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सांसद आदर्श ग्राम योजना: सांसद कैसे गोद लेते हैं गांव, बिना अलग बजट के कैसे होता है विकास, पूरी जानकारी

सांसद आदर्श ग्राम योजना में हर सांसद एक ग्राम पंचायत को गोद लेकर उसे आदर्श गांव बनाने की दिशा में काम करते हैं। जानिए यह योजना कैसे चलती है।

साफ-सुथरी गली, स्कूल और पंचायत भवन वाले गांव का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गांवों के विकास के लिए सरकार की कई योजनाएं चलती हैं, लेकिन सांसद आदर्श ग्राम योजना का तरीका थोड़ा अलग है।
  • योजना का मकसद है कि सांसद की अगुवाई में चुनी गई ग्राम पंचायतें विकास का मॉडल बनें, जिन्हें देखकर आसपास की पंचायतें भी सीख लें।
  • चुनी गई पंचायत में लोगों की भागीदारी से ग्राम विकास योजना बनाई जाती है।
  • योजना में आदर्श ग्राम को ऐसे गांव के रूप में देखा गया है, जहां हर बच्चा स्कूल जाए, हर परिवार को स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, गांव साफ-सुथरा हो, लोगों के पास आजीविका के साधन हों और पंचायत…

गांवों के विकास के लिए सरकार की कई योजनाएं चलती हैं, लेकिन सांसद आदर्श ग्राम योजना का तरीका थोड़ा अलग है। इसमें सांसद खुद एक ग्राम पंचायत को चुनकर उसके विकास की जिम्मेदारी लेते हैं। इस योजना में अलग से पैसा नहीं मिलता, बल्कि पहले से चल रही योजनाओं को एक साथ जोड़कर गांव का विकास किया जाता है। आइए समझते हैं कि सांसद आदर्श ग्राम योजना क्या है और यह कैसे काम करती है।

योजना की शुरुआत

प्रधानमंत्री कार्यालय की जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2014 को सांसद आदर्श ग्राम योजना यानी SAGY की शुरुआत की। यह दिन लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जयंती थी। योजना का संचालन ग्रामीण विकास मंत्रालय करता है।

मुख्य बातें: साफ-सुथरी गली, स्कूल और पंचायत भवन वाले गांव का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

योजना का उद्देश्य

योजना का मकसद है कि सांसद की अगुवाई में चुनी गई ग्राम पंचायतें विकास का मॉडल बनें, जिन्हें देखकर आसपास की पंचायतें भी सीख लें। इसमें सिर्फ सड़क या भवन बनाने पर नहीं, बल्कि गांव के समग्र विकास पर जोर है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आजीविका, सामाजिक सद्भाव, महिलाओं की भागीदारी और सुशासन जैसे पहलू शामिल हैं।

सांसद गांव कैसे चुनते हैं

योजना के तहत हर सांसद एक ग्राम पंचायत की पहचान करके उसे आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करते हैं। लोकसभा सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र से ग्राम पंचायत चुनते हैं। राज्यसभा सांसद उस राज्य के किसी ग्रामीण जिले से पंचायत चुन सकते हैं जहां से वे चुने गए हैं। मनोनीत सांसद देश के किसी भी ग्रामीण जिले से पंचायत चुन सकते हैं। आमतौर पर सांसद अपने या अपने जीवनसाथी के गांव को नहीं चुन सकते। पंचायत चयन और चरणों से जुड़े विस्तृत नियम योजना के दिशानिर्देशों में दिए गए हैं।

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पैसा कहां से आता है

योजना की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए अलग से या अतिरिक्त बजट नहीं दिया जाता। SAGY की आधिकारिक जानकारी के अनुसार विकास के लिए पहले से चल रही केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, MPLADS, ग्राम पंचायत की अपनी आय, केंद्र और राज्य वित्त आयोग के अनुदान और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व यानी CSR जैसे संसाधनों का तालमेल किया जाता है। यानी सांसद की भूमिका एक तरह से मार्गदर्शक और प्रेरक की है, जो अलग-अलग योजनाओं को एक जगह लाकर गांव में लागू कराने में मदद करते हैं।

ग्राम विकास योजना

चुनी गई पंचायत में लोगों की भागीदारी से ग्राम विकास योजना बनाई जाती है। इसमें गांव की जरूरतों की पहचान की जाती है, जैसे स्कूल में शिक्षकों और सुविधाओं की स्थिति, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, शौचालय, सड़क, रोजगार और कौशल विकास। इसके बाद तय किया जाता है कि कौन सा काम किस योजना से और किस समय सीमा में होगा। ग्राम सभा की भूमिका इसमें अहम होती है।

किस तरह के काम होते हैं

  • स्कूलों में सुविधाएं और बच्चों का नामांकन बढ़ाना।
  • टीकाकरण, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करना।
  • स्वच्छता, शौचालय और कचरा प्रबंधन।
  • सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं।
  • स्वयं सहायता समूह, कौशल प्रशिक्षण और आजीविका के साधन।
  • पेंशन, बीमा और दूसरी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना।

निगरानी और पोर्टल

ग्रामीण विकास मंत्रालय का SAGY पोर्टल योजना से जुड़ी जानकारी देता है। इस पर सांसदों द्वारा चुनी गई ग्राम पंचायतों और उनकी ग्राम विकास योजनाओं से जुड़ी जानकारी देखी जा सकती है। जिला स्तर पर जिलाधिकारी योजना के समन्वय की जिम्मेदारी संभालते हैं।

आम लोग कैसे जुड़ें

अगर आपका गांव सांसद आदर्श ग्राम योजना में चुना गया है, तो ग्राम सभा की बैठकों में हिस्सा लें और गांव की जरूरतें सामने रखें। ग्राम विकास योजना में किन कामों को शामिल किया गया है, इसकी जानकारी पंचायत से लें। किसी योजना का लाभ नहीं मिल रहा हो, तो पंचायत सचिव या ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें।

आदर्श ग्राम की पहचान

योजना में आदर्श ग्राम को ऐसे गांव के रूप में देखा गया है, जहां हर बच्चा स्कूल जाए, हर परिवार को स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, गांव साफ-सुथरा हो, लोगों के पास आजीविका के साधन हों और पंचायत पारदर्शी तरीके से काम करे। इसके साथ ही गांव में आपसी सद्भाव, बुजुर्गों का सम्मान और महिलाओं की निर्णयों में भागीदारी जैसे मूल्यों पर भी जोर दिया गया है।

योजना को लेकर चर्चा

योजना को लेकर यह चर्चा भी होती रही है कि अलग बजट न होने से कई जगह काम की रफ्तार सांसद की सक्रियता और विभागों के तालमेल पर निर्भर करती है। कई गांवों में अच्छे नतीजे सामने आए, तो कुछ जगह प्रगति धीमी रही। संसद में भी समय-समय पर योजना की प्रगति पर सवाल पूछे जाते हैं।

सांसद आदर्श ग्राम योजना कब शुरू हुई

11 अक्टूबर 2014 को।

क्या इस योजना में अलग से पैसा मिलता है

नहीं। मौजूदा योजनाओं, MPLADS, पंचायत की आय और CSR जैसे संसाधनों के तालमेल से काम होता है।

स्रोत: PM India: PM launches Saansad Adarsh Gram Yojana, SAGY (Ministry of Rural Development): About, SAGY: FAQ

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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