हनुमान चालीसा पढ़ने वाले लगभग हर व्यक्ति ने यह चौपाई पढ़ी होगी: अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता। इसका अर्थ है कि माता सीता ने हनुमान जी को यह वरदान दिया कि वे आठ सिद्धियों और नौ निधियों के दाता होंगे। लेकिन ये आठ सिद्धियां और नौ निधियां कौन सी हैं, यह कम लोग जानते हैं। पुराणों, योग ग्रंथों और तंत्र परंपरा में इनका विस्तार से वर्णन मिलता है। इस लेख में जानिए अष्ट सिद्धि और नव निधि से जुड़ी मान्यताएं और उनका अर्थ।
सिद्धि का अर्थ
सिद्धि का अर्थ है साधना से मिलने वाली असाधारण शक्ति या उपलब्धि। योग दर्शन में महर्षि पतंजलि के योगसूत्र के विभूति पाद में ध्यान और साधना से मिलने वाली कई शक्तियों का उल्लेख है। भागवत पुराण के ग्यारहवें स्कंध में भगवान कृष्ण उद्धव को अठारह सिद्धियों के बारे में बताते हैं, जिनमें आठ को प्रमुख माना गया है। हालांकि कई संतों और ग्रंथों ने यह भी कहा है कि सिद्धियों का लोभ साधक को उसके असली लक्ष्य, यानी मोक्ष या ईश्वर से मिलन, से भटका सकता है।

आठ सिद्धियां
- अणिमा: शरीर को अणु के समान अत्यंत सूक्ष्म बना लेने की शक्ति। सुंदरकांड में हनुमान जी के मसक समान रूप लेकर लंका में प्रवेश करने को इससे जोड़ा जाता है।
- महिमा: शरीर को बहुत विशाल बना लेने की शक्ति। समुद्र लांघते समय और सुरसा के सामने हनुमान जी के विशाल रूप को इसका उदाहरण माना जाता है।
- गरिमा: शरीर को बहुत भारी बना लेने की शक्ति। महाभारत में भीम के सामने बूढ़े वानर की पूंछ न हिलने की कथा को इससे जोड़ा जाता है।
- लघिमा: शरीर को बहुत हल्का बना लेने की शक्ति, जिससे हवा में उड़ा जा सके।
- प्राप्ति: किसी भी स्थान पर पहुंच जाने या कुछ भी प्राप्त कर लेने की शक्ति।
- प्राकाम्य: अपनी हर इच्छा पूरी कर लेने की शक्ति।
- ईशित्व: सब पर प्रभुत्व या ईश्वर जैसा अधिकार।
- वशित्व: सबको अपने वश में कर लेने की शक्ति।
नौ निधियां
निधि का अर्थ है खजाना। मान्यता है कि नौ निधियां धन के देवता कुबेर के पास हैं। अलग अलग ग्रंथों में इनके नाम में थोड़ा अंतर मिलता है, लेकिन आम तौर पर ये नौ निधियां बताई जाती हैं: पद्म, महापद्म, शंख, मकर, कच्छप, मुकुंद, कुंद, नील और खर्व। कुछ सूचियों में खर्व की जगह मिश्र या वर नाम भी मिलता है।
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निधियों का अर्थ
परंपरा में हर निधि को एक खास तरह की संपत्ति या स्वभाव से जोड़ा गया है। पद्म और महापद्म निधि को सात्विक संपत्ति माना जाता है, जो पीढ़ियों तक चलती है और दान धर्म में लगती है। शंख निधि वाले के बारे में कहा जाता है कि वह खुद तो सुख भोगता है, पर संपत्ति आगे नहीं जाती। मकर और कच्छप निधि को अस्त्र शस्त्र और सुरक्षित संपत्ति से जोड़ा गया है। मुकुंद और कुंद निधि को राजसी भोग और व्यापार से, नील निधि को रत्नों और व्यापार से और खर्व निधि को मिली जुली संपत्ति से जोड़ा जाता है। ये व्याख्याएं प्रतीकात्मक हैं।
हनुमान जी और सिद्धियां
रामचरितमानस और दूसरे ग्रंथों में हनुमान जी को अतुलित बल के धाम कहा गया है। मान्यता है कि उन्हें बचपन में ही देवताओं से कई वरदान मिले थे। लंका जाते समय, सीता माता की खोज में, लक्ष्मण के लिए संजीवनी लाते समय और रावण की सभा में उन्होंने कई बार इन शक्तियों का प्रदर्शन किया। लेकिन भक्त परंपरा में हनुमान जी की सबसे बड़ी पहचान उनकी विनम्रता और राम के प्रति अटूट भक्ति है, न कि उनकी सिद्धियां।
चौपाई का भाव
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता वाली चौपाई का भाव यह है कि हनुमान जी अपने भक्तों को भौतिक और आध्यात्मिक दोनों तरह की समृद्धि दे सकते हैं। इसके ठीक बाद की चौपाई में कहा गया है, राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा। यानी हनुमान जी के पास राम नाम का रसायन है और वे सदा राम के सेवक बने रहते हैं। संत इसका अर्थ यह बताते हैं कि सबसे बड़ा खजाना भक्ति है।
आज के संदर्भ में
आज कई लोग अष्ट सिद्धि और नव निधि को प्रतीक के रूप में भी समझते हैं। जैसे मन को सूक्ष्म और एकाग्र करना, सोच को विशाल बनाना, कठिन समय में स्थिर रहना और अहंकार को हल्का रखना। नौ निधियों को भी अलग अलग तरह की संपत्ति, जैसे ज्ञान, स्वास्थ्य, परिवार और धन के रूप में देखा जाता है। हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले भक्त इसे शक्ति, साहस और भक्ति की प्रेरणा के रूप में पढ़ते हैं।
अष्ट सिद्धि कौन सी हैं
अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व।
नव निधि किसके पास मानी जाती हैं
धन के देवता कुबेर के पास।
हनुमान जी को यह वरदान किसने दिया
चालीसा के अनुसार माता सीता यानी जानकी ने।
सिद्धियों का वर्णन किन ग्रंथों में है
भागवत पुराण, योगसूत्र और दूसरे ग्रंथों में।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Hanuman Chalisa text (Gita Press), Bhagavata Purana 11.15 (Bhaktivedanta Vedabase), Yoga Sutras of Patanjali, Vibhuti Pada (Wisdom Library)





