हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। साल में आमतौर पर 24 एकादशी आती हैं और हर एक का अपना नाम और महत्व है। इनमें मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इसी दिन एकादशी देवी प्रकट हुई थीं, इसलिए इसे एकादशी व्रत की शुरुआत से जोड़ा जाता है। आइए जानते हैं उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है और इससे जुड़ी कथा और परंपराएं क्या हैं।
उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए उत्पन्ना एकादशी 2026 शुक्रवार, 4 दिसंबर को है। एकादशी तिथि 3 दिसंबर 2026 को रात 11 बजकर 3 मिनट पर शुरू होगी और 4 दिसंबर को रात 11 बजकर 44 मिनट पर समाप्त होगी। व्रत का पारण 5 दिसंबर को सुबह किया जाएगा। द्रिक पंचांग के इस्कॉन कैलेंडर में पारण का समय 5 दिसंबर को सुबह 6:59 से 10:28 बजे तक बताया गया है। अलग-अलग परंपराओं और शहरों के हिसाब से पारण के समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग जरूर देखें।

उत्पन्ना एकादशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार सतयुग में मुर नाम का एक शक्तिशाली दैत्य था, जिसने देवताओं को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। देवता भगवान विष्णु की शरण में गए। भगवान विष्णु ने मुर से लंबे समय तक युद्ध किया। युद्ध के बीच थककर वे बद्रिकाश्रम की एक गुफा में विश्राम करने चले गए। मुर उनका पीछा करते हुए वहां पहुंचा और सोते हुए भगवान पर हमला करना चाहा। तभी भगवान विष्णु के शरीर से एक तेजस्वी देवी प्रकट हुईं और उन्होंने मुर का वध कर दिया। जागने पर भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर देवी को वरदान दिया। चूंकि वे एकादशी तिथि को प्रकट हुई थीं, इसलिए उनका नाम एकादशी पड़ा। मान्यता है कि भगवान ने वरदान दिया कि जो इस तिथि पर व्रत रखेगा, उसे पुण्य फल मिलेगा।
एकादशी व्रत की शुरुआत
इसी कथा के कारण उत्पन्ना एकादशी को एकादशी व्रत की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। कई लोग जो साल भर एकादशी व्रत रखना शुरू करना चाहते हैं, वे इसी एकादशी से शुरुआत करते हैं। हालांकि अलग-अलग परंपराओं में व्रत शुरू करने के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए परिवार की परंपरा या पुरोहित की सलाह लें।
यह भी पढ़ें: रमा एकादशी 2026: 5 नवंबर को व्रत, 6 नवंबर को पारण का समय, पूजा विधि और व्रत कथा | देवउठनी एकादशी 2026: 20 नवंबर को व्रत, 21 नवंबर को तुलसी विवाह, जानें पारण का समय और पूजा विधि
व्रत की परंपराएं
मान्यताओं के अनुसार उत्पन्ना एकादशी पर ये परंपराएं निभाई जाती हैं:
- दशमी की रात से ही सात्विक भोजन करने और संयम रखने की परंपरा है।
- एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।
- पूजा में तुलसी दल, पीले फूल, धूप-दीप और फल अर्पित किए जाते हैं।
- विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया जाता है।
- एकादशी पर चावल न खाने की परंपरा है।
- कई लोग निर्जल, कई फलाहार और कई एक समय भोजन वाला व्रत रखते हैं।
- अगले दिन द्वादशी पर तय समय में पारण किया जाता है।
पारण का महत्व
एकादशी व्रत में पारण यानी व्रत खोलने का समय बहुत अहम माना जाता है। परंपरा के अनुसार पारण द्वादशी तिथि के भीतर और सूर्योदय के बाद किया जाता है। हरि वासर यानी द्वादशी की शुरुआती अवधि में पारण न करने की मान्यता भी है। इसलिए पंचांग में दिए पारण समय का ध्यान रखें।
व्रत में सेहत का ध्यान
व्रत आस्था का विषय है, लेकिन सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है। गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे और डायबिटीज या दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोग कठिन व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लें। ऐसे लोग फलाहार या सरल व्रत का विकल्प चुन सकते हैं।
मार्गशीर्ष मास की एकादशियां
मार्गशीर्ष मास में दो एकादशी आती हैं। कृष्ण पक्ष में उत्पन्ना एकादशी और शुक्ल पक्ष में मोक्षदा एकादशी, जिस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। 2026 में मोक्षदा एकादशी और गीता जयंती 20 दिसंबर को है। मार्गशीर्ष को धार्मिक दृष्टि से बहुत पवित्र महीना माना जाता है।
एकादशी पर चावल क्यों नहीं
एकादशी पर चावल न खाने की परंपरा काफी प्रचलित है। इसके पीछे अलग-अलग लोक मान्यताएं बताई जाती हैं। कई परिवारों में एकादशी के दिन अनाज की जगह साबूदाना, कुट्टू, सिंघाड़ा, आलू, फल और दूध से बने व्यंजन खाए जाते हैं। कुछ लोग इस दिन केवल फल और जल पर रहते हैं। यह पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और सेहत पर निर्भर करता है।
दान और सेवा
एकादशी पर दान का भी महत्व बताया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल दान करना पुण्यकारी है। सर्दियों के मौसम को देखते हुए कई लोग कंबल या गर्म कपड़ों का दान भी करते हैं।
उत्पन्ना एकादशी 2026 कब है
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026 को।
उत्पन्ना एकादशी का पारण कब होगा
5 दिसंबर 2026 को सुबह, स्थानीय पंचांग के अनुसार।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Drik Panchang: Utpanna Ekadashi 2026 (ISKCON), Drik Panchang: 4 December 2026 Panchang





