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दिवाली 2026 पर दीये और रंगोली की परंपरा: जानें मिट्टी के दीयों का महत्व, शुभ मुहूर्त और रंगोली के खास चिन्ह

दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने और रंगोली बनाने का गहरा आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व है। जानें 2026 में दीप प्रज्वलन के नियम और लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त।

दिवाली पर जलते हुए मिट्टी के दीये और सुंदर रंगोली की सजावट
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / SreeramKalyan)

सारांश

  • दिवाली का त्योहार केवल रोशनी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है।
  • शास्त्रों में घी और तेल दोनों ही प्रकार के दीये जलाने का विधान है, लेकिन इनके उद्देश्य अलग-अलग माने जाते हैं।
  • रंगोली केवल सजावट की वस्तु नहीं है, बल्कि यह देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करने का एक कलात्मक तरीका है।
  • 6 नवंबर 2026 को धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाएगी।

दिवाली 2026: अंधकार पर प्रकाश की विजय का महापर्व

दिवाली का त्योहार केवल रोशनी का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाने का प्रतीक है। हिंदू धर्म में दीपोत्सव का विशेष महत्व है, जिसमें मिट्टी के दीये और रंगोली मुख्य भूमिका निभाते हैं। मान्यता है कि भगवान राम के अयोध्या आगमन पर पूरी नगरी को दीपों से सजाया गया था, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। साल 2026 में भी दीपोत्सव का यह पावन पर्व नई उमंग लेकर आ रहा है। इस लेख में हम जानेंगे कि दिवाली पर दीये जलाने और रंगोली बनाने के पीछे क्या धार्मिक कारण हैं और इस वर्ष पूजन के शुभ मुहूर्त क्या हैं।

मिट्टी के दीये ही क्यों? परंपरा और सामाजिक पहलू

आजकल बाजार में बिजली की लड़ियां और आधुनिक लैंप मौजूद हैं, लेकिन मिट्टी के दीयों का स्थान कोई नहीं ले सकता। धार्मिक दृष्टि से मिट्टी को पंचतत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश) का प्रतीक माना जाता है। जब हम मिट्टी के दीये में तेल और बाती डालकर उसे प्रज्वलित करते हैं, तो यह ब्रह्मांड की ऊर्जा को संतुलित करने की क्षमता रखता है।

इसके साथ ही, मिट्टी के दीये खरीदने का एक बड़ा सामाजिक पहलू भी है। हमारे गांव-कस्बों के कुम्हार महीनों पहले से इन दीयों को बनाने में जुट जाते हैं। परंपरा के अनुसार, स्थानीय कुम्हारों से दीये खरीदना न केवल लक्ष्मी जी को प्रसन्न करता है, बल्कि यह समाज के अंतिम व्यक्ति की आर्थिक सहायता करने का एक माध्यम भी है। यह हमारे त्योहारों की उस समावेशी संस्कृति को दर्शाता है, जहां हर वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित होती है।

घी और तेल के दीये: किसका क्या है महत्व?

शास्त्रों में घी और तेल दोनों ही प्रकार के दीये जलाने का विधान है, लेकिन इनके उद्देश्य अलग-अलग माने जाते हैं।

  • शुद्ध घी का दीपक: घी के दीपक को सात्विक माना जाता है। मान्यता है कि घी का दीया देवी-देवताओं को समर्पित होता है और इससे घर में सुख-समृद्धि आती है। इसे हमेशा पूजा घर या मुख्य मंदिर में जलाना चाहिए।
  • तेल का दीपक: सरसों या तिल के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए जलाया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर और बाहरी दीवारों पर तेल के दीये जलाना शुभ माना जाता है।

घर के किन स्थानों पर रखें दीये और कितनी हो संख्या?

दिवाली की रात घर का कोई भी कोना अंधेरे में नहीं रहना चाहिए। परंपरा के अनुसार, दीयों को रखने के कुछ विशेष स्थान बताए गए हैं:

  • मुख्य द्वार: घर के प्रवेश द्वार पर दोनों ओर दीये रखने चाहिए ताकि माता लक्ष्मी का स्वागत हो सके।
  • तुलसी का पौधा: आंगन में स्थित तुलसी के पास दीप जलाना अनिवार्य माना गया है, क्योंकि तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।
  • रसोई घर: रसोई में मां अन्नपूर्णा का वास होता है, इसलिए वहां भी एक दीया जरूर रखें।
  • पीपल का पेड़: यदि घर के पास कोई पीपल का पेड़ हो, तो वहां भी दीपदान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
  • जल का स्रोत: पीने के पानी के स्थान या कुएं के पास भी दीया रखना चाहिए।

दीयों की संख्या के बारे में मान्यता है कि कम से कम 11, 21 या 31 दीये जलाने चाहिए। मुख्य पूजा के लिए एक बड़ा चौमुखी दीपक जलाना श्रेष्ठ होता है जो रात भर जलता रहे।

दिवाली 2026 पर दीये और रंगोली की परंपरा: जानें मिट्टी के दीयों का महत्व, शुभ मुहूर्त और रंगोली के खास चिन्ह
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Parlby, Fanny (Parks))

रंगोली के शुभ चिन्ह: कमल, स्वास्तिक और लक्ष्मी पद चिह्न

रंगोली केवल सजावट की वस्तु नहीं है, बल्कि यह देवी लक्ष्मी को आमंत्रित करने का एक कलात्मक तरीका है। रंगोली में कुछ विशेष चिन्हों का प्रयोग करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

  • कमल का फूल: कमल माता लक्ष्मी का आसन है। रंगोली में कमल बनाना पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • स्वास्तिक: यह शुभता और मंगल का प्रतीक है। प्रवेश द्वार पर सिंदूर या रंगों से स्वास्तिक बनाना घर में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
  • लक्ष्मी पद चिह्न: घर के भीतर की ओर आते हुए माता लक्ष्मी के पैरों के निशान बनाना इस बात का संकेत है कि धन की देवी आपके घर में प्रवेश कर रही हैं।

दीपोत्सव 2026: तिथियां और शुभ मुहूर्त (नई दिल्ली)

वर्ष 2026 में दिवाली का पर्व नवंबर के महीने में मनाया जाएगा। नीचे दी गई तालिका में नई दिल्ली के समय के अनुसार मुख्य तिथियां और मुहूर्त दिए गए हैं। कृपया ध्यान दें कि अन्य शहरों के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि अवश्य करें।

पर्व का नामतारीख (2026)शुभ मुहूर्त (नई दिल्ली)
धनतेरस पूजा6 नवंबर, शुक्रवारशाम 6:02 से रात 7:57 तक
यम दीपदान6 नवंबर, शुक्रवारशाम 5:33 से शाम 6:51 तक
लक्ष्मी पूजन8 नवंबर, रविवारशाम 5:54 से रात 7:50 तक
गोवर्धन पूजा10 नवंबर, मंगलवारसुबह 6:40 से सुबह 8:50 तक
भाई दूज11 नवंबर, बुधवारदोपहर 1:10 से दोपहर 3:20 तक

विशेष नोट: द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल नरक चतुर्दशी का स्नान और दिवाली लक्ष्मी पूजा दोनों 8 नवंबर को ही पड़ रहे हैं। छोटी दिवाली (काली चौदस) का उत्सव 7 नवंबर को मनाया जाएगा।

धनतेरस और यम दीपम का महत्व

6 नवंबर 2026 को धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाएगी। इसी दिन शाम को यमराज के निमित्त दीपदान (यम दीपम) किया जाता है। परंपरा के अनुसार, घर के दक्षिण दिशा में एक पुराना मिट्टी का दीया जलाकर रखने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। धनतेरस पर सोना खरीदने का शुभ समय 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से अगले दिन सुबह तक उपलब्ध रहेगा।

लक्ष्मी पूजन और महानिशीथ काल

8 नवंबर को दिवाली की मुख्य पूजा होगी। प्रदोष काल में शाम 5:54 से 7:50 तक लक्ष्मी पूजन का सबसे श्रेष्ठ समय है। जो लोग तंत्र साधना या विशेष अनुष्ठान करते हैं, उनके लिए महानिशीथ काल रात 11:39 से 12:31 (9 नवंबर) तक रहेगा। मान्यता है कि स्थिर लग्न (वृषभ काल) में की गई पूजा से लक्ष्मी जी का घर में स्थायी वास होता है।

निष्कर्ष

दिवाली का पर्व हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है। मिट्टी के दीयों की सौंधी खुशबू और रंगोली के चटकीले रंग हमारे जीवन में खुशहाली लाते हैं। इस दिवाली, परंपराओं का पालन करते हुए और स्थानीय कारीगरों का सम्मान करते हुए दीप जलाएं। याद रखें कि आपके द्वारा जलाया गया एक छोटा सा मिट्टी का दीया किसी गरीब के घर में भी दिवाली की रोशनी फैला सकता है।

यह भी पढ़ें: घर पर रंगोली के रंग कैसे बनाएं | दीपावली की राम कथा

स्रोत: द्रिक पंचांग (नई दिल्ली के लिए गणना), प्रचलित धार्मिक ग्रंथ और लोक परंपराएं। मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलते हैं, अपने शहर के पंचांग से पुष्टि करें।

लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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