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मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं: 21 दिन में पंजीकरण, CRS पोर्टल, जरूरी दस्तावेज, देर होने पर नियम और डाउनलोड का तरीका BREAKING: रिलायंस जियो और स्टारलिंक भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने की तैयारी में How the Constitution Is Amended: Article 368, Special Majority, State Ratification and Basic Structure Mahindra plans to launch 4 SUVs in India by June 2027 including one new EV ULIP क्या है: बीमा और निवेश साथ, 5 साल का लॉक-इन और 2.5 लाख से ज्यादा प्रीमियम पर टैक्स के नियम BREAKING: Mohammed Shami Announces Retirement From Test Cricket On His Debut Anniversary BREAKING: मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से लिया संन्यास, पदार्पण की तारीख को ही कहा अलविदा नहाय खाय: छठ के पहले दिन कद्दू-भात और चने की दाल क्यों बनती है, शुद्धता के नियम और तैयारी
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मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं: 21 दिन में पंजीकरण, CRS पोर्टल, जरूरी दस्तावेज, देर होने पर नियम और डाउनलोड का तरीका

परिवार में किसी की मृत्यु के बाद बीमा, पेंशन, बैंक खाते और संपत्ति से जुड़े कामों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज होता है।

सरकारी दफ्तर में दस्तावेज जमा करते व्यक्ति का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • परिवार में किसी अपने की मृत्यु के बाद दुख के माहौल में कागजी काम सबसे आखिर में याद आते हैं।
  • देश में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत होता है।
  • संशोधित कानून के अनुसार अगर मृत्यु किसी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान में होती है, तो संस्थान को मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र मुफ्त में रजिस्ट्रार को देना होता है और इसकी एक कॉपी नजदीकी…
  • प्रमाण पत्र मिलते ही उसमें नाम, उम्र, तारीख और पता ध्यान से जांच लें।

परिवार में किसी अपने की मृत्यु के बाद दुख के माहौल में कागजी काम सबसे आखिर में याद आते हैं। लेकिन बीमा का दावा, पेंशन, बैंक खाते की रकम, जमीन या मकान का नामांतरण, इन सभी कामों में सबसे पहले मृत्यु प्रमाण पत्र मांगा जाता है। भारत में हर मृत्यु का पंजीकरण कानूनन जरूरी है। समय पर पंजीकरण हो जाए तो प्रमाण पत्र आसानी से और मुफ्त मिल जाता है। इस लेख में जानिए मृत्यु प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं और देर होने पर क्या करना पड़ता है।

कौन सा कानून लागू होता है

देश में जन्म और मृत्यु का पंजीकरण जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत होता है। साल 2023 में इस कानून में संशोधन किया गया, जिसके बाद पंजीकरण का डिजिटल रिकॉर्ड राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर रखने की व्यवस्था बनी। पंजीकरण का काम स्थानीय रजिस्ट्रार करते हैं। शहरों में आमतौर पर नगर निगम या नगर पालिका और गांवों में ग्राम पंचायत सचिव या तय अधिकारी रजिस्ट्रार होते हैं।

मुख्य बातें: सरकारी दफ्तर में दस्तावेज जमा करते व्यक्ति का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

21 दिन का नियम

मृत्यु की सूचना 21 दिन के भीतर रजिस्ट्रार को देनी होती है। इस अवधि में पंजीकरण कराने पर कोई शुल्क नहीं लगता। अगर मृत्यु अस्पताल में हुई है, तो सूचना देने की जिम्मेदारी अस्पताल की होती है। घर पर मृत्यु होने पर परिवार के मुखिया या नजदीकी रिश्तेदार को सूचना देनी होती है।

मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र

संशोधित कानून के अनुसार अगर मृत्यु किसी अस्पताल या चिकित्सा संस्थान में होती है, तो संस्थान को मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र मुफ्त में रजिस्ट्रार को देना होता है और इसकी एक कॉपी नजदीकी रिश्तेदार को भी देनी होती है। अगर मृत्यु घर पर हुई और व्यक्ति का हाल में किसी डॉक्टर से इलाज चल रहा था, तो वह डॉक्टर मुफ्त में मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र देगा, जिसे परिवार रजिस्ट्रार को जमा करेगा।

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ऑनलाइन आवेदन कैसे करें

  • CRS पोर्टल crsorgi.gov.in पर जाएं। कई राज्यों के नगर निगमों के अपने पोर्टल भी हैं।
  • सामान्य जनता के विकल्प में मोबाइल नंबर और ईमेल से पंजीकरण करें।
  • लॉगिन के बाद मृत्यु पंजीकरण का फॉर्म चुनें।
  • मृतक का नाम, उम्र, लिंग, मृत्यु की तारीख, स्थान और पता भरें।
  • सूचना देने वाले व्यक्ति की जानकारी और मृतक से संबंध भरें।
  • जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और आवेदन जमा करें।
  • आवेदन संख्या संभाल कर रखें। सत्यापन के बाद प्रमाण पत्र जारी होता है।

जरूरी दस्तावेज

  • अस्पताल से मिली मृत्यु की सूचना या मृत्यु के कारण का प्रमाण पत्र
  • मृतक का आधार या कोई पहचान पत्र
  • सूचना देने वाले व्यक्ति का पहचान पत्र
  • पते का प्रमाण
  • घर पर मृत्यु होने पर स्थानीय जनप्रतिनिधि या पड़ोसियों का लिखित बयान, जहां राज्य के नियम में मांगा जाए

कितने दिन में मिलता है प्रमाण पत्र

संशोधित कानून में प्रावधान है कि पंजीकरण पूरा होते ही, और अधिकतम 7 दिन के भीतर, रजिस्ट्रार सूचना देने वाले व्यक्ति को प्रमाण पत्र मुफ्त में देगा। यह प्रमाण पत्र इलेक्ट्रॉनिक रूप में भी दिया जा सकता है। CRS पोर्टल पर लॉगिन करके या आवेदन संख्या से प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकता है।

देर हो जाए तो क्या करें

  • 21 दिन के बाद लेकिन 30 दिन के भीतर सूचना देने पर तय विलंब शुल्क देकर पंजीकरण होता है।
  • 30 दिन के बाद लेकिन एक साल के भीतर सूचना देने पर जिला रजिस्ट्रार या तय अधिकारी की लिखित अनुमति, शुल्क और स्वयं सत्यापित दस्तावेज जरूरी होते हैं।
  • एक साल के बाद पंजीकरण के लिए मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होता है। 1 अक्टूबर 2026 से लागू संशोधन के अनुसार एक से दो साल की देरी में जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट और दो साल से ज्यादा देरी में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश लगता है।

प्रमाण पत्र की जरूरत कहां पड़ती है

  • जीवन बीमा का दावा
  • पेंशन और फैमिली पेंशन शुरू कराना
  • बैंक खाते और FD की रकम नॉमिनी या वारिस को दिलाना
  • जमीन, मकान और वाहन का नामांतरण
  • उत्तराधिकार प्रमाण पत्र और सरकारी योजनाओं में आवेदन

कुछ जरूरी सावधानियां

प्रमाण पत्र मिलते ही उसमें नाम, उम्र, तारीख और पता ध्यान से जांच लें। गलती होने पर तुरंत रजिस्ट्रार के पास सुधार का आवेदन दें। प्रमाण पत्र की कई सत्यापित प्रतियां रखें, क्योंकि अलग अलग दफ्तरों में मूल या सत्यापित कॉपी मांगी जाती है। किसी एजेंट को पैसे देने के बजाय सीधे रजिस्ट्रार दफ्तर या आधिकारिक पोर्टल से ही आवेदन करें।

मृत्यु का पंजीकरण कितने दिन में कराना होता है

मृत्यु के 21 दिन के भीतर।

क्या समय पर पंजीकरण का शुल्क लगता है

नहीं, 21 दिन के भीतर पंजीकरण और प्रमाण पत्र मुफ्त है।

अस्पताल में मृत्यु होने पर सूचना कौन देता है

अस्पताल या चिकित्सा संस्थान।

एक साल बाद पंजीकरण कैसे होगा

मजिस्ट्रेट के आदेश से।

स्रोत: CRS पोर्टल, भारत के महापंजीयक, जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2023, भारत का राजपत्र: जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम 2026 (2026 का 12) और अधिसूचना S.O. 5081(E), 16 सितंबर 2026, जनगणना भारत

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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