गोवर्धन पूजा पर मथुरा-वृंदावन समेत देश के कृष्ण मंदिरों में भगवान को छप्पन भोग लगाया जाता है, यानी 56 तरह के व्यंजन। इस बार गोवर्धन पूजा केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूची में 9 नवंबर को है, जबकि द्रिक पंचांग नई दिल्ली के लिए 10 नवंबर बताता है। जानिए छप्पन भोग क्या है और इसकी परंपरा कैसे शुरू हुई।
प्रचलित कथा
लोक मान्यता के अनुसार इंद्र के कोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए श्रीकृष्ण ने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठाए रखा। इन सात दिनों में उन्होंने कुछ नहीं खाया। माना जाता है कि यशोदा मां कृष्ण को दिन में आठ बार, यानी आठ पहर, भोजन कराती थीं। सात दिन के आठ पहर के हिसाब से 7 गुणा 8, यानी 56 व्यंजन बनाकर ब्रजवासियों ने भगवान को भोग लगाया। इसी से छप्पन भोग की परंपरा मानी जाती है। कुछ परंपराओं में इसकी दूसरी कथाएं भी मिलती हैं।

अन्नकूट से संबंध
अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पहाड़। गोवर्धन पूजा पर कई तरह के अनाज, सब्जियां और पकवान पहाड़ की तरह सजाकर भगवान को चढ़ाए जाते हैं। छप्पन भोग इसी परंपरा का विस्तृत रूप है, जो खासकर मंदिरों में देखा जाता है।
भोग में क्या शामिल होता है
मंदिरों में सूची अलग-अलग होती है, पर आमतौर पर इनमें ये चीजें होती हैं:
- **मिठाइयां:** लड्डू, पेड़ा, खीर, रबड़ी, मालपुआ, जलेबी, मोहनथाल
- **अनाज और पकवान:** पूरी, कचौड़ी, चावल, दाल, कढ़ी
- **सब्जियां:** अन्नकूट की मिली-जुली सब्जी, कद्दू, आलू
- **नमकीन:** मठरी, सेव, पापड़
- **दूध से बनी चीजें:** दही, मक्खन, मिश्री, घी
- **फल और मेवे**
- **पेय:** शरबत, ठंडाई या दूध
- **पान और इलायची**
ब्रज की परंपरा में माखन-मिश्री का खास स्थान है, क्योंकि यह बाल कृष्ण को प्रिय मानी जाती है।
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घर पर कैसे करें
घर में 56 व्यंजन बनाना हर परिवार के लिए संभव नहीं होता। इसलिए कई परिवार:
- जितने हो सकें, उतने व्यंजन बनाकर भोग लगाते हैं
- मिठाई, फल, मेवे और सूखे पकवान मिलाकर 56 की संख्या पूरी करते हैं
- कुछ परिवार सिर्फ अन्नकूट की सब्जी, पूरी, कढ़ी और खीर का भोग लगाते हैं
धार्मिक जानकारों के अनुसार भगवान को भाव से चढ़ाया गया सरल भोग भी स्वीकार है।
भोग लगाने का तरीका
- भोग बनाने से पहले स्नान और रसोई की सफाई
- भोग में प्याज-लहसुन नहीं डाला जाता
- भोग में तुलसी दल रखने की परंपरा है
- भोग लगाने के बाद आरती और फिर प्रसाद बांटना
भोजन की बर्बादी न हो
इतने व्यंजन बनें तो बड़ी मात्रा में प्रसाद बचता है। इसे पड़ोसियों, मंदिर आने वालों और जरूरतमंद लोगों में बांटें।
मथुरा में छप्पन भोग कहां देखें?
गोवर्धन, वृंदावन और मथुरा के कई मंदिरों में भव्य छप्पन भोग सजाए जाते हैं। भीड़ और समय की जानकारी स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों से लें।
भोग के बाद प्रसाद
भोग का प्रसाद परिवार में बांटने से पहले कुछ हिस्सा गाय के लिए निकालने की परंपरा भी कई घरों में है।
स्रोत: द्रिक पंचांग, उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।






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