दिवाली से पहले घर की सफाई में बहुत सा पुराना सामान निकलता है: कूलर, फर्नीचर, पुराना फोन, साइकिल या बच्चों के खिलौने। बहुत से लोग इन्हें ऑनलाइन क्लासिफाइड वेबसाइट या सोशल मीडिया पर बेचते हैं। ठग इसी मौके का फायदा उठाकर खरीदार बनते हैं और बेचने वाले के खाते से ही पैसे निकाल लेते हैं। जानिए पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड कैसे होता है और इससे कैसे बचें।
ठगी का सबसे आम तरीका: QR कोड
ठग खुद को खरीदार बताकर बिना मोलभाव किए सामान खरीदने को तैयार हो जाता है। फिर कहता है कि वह भुगतान भेज रहा है और आपको एक QR कोड भेजता है, जिसे स्कैन करके पैसा लेने को कहता है। जैसे ही आप स्कैन करके UPI PIN डालते हैं, पैसा आपके खाते से कट जाता है।
याद रखें, पैसा लेने के लिए कभी QR कोड स्कैन करने या UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। UPI PIN सिर्फ पैसा भेजने के लिए डाला जाता है।

दूसरे आम तरीके
- पेमेंट रिक्वेस्ट: ठग पैसा भेजने के बजाय आपको कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजता है, जिसे मंजूर करने पर पैसा आपके खाते से जाता है
- फौजी या अफसर बनकर: ठग खुद को सेना या किसी विभाग का अधिकारी बताकर भरोसा जीतता है और कहता है कि उसके विभाग से भुगतान का तरीका अलग है
- ज्यादा पैसा भेजने का बहाना: ठग नकली स्क्रीनशॉट भेजकर कहता है कि गलती से ज्यादा पैसा चला गया, बाकी लौटा दीजिए
- टेस्ट के लिए एक रुपया: पहले छोटी रकम भेजकर भरोसा जीतना और फिर बड़ी रकम की कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजना
- लिंक भेजना: भुगतान पाने के नाम पर कोई लिंक भेजकर बैंक जानकारी भरवाना
सुरक्षित तरीके से कैसे बेचें
- खरीदार से सामान देखकर ही भुगतान लेने को कहें
- अपना UPI ID या मोबाइल नंबर दें, ताकि वह आपको सीधे भुगतान भेजे
- भुगतान आने की पुष्टि सिर्फ अपने बैंक ऐप या बैंक के SMS से करें, खरीदार के भेजे स्क्रीनशॉट से नहीं
- कोई भी रिक्वेस्ट मंजूर करने से पहले पढ़ें कि पैसा आ रहा है या जा रहा है
- बहुत जल्दबाजी दिखाने वाले या बिना देखे खरीदने वाले खरीदार से सावधान रहें
- सामान दिखाने के लिए किसी को घर बुलाएं, तो घर में कोई और भी मौजूद रहे
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पुराना फोन बेचते समय
फोन बेचने से पहले उसका डेटा बैकअप लें, सभी खातों से लॉगआउट करें, फैक्टरी रीसेट करें और सिम व मेमोरी कार्ड निकाल लें।
ठगी हो जाए तो
- तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर फोन करें
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
- अपने बैंक को सूचना दें और जरूरत हो तो UPI सेवा अस्थायी रूप से बंद कराएं
- ठग से हुई बातचीत, नंबर और लेन-देन के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें
जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
क्या क्लासिफाइड वेबसाइट जिम्मेदार है?
ज्यादातर क्लासिफाइड वेबसाइट सिर्फ खरीदार और विक्रेता को मिलाती हैं। वे खुद भी चेतावनी देती हैं कि भुगतान के लिए QR कोड स्कैन न करें। सावधानी आपकी अपनी है।
स्रोत: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





