केंद्र सरकार ने देश भर के कैंसर मरीजों को बड़ी राहत देते हुए एक हजार से अधिक कैंसर रोधी दवाओं के खुदरा मूल्यों में उल्लेखनीय कमी करने का फैसला किया है। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण द्वारा लागू किए गए इस कदम के बाद संशोधित दरें 9 नवंबर से आधिकारिक तौर पर प्रभावी हो रही हैं। इस नीतिगत निर्णय के कारण स्तन कैंसर के उपचार में प्रयुक्त होने वाली 83,520 रुपये की दवा अब उपभोक्ताओं को 37,358.35 रुपये में उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार के आधिकारिक आकलन के अनुसार, दवाओं के व्यापार मार्जिन को सीमित करने के इस ऐतिहासिक निर्णय से उपभोक्ताओं को प्रति वर्ष 3,502.31 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय बचत होगी।

व्यापार मार्जिन को सीमित करने की नियामक प्रक्रिया
रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधीन कार्यरत औषधि विभाग के राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, जिसे एनपीपीए के नाम से जाना जाता है, उसने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय की विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। विशेषज्ञ समिति द्वारा की गई समीक्षा और सुझावों के बाद 17 अक्टूबर 2026 को 137 कैंसर रोधी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य पर ट्रेड मार्जिन को सीमित करने का आदेश जारी किया गया था। इस नीतिगत निर्देश का मुख्य उद्देश्य जीवन रक्षक दवाओं को आम जनता के लिए किफायती बनाना और दवाओं पर लगने वाले अनियंत्रित व्यापार मुनाफे पर अंकुश लगाना है। सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन यानी टीएमआर का नाम दिया है, जिसके अंतर्गत दवा निर्माताओं से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक के लाभ को एक निश्चित दायरे में बांधा गया है।
फार्मा कंपनियों द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट और दरों में कटौती का दायरा
निर्धारित समय सीमा के तहत 7 नवंबर 2026 तक देश भर की 76 प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनियों ने 121 दवाओं से जुड़े 1,225 कैंसर रोधी फॉर्मूलेशन के लिए अपने संशोधित अधिकतम खुदरा मूल्य की विस्तृत जानकारी एनपीपीए को सौंप दी है। प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि कुल 1,031 कैंसर रोधी फॉर्मूलेशन के खुदरा मूल्यों में सीधी गिरावट दर्ज की गई है। इनमें से 600 से अधिक दवा ब्रांड ऐसे पाए गए हैं, जिन्होंने अपने उत्पादों के दामों में 50 प्रतिशत से भी अधिक की कटौती दर्ज कराई है। इस पूरी मूल्य समीक्षा प्रक्रिया के दौरान कुछ दवाओं में अधिकतम कटौती 96.45 प्रतिशत तक दर्ज की गई है, जो कैंसर पीड़ितों के चिकित्सा खर्च को बहुत बड़े स्तर पर कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
भविष्य में आने वाली दवाएं और मूल्य नियंत्रण नियम
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय और एनपीपीए द्वारा चिह्नित की गई कुल 137 कैंसर रोधी दवाओं की सूची में 10 से 15 ऐसी औषधियां भी शामिल हैं, जो वर्तमान समय में भारतीय बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं और जिन्हें अब तक लॉन्च नहीं किया गया है। नियामक संस्था ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन की यह व्यवस्था इन दवाओं पर भी उनके बाजार में प्रवेश करते ही पूरी तरह लागू हो जाएगी। इसके साथ ही महानिदेशालय ने विनिर्माताओं के लिए वार्षिक मूल्य संशोधन के नियम भी स्पष्ट किए हैं। दवा निर्माता कंपनियां ड्रग्स प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के पैराग्राफ 20(1) के प्रावधानों के अंतर्गत सालाना आधार पर दवाओं के मूल्यों में आवश्यक संशोधन कर सकती हैं, परंतु उन्हें हर हाल में अधिकतम 30 प्रतिशत ट्रेड मार्जिन के अनिवार्य नियम की सीमा में ही रहना होगा।
अस्पतालों के लिए अनिवार्य नियम और निगरानी व्यवस्था
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने कैंसर की दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े प्रत्येक हितधारक के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। देश के प्रत्येक खुदरा विक्रेता, वितरक, डीलर, अस्पताल और चिकित्सा संस्थान के लिए यह कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है कि वे सभी कैंसर रोधी दवाओं की संशोधित दरों की सूची अपने परिसर में प्रमुखता से प्रदर्शित करें और साथ ही अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर भी इसे अपलोड करें। मरीजों और उनके परिजनों को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त वित्तीय बोझ या अनुचित वसूली से बचाने के लिए एनपीपीए ने डिजिटल निगरानी प्रणाली को सक्रिय किया है।
आम उपभोक्ता अब केंद्र सरकार के फार्मा सही दाम मोबाइल एप्लिकेशन और राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट www.nppa.gov.in के माध्यम से किसी भी कैंसर रोधी दवा की स्वीकृत दर की तत्काल जांच कर सकते हैं। यदि किसी भी संस्थान या विक्रेता द्वारा तय सीमा से अधिक मूल्य वसूला जाता है अथवा संशोधित नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उपभोक्ता सीधे संबंधित नियामक अधिकारियों के पास अपनी आधिकारिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं, ताकि दोषी इकाइयों के विरुद्ध नियमों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सके।
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स्रोत: Prabhat Khabar





