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गोवर्धन पूजा पर गौ पूजा: गाय और बैलों को सजाने की परंपरा, पूजा का तरीका और पशुओं की देखभाल

गोवर्धन पूजा पशुधन के प्रति कृतज्ञता का पर्व भी है। इस दिन गाय और बैलों को नहलाकर सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। जानिए यह परंपरा, सुरक्षित सजावट और पशुओं की सेहत से जुड़ी सावधानियां।

गोवर्धन पूजा पर गाय और बैलों की पूजा की परंपरा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गोवर्धन पूजा की कथा में श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से ब्रजवासियों और उनकी गायों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था।
  • खेती पर टिके समाज में गाय दूध देती थी और बैल खेत जोतते थे। गोवर्धन पूजा पर इनकी पूजा मेहनत में साथ देने वाले इन पशुओं के प्रति धन्यवाद का भाव है।
  • शहरों में रहने वाले लोग नजदीकी गौशाला जाकर गौ सेवा कर सकते हैं, चारे का दान कर सकते हैं या सड़क पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के लिए पानी और चारे का इंतजाम कर सकते हैं।
  • पशुपालन और डेयरी विभाग की योजनाओं के तहत कई राज्यों में पशुओं का टीकाकरण और इलाज होता है।

गोवर्धन पूजा की कथा में श्रीकृष्ण ने इंद्र के कोप से ब्रजवासियों और उनकी गायों को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसलिए यह पर्व पशुधन, खासकर गाय, के प्रति सम्मान का भी है। गांवों में इस दिन गाय और बैलों को नहलाकर सजाया जाता है और उनकी पूजा होती है। इस बार केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूची में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को है, जबकि द्रिक पंचांग नई दिल्ली के लिए 10 नवंबर बताता है। अपने क्षेत्र के पंचांग से तारीख की पुष्टि करें। जानिए गोवर्धन पूजा पर गौ पूजा की परंपरा।

परंपरा का अर्थ

खेती पर टिके समाज में गाय दूध देती थी और बैल खेत जोतते थे। गोवर्धन पूजा पर इनकी पूजा मेहनत में साथ देने वाले इन पशुओं के प्रति धन्यवाद का भाव है। महाराष्ट्र में इसी तरह बैल पोला और दक्षिण भारत में मट्टू पोंगल जैसे पर्व मनाए जाते हैं।

मुख्य बातें: गोवर्धन पूजा पर गाय और बैलों की पूजा की परंपरा का ग्राफिक
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पूजा की तैयारी

  • पशुओं को सुबह साफ पानी से नहलाएं
  • सींगों पर गेरू या प्राकृतिक रंग लगाएं
  • गले में घंटी, फूलों की माला या मौली बांधें
  • पीठ पर साफ कपड़ा या झूल डालें
  • गुड़, हरा चारा और गेहूं या चने की रोटी तैयार रखें

पूजा का तरीका

1. पशु के माथे पर रोली या हल्दी से तिलक लगाएं

2. अक्षत और फूल चढ़ाएं

3. दीप दिखाकर आरती करें

4. गुड़, रोटी और हरा चारा खिलाएं

5. पशु की परिक्रमा करें और प्रणाम करें

कई जगह इसके बाद गोवर्धन की आकृति के पास पशुओं को घुमाने की परंपरा भी है।

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सजावट में सावधानी

  • केमिकल वाले रंग, पेंट या चमकीले पाउडर न लगाएं, ये त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचा सकते हैं
  • सींगों पर रंग लगाते समय आंखों से दूर रखें
  • प्लास्टिक की माला या सजावट न बांधें, पशु इसे निगल सकते हैं
  • घंटी या रस्सी इतनी कसकर न बांधें कि गले में चोट लगे

खिलाने में सावधानी

  • एक साथ बहुत ज्यादा गुड़, मिठाई या रोटी न खिलाएं, इससे पेट की परेशानी हो सकती है
  • प्लास्टिक की थैली में रखा खाना न दें
  • बासी या खराब खाना न खिलाएं
  • साफ पानी पर्याप्त मात्रा में दें

शहरों में

शहरों में रहने वाले लोग नजदीकी गौशाला जाकर गौ सेवा कर सकते हैं, चारे का दान कर सकते हैं या सड़क पर घूमने वाले बेसहारा पशुओं के लिए पानी और चारे का इंतजाम कर सकते हैं।

पशुओं की सेहत

पशुपालन और डेयरी विभाग की योजनाओं के तहत कई राज्यों में पशुओं का टीकाकरण और इलाज होता है। त्योहार के मौके पर अपने पशुओं के टीकाकरण की स्थिति भी नजदीकी पशु चिकित्सालय से पता कर लें।

क्या दिवाली के पटाखों से पशु डरते हैं?

हां। तेज आवाज से पशु घबरा जाते हैं। पटाखे पशुओं से दूर चलाएं और रात में उन्हें बांधकर सुरक्षित जगह रखें।

स्रोत: द्रिक पंचांग, पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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