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छठ व्रत के नियम: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक क्या करें, क्या न करें, शुद्धता और सात्विकता की पूरी सूची BREAKING: दिल्ली में जहरीली धुंध का कहर, कई इलाकों में AQI 400 के पार Decathlon and Heptathlon Explained: The Events, Order, Points System and India’s Stars अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि: 99.9% समय पालन से दुनिया भर में छाई नमो भारत संसद की संयुक्त बैठक क्या है: लोकसभा और राज्यसभा में गतिरोध कैसे सुलझता है, अनुच्छेद 108 और अब तक के तीन मौके UMANG App Guide: How to Use One App for EPF, Pension, Gas, Tax and Many Government Services टॉप 50 हेडलाइंस 8 नवंबर 2026 (सुबह): देश, प्रदेश और दुनिया की बड़ी खबरें एक नज़र में पेट्रोल डीजल के दाम 8 नवंबर 2026: दिल्ली में पेट्रोल ₹102.12, लखनऊ, पटना समेत बड़े शहरों के ताज़ा रेट
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छठ व्रत के नियम: नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक क्या करें, क्या न करें, शुद्धता और सात्विकता की पूरी सूची

छठ को सबसे कठिन व्रतों में गिना जाता है। चार दिन तक व्रती और पूरा परिवार शुद्धता और सात्विकता के कड़े नियम निभाता है। जानिए नहाय-खाय से उषा अर्घ्य तक क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।

छठ व्रत के नियमों का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • छठ महापर्व चार दिन का अनुष्ठान है, जिसमें व्रती सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं।
  • छठ की तैयारी घर की सफाई से शुरू होती है। नहाय-खाय से पहले पूरा घर, खासकर रसोई, धोकर साफ की जाती है।
  • ठेकुआ, कसार और दूसरे प्रसाद पूरी पवित्रता से बनाए जाते हैं। गेहूं को धोकर सुखाने और पिसवाने तक का काम सावधानी से होता है, ताकि उस पर कोई पक्षी या जूठन न पड़े।
  • हां, कई पुरुष भी पूरी श्रद्धा से छठ व्रत रखते हैं और वही नियम निभाते हैं।

छठ महापर्व चार दिन का अनुष्ठान है, जिसमें व्रती सूर्य देव और छठी मैया की उपासना करते हैं। इस बार छठ 13 से 16 नवंबर 2026 तक है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य होता है। इस व्रत की पहचान इसकी शुद्धता और अनुशासन है। व्रत रखने वाले के साथ पूरा परिवार इन नियमों का पालन करता है। जानिए छठ व्रत के नियम, जो परंपरा से चले आ रहे हैं।

घर और रसोई की शुद्धता

छठ की तैयारी घर की सफाई से शुरू होती है। नहाय-खाय से पहले पूरा घर, खासकर रसोई, धोकर साफ की जाती है। कई परिवार प्रसाद के लिए अलग चूल्हा, नए बर्तन या खास तौर पर धोए गए बर्तन रखते हैं। प्रसाद बनाने की जगह पर जूते-चप्पल नहीं ले जाए जाते।

मुख्य बातें: छठ व्रत के नियमों का ग्राफिक
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भोजन से जुड़े नियम

  • चारों दिन घर में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल नहीं होता
  • नहाय-खाय पर व्रती स्नान के बाद कद्दू-भात और चने की दाल जैसा सात्विक भोजन करते हैं
  • खरना की शाम गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद लेने के बाद निर्जला व्रत शुरू होता है
  • प्रसाद बनाते समय उसे चखा नहीं जाता
  • परिवार के दूसरे सदस्य भी इन दिनों मांस, मदिरा और तामसिक भोजन से दूर रहते हैं

व्रती के लिए नियम

परंपरा के अनुसार व्रती इन दिनों साफ, बिना सिले या नए कपड़े पहनते हैं। महिलाएं आमतौर पर साड़ी और पुरुष धोती पहनते हैं। कई व्रती पलंग की जगह जमीन पर चटाई या कंबल बिछाकर सोते हैं। मन को शांत रखना, किसी से कटु वचन न बोलना और पूजा पर ध्यान रखना भी नियमों का हिस्सा माना जाता है।

यह भी पढ़ें: छठ पूजा 2026: 13 से 16 नवंबर तक महापर्व, जानें नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य का समय | छठ व्रत में सेहत: 36 घंटे के निर्जला व्रत से पहले और बाद में क्या खाएं, किन्हें डॉक्टर से पूछना चाहिए

प्रसाद से जुड़े नियम

ठेकुआ, कसार और दूसरे प्रसाद पूरी पवित्रता से बनाए जाते हैं। गेहूं को धोकर सुखाने और पिसवाने तक का काम सावधानी से होता है, ताकि उस पर कोई पक्षी या जूठन न पड़े। प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले फल और सब्जियां साफ पानी से धोकर रखी जाती हैं।

घाट पर नियम

  • सूप और दउरा जमीन पर सीधे न रखकर साफ कपड़े या केले के पत्ते पर रखें
  • घाट पर गंदगी न फैलाएं, पूजा सामग्री को पानी में फेंकने से बचें
  • अर्घ्य के समय व्रती के आसपास भीड़ न लगाएं
  • पानी में उतरते समय गहराई का ध्यान रखें और बच्चों को अकेला न छोड़ें

क्या न करें

  • प्रसाद या पूजा सामग्री को बिना हाथ धोए न छुएं
  • व्रती के सामने तामसिक भोजन न करें
  • घाट पर पटाखे या तेज आवाज वाले उपकरण न चलाएं
  • दूसरों का स्थान घेरने को लेकर विवाद न करें

स्वास्थ्य सबसे पहले

छठ का निर्जला व्रत लंबा होता है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर या किसी गंभीर बीमारी वाले लोग व्रत से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। परंपरा में भी यह माना जाता है कि श्रद्धा के साथ अपनी क्षमता का ध्यान रखना जरूरी है। कई परिवारों में अस्वस्थ व्यक्ति की जगह घर का कोई दूसरा सदस्य व्रत निभाता है।

क्या पुरुष भी छठ व्रत रख सकते हैं

हां, कई पुरुष भी पूरी श्रद्धा से छठ व्रत रखते हैं और वही नियम निभाते हैं।

नियम हर परिवार में एक जैसे हैं क्या

मूल नियम लगभग एक जैसे हैं, पर कुछ बातें परिवार और क्षेत्र की परंपरा के अनुसार बदलती हैं। अपने घर के बड़ों से सलाह लेकर ही व्रत करें।

स्रोत: द्रिक पंचांग, बिहार पर्यटन। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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