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अन्नकूट भोग क्या है: गोवर्धन पूजा पर 56 भोग की परंपरा, मंदिरों का अन्नकूट उत्सव और घर का भोग

अन्नकूट का अर्थ है अन्न का पहाड़। गोवर्धन पूजा के दिन भगवान श्रीकृष्ण को कई तरह के पकवानों का भोग लगाया जाता है। जानिए इस परंपरा का अर्थ, 56 भोग से जुड़ी मान्यता, मंदिरों का आयोजन और घर में भोग कैसे तैयार करें।

गोवर्धन पूजा अन्नकूट भोग की परंपरा का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • गोवर्धन पूजा के दिन मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण को ढेर सारे पकवानों का भोग लगाया जाता है।
  • अन्नकूट में पकवानों को पहाड़ के आकार में सजाया जाता है, जो गोवर्धन पर्वत का प्रतीक है।
  • घर पर 56 पकवान बनाना जरूरी नहीं। परंपरा का भाव समझकर अपनी क्षमता के अनुसार भोग बनाएं।
  • बहुत ज्यादा पकवान बनाने से खाना बच सकता है। जितने लोग हैं, उसी के अनुसार बनाएं।

गोवर्धन पूजा के दिन मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण को ढेर सारे पकवानों का भोग लगाया जाता है। इसे अन्नकूट कहते हैं। अन्नकूट का अर्थ है अन्न का कूट, यानी अन्न का पहाड़। इस बार सरकारी अवकाश सूची में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर और द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली में 10 नवंबर को है, इसलिए अन्नकूट भी परिवार की परंपरा के अनुसार इन्हीं में से किसी दिन होगा। जानिए अन्नकूट भोग की परंपरा।

अन्नकूट की मान्यता

गोवर्धन की कथा के अनुसार श्रीकृष्ण ने सात दिन तक गोवर्धन पर्वत उठाए रखा और इस दौरान भोजन नहीं किया। जब वर्षा थमी, तो ब्रजवासियों ने उनके लिए तरह-तरह के पकवान बनाकर भोग लगाया। एक लोकप्रिय मान्यता यह है कि माता यशोदा कृष्ण को दिन में आठ बार भोजन कराती थीं, इसलिए सात दिन के हिसाब से 56 व्यंजन बनाए गए। इसी से 56 भोग की परंपरा जोड़ी जाती है। अलग-अलग जगह इसकी व्याख्या अलग है, लेकिन भाव भगवान के प्रति कृतज्ञता का है।

मुख्य बातें: गोवर्धन पूजा अन्नकूट भोग की परंपरा का ग्राफिक
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पकवानों का पहाड़

अन्नकूट में पकवानों को पहाड़ के आकार में सजाया जाता है, जो गोवर्धन पर्वत का प्रतीक है। इसमें आमतौर पर ये चीजें होती हैं:

  • कई सब्जियों को मिलाकर बनी अन्नकूट की सब्जी
  • कढ़ी, दाल और चावल
  • पूड़ी और बाजरे की रोटी या खिचड़ी, कई क्षेत्रों में
  • खीर, हलवा और लड्डू जैसी मिठाइयां
  • मौसमी फल और सूखे मेवे
  • माखन और मिश्री, जो कृष्ण को प्रिय माने जाते हैं

मंदिरों का अन्नकूट उत्सव

मथुरा, वृंदावन, नाथद्वारा और देश भर के कृष्ण मंदिरों में अन्नकूट का बड़ा आयोजन होता है। कई मंदिरों में सैकड़ों पकवानों का भोग लगता है और फिर भक्तों में प्रसाद बांटा जाता है। गुजरात और राजस्थान के मंदिरों में भी यह आयोजन खास होता है। मंदिर जाने से पहले वहां के दर्शन के समय की जानकारी ले लें, क्योंकि इस दिन भीड़ बहुत होती है।

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घर पर अन्नकूट कैसे करें

घर पर 56 पकवान बनाना जरूरी नहीं। परंपरा का भाव समझकर अपनी क्षमता के अनुसार भोग बनाएं।

  • एक अन्नकूट की सब्जी, जिसमें मौसमी सब्जियां हों
  • पूड़ी या रोटी
  • कढ़ी या दाल
  • एक मिठाई और थोड़ा माखन-मिश्री
  • भोग को थाली में या पत्तों पर सजाकर गोवर्धन की आकृति के सामने रखें

प्रसाद बांटने की परंपरा

अन्नकूट का खास पहलू यह है कि भोग के बाद प्रसाद सबमें बांटा जाता है। कई गांवों और मोहल्लों में सामूहिक अन्नकूट होता है, जिसमें सभी परिवार कुछ न कुछ बनाकर लाते हैं और साथ बैठकर प्रसाद लेते हैं। यह परंपरा मिल-बांटकर खाने और समाज को जोड़ने का संदेश देती है।

भोजन की बर्बादी से बचें

बहुत ज्यादा पकवान बनाने से खाना बच सकता है। जितने लोग हैं, उसी के अनुसार बनाएं। बचा भोजन साफ तरीके से जरूरतमंदों को दें।

क्या अन्नकूट में प्याज-लहसुन डालते हैं?

भगवान के भोग में आमतौर पर प्याज और लहसुन नहीं डाले जाते। ज्यादातर परिवार अन्नकूट की सब्जी और दूसरे पकवान सात्विक तरीके से बनाते हैं।

स्रोत: द्रिक पंचांग। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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