हिंदू पंचांग में कुछ समय ऐसे माने जाते हैं जब विवाह जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। खरमास ऐसा ही एक समय है। हर साल दिसंबर के मध्य से जनवरी के मध्य तक, जब सूर्य धनु राशि में रहता है, खरमास माना जाता है। शादी-ब्याह की तैयारी कर रहे परिवार इसी वजह से दिसंबर में तारीखें तय करते समय खरमास का ध्यान रखते हैं। आइए जानते हैं 2026 में खरमास कब से कब तक है और इससे जुड़ी मान्यताएं क्या हैं।
खरमास 2026 कब से कब तक
पंचांग गणनाओं के अनुसार खरमास 16 दिसंबर 2026 को सुबह 10 बजकर 31 मिनट पर धनु संक्रांति के साथ शुरू होगा, जब सूर्य वृश्चिक राशि से धनु राशि में प्रवेश करेगा। यह 14 जनवरी 2027 को रात 9 बजकर 16 मिनट तक रहेगा, जब सूर्य मकर राशि में जाएगा। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश रात में होने के कारण द्रिक पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्य काल 15 जनवरी 2027, शुक्रवार को रहेगा। इसीलिए कुछ जगह खरमास की समाप्ति 14 जनवरी और कुछ जगह 15 जनवरी लिखी जाती है।

खरमास क्या है
हर महीने सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। जब सूर्य धनु या मीन राशि में होता है, उस समय को खरमास या मलमास कहा जाता है। यानी साल में दो बार खरमास आता है: एक दिसंबर-जनवरी में धनु राशि के समय और दूसरा मार्च-अप्रैल में मीन राशि के समय। 2027 में दूसरा खरमास 15 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा।
विवाह क्यों नहीं होते
मान्यता है कि धनु और मीन राशि बृहस्पति की राशियां हैं और जब सूर्य इनमें होता है, तो विवाह जैसे मांगलिक कार्यों के लिए समय शुभ नहीं माना जाता। मुहूर्त ग्रंथों की परंपरा के अनुसार इस दौरान विवाह मुहूर्त नहीं निकाले जाते। पंचांग गणनाओं के अनुसार दिसंबर 2026 में विवाह की आखिरी तारीख 12 दिसंबर है और इसके बाद अगली तारीखें 15 जनवरी 2027 से शुरू होंगी। सटीक मुहूर्त के लिए अपने पुरोहित या स्थानीय पंचांग से सलाह लें।
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खरमास में क्या न करें
परंपरा के अनुसार खरमास में आमतौर पर ये काम टाले जाते हैं:
- विवाह और सगाई।
- गृह प्रवेश।
- मुंडन और जनेऊ जैसे संस्कार।
- नए मकान या बड़े काम की शुरुआत।
हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में इन नियमों को मानने का तरीका अलग हो सकता है।
खरमास में क्या करें
खरमास को पूजा, जप, तप और दान के लिए अच्छा समय माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार इस दौरान:
- सूर्य देव को रोज सुबह जल अर्पित करने की परंपरा है।
- भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया जाता है।
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ और कथा श्रवण किया जाता है।
- जरूरतमंदों को अन्न, गर्म कपड़े और कंबल दान करने को पुण्यकारी माना जाता है।
- तीर्थ स्नान और सत्संग का भी महत्व बताया गया है।
खरमास से जुड़ी कथा
खरमास नाम को लेकर एक लोक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ पर लगातार ब्रह्मांड की परिक्रमा करते हैं। एक बार घोड़े प्यास और थकान से व्याकुल हो गए। सूर्य देव ने उन्हें एक तालाब के किनारे पानी पीने और आराम करने के लिए रोका, लेकिन रथ रुक नहीं सकता था। तब उन्होंने पास खड़े दो खर यानी गधों को रथ में जोत लिया। गधों की धीमी चाल से सूर्य की गति धीमी हो गई। मान्यता है कि इसी कारण इस समय को खरमास कहा गया। एक महीने बाद सूर्य फिर अपने घोड़ों के साथ आगे बढ़े।
खरमास में शादी की तारीख कैसे तय करें
जिन परिवारों में दिसंबर-जनवरी में शादी की योजना है, वे पहले से पंचांग देखकर तारीख तय करते हैं। खरमास से पहले की आखिरी तारीखों और मकर संक्रांति के बाद की शुरुआती तारीखों पर अक्सर ज्यादा शादियां होती हैं, इसलिए उन दिनों विवाह स्थल, कैटरिंग और यात्रा की बुकिंग पहले से कर लेना बेहतर रहता है।
धनु संक्रांति और दक्षिण भारत
धनु संक्रांति से शुरू होने वाला यह महीना दक्षिण भारत में मार्गझी मास के रूप में जाना जाता है, जिसे वहां बहुत पवित्र माना जाता है। तमिलनाडु में इस महीने में सुबह-सुबह मंदिरों में विशेष पूजा और भजन होते हैं। यानी एक ही समय को अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नजरिये से देखा जाता है।
मकर संक्रांति से नई शुरुआत
खरमास की समाप्ति मकर संक्रांति पर होती है, जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे शुभ कार्यों की नई शुरुआत का समय माना जाता है। मकर संक्रांति पर स्नान, दान, तिल-गुड़ और खिचड़ी की परंपरा है। इसके बाद फिर से विवाह और दूसरे मांगलिक कार्यों के मुहूर्त शुरू होते हैं।
खरमास 2026 कब शुरू होगा
16 दिसंबर 2026 को धनु संक्रांति के साथ।
खरमास कब खत्म होगा
14 जनवरी 2027 की रात सूर्य के मकर राशि में जाने पर, मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनेगी।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Sanatan Bodh: Kharmas 2026-27, Drik Panchang: Makar Sankranti 2027





