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दीपावली पर रंगोली के शुभ चिह्न: स्वस्तिक, कमल, लक्ष्मी के चरण और ओम का अर्थ

रंगोली की परंपरा, स्वस्तिक, कमल, ओम, लक्ष्मी के चरण, कलश, दीपक और शुभ-लाभ जैसे चिह्नों का अर्थ, अलग-अलग राज्यों में रंगोली, अल्पना और कोलम, रंगोली कहां बनाएं और प्राकृतिक रंग।

दीपावली पर रंगोली के शुभ चिह्नों का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दीपावली पर घर के आंगन और दरवाजे पर रंगोली बनाना सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है।
  • स्वस्तिक को हिंदू परंपरा में मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है।
  • दीपावली पर मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर आते हुए छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिन्हें लक्ष्मी के चरण कहते हैं।
  • केमिकल वाले रंगों की जगह हल्दी, कुमकुम, चावल का आटा, फूलों की पंखुड़ियां, सूखी पत्तियां और कॉफी जैसे प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

दीपावली पर घर के आंगन और दरवाजे पर रंगोली बनाना सबसे सुंदर परंपराओं में से एक है। रंगोली केवल सजावट नहीं, बल्कि मेहमानों और मां लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक मानी जाती है। रंगोली में बनाए जाने वाले कई चिह्नों का खास धार्मिक अर्थ है। दीपावली 8 नवंबर 2026 को है। जानिए दीपावली पर रंगोली के शुभ चिह्न और उनका अर्थ।

रंगोली की परंपरा

भारत के अलग-अलग हिस्सों में रंगोली के अलग नाम और रूप हैं। उत्तर भारत में इसे रंगोली या चौक पूरना कहते हैं, बंगाल में अल्पना, दक्षिण भारत में कोलम और राजस्थान में मांडना। पहले रंगोली चावल के आटे, हल्दी, कुमकुम और फूलों से बनाई जाती थी। चावल के आटे की रंगोली चींटियों और पक्षियों के लिए भोजन भी बन जाती थी।

मुख्य बातें: दीपावली पर रंगोली के शुभ चिह्नों का ग्राफिक
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स्वस्तिक

स्वस्तिक को हिंदू परंपरा में मंगल और शुभता का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत में स्वस्तिक बनाया जाता है। दीपावली पर मुख्य द्वार, पूजा स्थल और तिजोरी पर रोली से स्वस्तिक बनाने की परंपरा है। रंगोली के बीच में भी स्वस्तिक बनाया जाता है।

कमल

कमल को मां लक्ष्मी का आसन माना जाता है। कीचड़ में खिलकर भी साफ रहने वाला कमल पवित्रता का प्रतीक है। दीपावली की रंगोली में कमल का फूल सबसे लोकप्रिय डिजाइन है। आठ पंखुड़ियों वाला कमल बनाना शुभ माना जाता है।

यह भी पढ़ें: आसान रंगोली कैसे बनाएं: शुरुआती लोगों के लिए डिजाइन टिप्स, रंग, फूल और प्राकृतिक सामग्री | दीपावली से पहले घर के मंदिर की सफाई कैसे करें: मूर्तियां, पुरानी पूजा सामग्री और खंडित चीजों का क्या करें

लक्ष्मी के चरण

दीपावली पर मुख्य द्वार से घर के अंदर की ओर आते हुए छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं, जिन्हें लक्ष्मी के चरण कहते हैं। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी घर में प्रवेश करती हैं। चरण हमेशा घर के अंदर की ओर बनाए जाते हैं। इन्हें आटे, कुमकुम या आलता से बनाया जाता है।

ओम, कलश और दीपक

  • ओम: सृष्टि के मूल नाद का प्रतीक, पूजा स्थल के पास बनाया जाता है
  • कलश: समृद्धि और पूर्णता का प्रतीक
  • दीपक: अंधकार पर प्रकाश की जीत का प्रतीक, रंगोली के किनारों पर असली दीये भी रखे जाते हैं
  • शुभ-लाभ: दरवाजे के दोनों ओर लिखा जाता है, जिसे भगवान गणेश के पुत्रों से जोड़ा जाता है

रंगोली कहां बनाएं

आम तौर पर रंगोली मुख्य द्वार के बाहर, आंगन में और पूजा स्थल के सामने बनाई जाती है। कई परिवार धनतेरस से भाई दूज तक रोज नई रंगोली बनाते हैं। रंगोली पर पैर न पड़े, इसका ध्यान रखें।

प्राकृतिक रंग

केमिकल वाले रंगों की जगह हल्दी, कुमकुम, चावल का आटा, फूलों की पंखुड़ियां, सूखी पत्तियां और कॉफी जैसे प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ये त्वचा और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर हैं। दीये रखने हों, तो सूखे फूल और कागज की सजावट से दूर रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रंगोली कब बनानी चाहिए?

ज्यादातर परिवार दीपावली की सुबह या शाम की पूजा से पहले रंगोली बनाते हैं। कुछ लोग धनतेरस से ही रंगोली बनाना शुरू कर देते हैं।

स्रोत: संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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