नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर और डायरेक्टर वेणुगोपाल नंदलाल धूत को आधिकारिक तौर पर दिवालिया घोषित कर दिया है। यह फैसला भारतीय स्टेट बैंक द्वारा बकाया ऋण की वसूली के लिए दायर की गई एक याचिका के आधार पर लिया गया है। धूत पर विभिन्न बैंकों का कुल बारह हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बकाया है जिसे चुकाने में वे विफल रहे हैं।

एनसीएलटी मुंबई बेंच का ऐतिहासिक फैसला
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल यानी एनसीएलटी की मुंबई बेंच ने वीडियोकॉन समूह के पूर्व प्रमोटर वेणुगोपाल नंदलाल धूत के खिलाफ दिवालियापन की कार्यवाही को मंजूरी दे दी है। न्यायाधिकरण ने भारतीय स्टेट बैंक द्वारा इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड के सेक्शन 121 के तहत दायर की गई बैंकरप्सी एप्लीकेशन को स्वीकार कर लिया है। यह आदेश तब आया है जब धूत की व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया पूरी तरह से विफल हो गई। न्यायाधिकरण ने पाया कि धूत अपने ऊपर बकाया भारी कर्ज को चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। इस कानूनी प्रक्रिया के तहत अब धूत की व्यक्तिगत संपत्तियों का प्रबंधन और वितरण लेनदारों के बीच किया जाएगा ताकि बकाया राशि की कुछ हद तक वसूली की जा सके। एनसीएलटी का यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र और कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है क्योंकि यह एक बड़े औद्योगिक समूह के पूर्व प्रमुख से जुड़ा मामला है।
बकाया ऋण का विस्तृत विवरण और वित्तीय आंकड़े
वेणुगोपाल धूत पर बकाया ऋण की राशि अत्यंत विशाल है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा दी गई जानकारी और फाइलिंग के अनुसार, 30 सितंबर, 2026 तक धूत पर कुल बकाया रकम 12,668.06 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इस कुल कर्ज राशि में विभिन्न प्रकार की ऋण सुविधाएं शामिल हैं जिन्हें वीडियोकॉन समूह की कंपनियों के लिए लिया गया था। आंकड़ों के मुताबिक, रुपया टर्म लोन सुविधा के तहत 9,322.10 करोड़ रुपये का बकाया है। इसके अलावा, वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड यानी वीटीएल सुविधा के तहत 1,437.76 करोड़ रुपये की देनदारी है। साथ ही, वर्किंग कैपिटल सुविधा के तहत भी 1,908.19 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है। यह पूरा कर्ज भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों से लिया गया था, जिसके लिए धूत ने व्यक्तिगत गारंटी प्रदान की थी। इन गारंटियों के कारण ही अब उनकी व्यक्तिगत संपत्ति पर दिवालियापन की कार्यवाही की जा रही है।
समाधान प्रस्ताव की विफलता और लेनदारों का रुख
दिवालिया घोषित किए जाने से पहले वेणुगोपाल धूत ने अपने लेनदारों के सामने एक समाधान प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव के तहत धूत ने 36 महीने की अवधि में कुल 600 करोड़ रुपये का भुगतान करके अपनी सभी बकाया देनदारियों को निपटाने की पेशकश की थी। हालांकि, बैंकों और अन्य लेनदारों ने इस प्रस्ताव को अपर्याप्त मानते हुए खारिज कर दिया। लेनदारों का मानना था कि 12,668.06 करोड़ रुपये के कुल बकाया के मुकाबले 600 करोड़ रुपये की राशि बहुत कम है। इस प्रस्ताव के खारिज होने के बाद ही व्यक्तिगत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया विफल हो गई और मामला बैंकरप्सी की ओर बढ़ गया। न्यायाधिकरण ने भी माना कि चूंकि समाधान की कोई गुंजाइश नहीं बची है, इसलिए धूत को दिवालिया घोषित करना ही कानूनन सही कदम है।
बैंकरप्सी ट्रस्टी की नियुक्ति और भविष्य की कार्रवाई
एनसीएलटी ने वेणुगोपाल धूत की व्यक्तिगत संपत्तियों के प्रबंधन के लिए आशीष नारायण को बैंकरप्सी ट्रस्टी के रूप में नियुक्त किया है। अब धूत की सभी संपत्तियां कानूनी रूप से इस ट्रस्टी के नियंत्रण में आ गई हैं। न्यायाधिकरण ने ट्रस्टी को निर्देश दिया है कि वे लेनदारों से उनके दावों को आमंत्रित करने के लिए एक सार्वजनिक सूचना जारी करें। इसके अलावा, ट्रस्टी को 90 दिनों के भीतर न्यायाधिकरण को एक प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपनी होगी जिसमें संपत्तियों और दावों का पूरा विवरण होगा। न्यायाधिकरण ने वेणुगोपाल धूत को भी सख्त निर्देश दिए हैं कि वे सात दिनों के भीतर बैंकरप्सी ट्रस्टी को अपनी वित्तीय स्थिति का पूरा और विस्तृत विवरण प्रदान करें। इस विवरण में उनकी सभी चल और अचल संपत्तियों के साथ-साथ उनके निवेशों की जानकारी भी शामिल होनी चाहिए ताकि वसूली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
वीडियोकॉन समूह के संकट का पृष्ठभूमि और इतिहास
वीडियोकॉन समूह के वित्तीय संकट की शुरुआत काफी समय पहले हुई थी। जून 2018 में वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के खिलाफ कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन की कार्रवाई पहली बार शुरू की गई थी। समूह की कंपनियों द्वारा लिए गए ऋणों के भुगतान में चूक के बाद बैंकों ने कानूनी रास्ता अपनाया था। वेणुगोपाल धूत ने वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड और वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस लिमिटेड को मिली क्रेडिट सुविधाओं के लिए अपनी व्यक्तिगत गारंटी दी थी। जब कंपनियां कर्ज चुकाने में असमर्थ रहीं, तो भारतीय स्टेट बैंक ने धूत के खिलाफ इन व्यक्तिगत गारंटियों को लागू करने का निर्णय लिया। इसके बाद ही एसबीआई ने बकाया रकम की वसूली के लिए एनसीएलटी का रुख किया। यह मामला दिखाता है कि कैसे कॉर्पोरेट ऋणों के लिए दी गई व्यक्तिगत गारंटी प्रमोटरों के लिए बड़ी कानूनी मुसीबत बन सकती है। अब पूरी प्रक्रिया बैंकरप्सी ट्रस्टी के माध्यम से संचालित की जाएगी।
स्रोत: Aaj Tak





