों को दिया जाता है और बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है। महाराष्ट्र में इस दिन सीमोल्लंघन यानी गांव की सीमा पार करने की प्रतीकात्मक परंपरा भी है।

यह भी पढ़ें: दशहरा 2026 कब है: 20 अक्टूबर को विजयादशमी, पूजा विधि, शस्त्र पूजा और रावण दहन का महत्व | रावण दहन क्यों किया जाता है: दशहरे की कथा, रावण के दस सिर का प्रतीक और रामलीला की परंपरा

नए काम और विद्यारंभ

दशहरे को साल के सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है। कई लोग इस दिन नया व्यापार, नई खरीदारी या गृह प्रवेश करते हैं। दक्षिण भारत में विजयादशमी पर छोटे बच्चों का विद्यारंभ यानी पढ़ाई की शुरुआत कराने की परंपरा है, जिसमें बच्चे से चावल या रेत पर पहला अक्षर लिखवाया जाता है।

राज्यों के खास दशहरे

  • मैसूर दशहरा, कर्नाटक: मैसूर महल की रोशनी और जंबू सवारी यानी हाथियों की भव्य शोभायात्रा प्रसिद्ध है
  • कुल्लू दशहरा, हिमाचल प्रदेश: यहां उत्सव विजयादशमी से शुरू होकर कई दिन चलता है और आसपास के देवताओं की पालकियां भगवान रघुनाथ के पास आती हैं
  • बस्तर दशहरा, छत्तीसगढ़: यह लंबे समय तक चलने वाला उत्सव देवी दंतेश्वरी से जुड़ा है और आदिवासी परंपराओं को दिखाता है
  • बंगाल: यहां बिजया दशमी पर दुर्गा विसर्जन और सिंदूर खेला होता है

परंपरा के साथ जिम्मेदारी

मेलों और रावण दहन में भीड़ का ध्यान रखें, बच्चों को साथ रखें और कचरा फैलाने से बचें। पटाखों का इस्तेमाल स्थानीय नियमों के अनुसार करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

दशहरे पर कौन सा नया काम शुभ माना जाता है?

परंपरा में नया व्यापार, पढ़ाई की शुरुआत और खरीदारी शुभ मानी जाती है। व्यक्तिगत मुहूर्त के लिए पंचांग या पंडित से सलाह लें।

स्रोत: भारत सरकार, संसदीय कार्य मंत्रालय: 2026 अवकाश कैलेंडर, Tirth: Hindu Festivals 2026। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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