छठ महापर्व चार दिन का अनुष्ठान है, जिसमें व्रती सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं। इस बार छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य होता है। इस व्रत की पहचान इसकी शुद्धता और अनुशासन है। व्रत रखने वाले के साथ पूरा परिवार इन नियमों का पालन करता है। जानिए छठ व्रत के नियम, जो परंपरा से चले आ रहे हैं।
घर और रसोई की शुद्धता
छठ की तैयारी घर की सफाई से शुरू होती है। नहाय-खाय से पहले पूरा घर, खासकर रसोई, धोकर साफ की जाती है। कई परिवार प्रसाद के लिए अलग चूल्हा, नए बर्तन या खास तौर पर धोए गए बर्तन रखते हैं। प्रसाद बनाने की जगह पर जूते-चप्पल नहीं ले जाए जाते।

भोजन से जुड़े नियम
- चारों दिन घर में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं होता
- नहाय-खाय पर व्रती स्नान के बाद कद्दू-भात और चने की दाल जैसा सात्विक भोजन करते हैं
- खरना की शाम गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद लेने के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है
- प्रसाद बनाते समय उसे चखा नहीं जाता
- परिवार के दूसरे सदस्य भी इन दिनों मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहते हैं
व्रती के लिए नियम
परंपरा के अनुसार व्रती इन दिनों साफ, बिना सिले या नए कपड़े पहनते हैं। महिलाएं आमतौर पर साड़ी और पुरुष धोती पहनते हैं। कई व्रती पलंग की जगह जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोते हैं। मन को शांत रखना, किसी से कटु वचन न बोलना और पूजा पर ध्यान रखना भी नियमों का हिस्सा माना जाता है।
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प्रसाद से जुड़े नियम
ठेकुआ, कसार और दूसरे प्रसाद पूरी पवित्रता से बनाए जाते हैं। गेहूं को धोकर सुखाने और पिसवाने तक का काम सावधानी से होता है, ताकि उस पर कोई पक्षी या जूठन न पड़े। प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले फल और सब्जियां साफ पानी से धोकर रखी जाती हैं।
घाट पर नियम
- सूप और दउरा जमीन पर सीधे न रखकर साफ कपड़े या केले के पत्ते पर रखें
- घाट पर गंदगी न फैलाएं, पूजा सामग्री को पानी में फेंकने से बचें
- अर्घ्य के समय व्रती के आसपास भीड़ न लगाएं
- पानी में उतरते समय गहराई का ध्यान रखें और बच्चों को अकेला न छोड़ें
क्या न करें
- प्रसाद या पूजा सामग्री को बिना हाथ धोए न छुएं
- व्रती के सामने तामसिक भोजन न करें
- घाट पर पटाखे या तेज आवाज वाले उपकरण न चलाएं
- दूसरों का स्थान घेरने को लेकर विवाद न करें
स्वास्थ्य सबसे पहले
छठ का निर्जला व्रत लंबा होता है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या किसी गंभीर बीमारी वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। परंपरा में भी यह माना जाता है कि श्रद्धा के साथ अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। कई परिवारों में अस्वस्थ व्यक्ति की जगह घर का कोई दूसरा सदस्य व्रत निभाता है।
क्या पुरुष भी छठ व्रत रख सकते हैं
हां, कई पुरुष भी पूरी श्रद्धा से छठ व्रत रखते हैं और वही नियम निभाते हैं।
नियम हर परिवार में एक जैसे हैं क्या
मूल नियम लगभग एक जैसे हैं, पर कुछ बातें परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदलती हैं। अपने घर के बड़ों से सलाह लेकर ही व्रत करें।
स्रोत: द्रिक पंचांग, बिहार पर्यटन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





