हिंदू परंपरा में भगवान राम और माता सीता का विवाह आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना जाता है। इसी विवाह की वर्षगांठ हर साल मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को विवाह पंचमी के रूप में मनाई जाती है। अयोध्या, नेपाल के जनकपुर और मिथिला क्षेत्र में यह पर्व बड़े उत्साह से मनाया जाता है। आइए जानते हैं कि 2026 में विवाह पंचमी कब है और इससे जुड़ी कथा और परंपराएं क्या हैं।
विवाह पंचमी 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए विवाह पंचमी 2026 सोमवार, 14 दिसंबर को है। पंचमी तिथि 13 दिसंबर 2026 को शाम 4 बजकर 47 मिनट पर शुरू होगी और 14 दिसंबर को शाम 7 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर पर्व 14 दिसंबर को मनाया जाएगा। अलग-अलग शहरों में तिथि के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग भी देख लें।

विवाह पंचमी की कथा
मान्यता है कि मिथिला के राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता के विवाह के लिए स्वयंवर रखा था। शर्त थी कि जो भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। कई राजा धनुष को हिला तक नहीं सके। गुरु विश्वामित्र के साथ आए श्रीराम ने धनुष उठाया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह टूट गया। इसके बाद राम और सीता का विवाह हुआ। मान्यता है कि उसी समय राम के भाइयों लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न का विवाह भी जनक परिवार की कन्याओं उर्मिला, मांडवी और श्रुतकीर्ति से हुआ। रामचरितमानस के बालकांड में सीता स्वयंवर और विवाह का विस्तार से वर्णन है।
जनकपुर और अयोध्या में उत्सव
नेपाल का जनकपुर माता सीता की जन्मभूमि माना जाता है। विवाह पंचमी पर यहां जानकी मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं और राम-सीता विवाह की झांकियां निकाली जाती हैं। अयोध्या में भी इस दिन राम बारात और विवाह उत्सव की परंपरा है। मंदिरों में भजन-कीर्तन और रामचरितमानस का पाठ होता है। भक्त इस दिन को उत्सव की तरह मनाते हैं, मानो घर में ही विवाह हो रहा हो।
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पूजा की परंपरा
मान्यताओं के अनुसार विवाह पंचमी पर ये परंपराएं निभाई जाती हैं:
- सुबह स्नान के बाद घर के मंदिर में राम-सीता की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है।
- भगवान राम को पीले वस्त्र और माता सीता को लाल वस्त्र या चुनरी अर्पित करने की परंपरा है।
- रामचरितमानस के बालकांड में विवाह प्रसंग का पाठ किया जाता है।
- भजन-कीर्तन और आरती की जाती है।
- कई भक्त इस दिन व्रत भी रखते हैं।
मिथिला की एक मान्यता
विवाह पंचमी से जुड़ी एक लोक मान्यता यह भी है कि मिथिला और नेपाल के कुछ इलाकों में लोग इस दिन बेटियों का विवाह करने से बचते हैं। इसके पीछे यह भावना बताई जाती है कि विवाह के बाद माता सीता को जीवन में कई कष्ट झेलने पड़े, जैसे वनवास और बाद में अयोध्या से दूर रहना। हालांकि यह मान्यता हर जगह नहीं मानी जाती और कई परिवार इसे शुभ दिन भी मानते हैं। ऐसे फैसले लोग अपनी परंपरा और परिवार के पुरोहित की सलाह से लेते हैं।
आदर्श दांपत्य का संदेश
राम और सीता का जीवन आपसी विश्वास, त्याग और साथ निभाने का प्रतीक माना जाता है। विवाह पंचमी का पर्व इसी संदेश को याद करने का अवसर है। कई परिवारों में इस दिन नवविवाहित दंपती विशेष रूप से पूजा करते हैं। विवाह योग्य युवक-युवतियों के परिवार भी इस दिन राम-सीता की पूजा को शुभ मानते हैं।
विवाह पंचमी और गीता जयंती
मार्गशीर्ष मास को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। 2026 में विवाह पंचमी के कुछ दिन बाद 20 दिसंबर को गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी है, जबकि 23 दिसंबर को मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दत्तात्रेय जयंती है। यानी दिसंबर का यह पखवाड़ा कई पर्वों से भरा रहेगा।
रामचरितमानस में विवाह प्रसंग
गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस में सीता स्वयंवर, धनुष भंग और विवाह का प्रसंग बालकांड में आता है। इसमें फुलवारी में राम और सीता के पहली बार एक-दूसरे को देखने का प्रसंग भी है, जिसे भक्त बड़े भाव से पढ़ते-सुनते हैं। धनुष टूटने के बाद परशुराम के आगमन और उनके संवाद का प्रसंग भी इसी हिस्से में है। विवाह पंचमी पर कई जगह इन प्रसंगों का पाठ और मंचन होता है। मिथिला की लोक परंपरा में राम-सीता विवाह से जुड़े विवाह गीत भी गाए जाते हैं।
घर पर कैसे मनाएं
अगर आप मंदिर नहीं जा पा रहे हैं, तो घर पर ही सादगी से यह पर्व मना सकते हैं। परिवार के साथ बैठकर रामचरितमानस का विवाह प्रसंग पढ़ें, बच्चों को राम-सीता की कथा सुनाएं और भजन गाएं। इससे नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से जुड़ती है।
विवाह पंचमी 2026 कब है
सोमवार, 14 दिसंबर 2026 को।
विवाह पंचमी किस तिथि को मनाई जाती है
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Drik Panchang: Vivah Panchami 2026, Drik Panchang: Hindu Festivals Calendar 2026





