ताज़ा खबर
अंटार्कटिक संधि: 1959 में 12 देशों का समझौता, बर्फीले महाद्वीप पर सेना और खनन पर रोक, मैड्रिड प्रोटोकॉल और भारत की भूमिका What Is BRICS? Members, New Development Bank and India’s Role as Chair in 2026 BREAKING: 4 नवंबर को चंडीगढ़ में बीजेपी का सिख सम्मेलन आयोजित प्रधानमंत्री वन धन योजना: आदिवासी समूहों को महुआ, इमली और शहद जैसी वन उपज से कमाई, वन धन विकास केंद्र और TRIFED की भूमिका BREAKING: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरदार पटेल कौशल योजना का शुभारंभ करेंगे Guru Nanak Jayanti: Significance of Gurpurab, Prabhat Pheri, Akhand Path and the Teachings of Guru Nanak पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड: दिवाली की सफाई के बाद बिक्री करते समय QR कोड और फर्जी खरीदार से बचें BREAKING: तमिलनाडु में सरकारी नौकरियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा में पांच साल की छूट
ट्रेंडिंग
आपका पैसा

पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड: दिवाली की सफाई के बाद बिक्री करते समय QR कोड और फर्जी खरीदार से बचें

दिवाली की सफाई के बाद लोग पुराना फर्नीचर, कूलर, फोन जैसे सामान ऑनलाइन बेचते हैं और ठग खरीदार बनकर इसका फायदा उठाते हैं। जानिए आम तरीके, सुरक्षित लेन-देन और शिकायत की प्रक्रिया।

पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड से बचाव का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिवाली से पहले घर की सफाई में बहुत सा पुराना सामान निकलता है: कूलर, फर्नीचर, पुराना फोन, साइकिल या बच्चों के खिलौने।
  • ठग खुद को खरीदार बताकर बिना मोलभाव किए सामान खरीदने को तैयार हो जाता है।
  • फोन बेचने से पहले उसका डेटा बैकअप लें, सभी खातों से लॉगआउट करें, फैक्टरी रीसेट करें और सिम व मेमोरी कार्ड निकाल लें।
  • जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

दिवाली से पहले घर की सफाई में बहुत सा पुराना सामान निकलता है: कूलर, फर्नीचर, पुराना फोन, साइकिल या बच्चों के खिलौने। बहुत से लोग इन्हें ऑनलाइन क्लासिफाइड वेबसाइट या सोशल मीडिया पर बेचते हैं। ठग इसी मौके का फायदा उठाकर खरीदार बनते हैं और बेचने वाले के खाते से ही पैसे निकाल लेते हैं। जानिए पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड कैसे होता है और इससे कैसे बचें।

ठगी का सबसे आम तरीका: QR कोड

ठग खुद को खरीदार बताकर बिना मोलभाव किए सामान खरीदने को तैयार हो जाता है। फिर कहता है कि वह भुगतान भेज रहा है और आपको एक QR कोड भेजता है, जिसे स्कैन करके पैसा लेने को कहता है। जैसे ही आप स्कैन करके UPI PIN डालते हैं, पैसा आपके खाते से कट जाता है।

याद रखें, पैसा लेने के लिए कभी QR कोड स्कैन करने या UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती। UPI PIN सिर्फ पैसा भेजने के लिए डाला जाता है।

मुख्य बातें: पुराना सामान ऑनलाइन बेचने में फ्रॉड से बचाव का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

दूसरे आम तरीके

  • पेमेंट रिक्वेस्ट: ठग पैसा भेजने के बजाय आपको कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजता है, जिसे मंजूर करने पर पैसा आपके खाते से जाता है
  • फौजी या अफसर बनकर: ठग खुद को सेना या किसी विभाग का अधिकारी बताकर भरोसा जीतता है और कहता है कि उसके विभाग से भुगतान का तरीका अलग है
  • ज्यादा पैसा भेजने का बहाना: ठग नकली स्क्रीनशॉट भेजकर कहता है कि गलती से ज्यादा पैसा चला गया, बाकी लौटा दीजिए
  • टेस्ट के लिए एक रुपया: पहले छोटी रकम भेजकर भरोसा जीतना और फिर बड़ी रकम की कलेक्ट रिक्वेस्ट भेजना
  • लिंक भेजना: भुगतान पाने के नाम पर कोई लिंक भेजकर बैंक जानकारी भरवाना

सुरक्षित तरीके से कैसे बेचें

  • खरीदार से सामान देखकर ही भुगतान लेने को कहें
  • अपना UPI ID या मोबाइल नंबर दें, ताकि वह आपको सीधे भुगतान भेजे
  • भुगतान आने की पुष्टि सिर्फ अपने बैंक ऐप या बैंक के SMS से करें, खरीदार के भेजे स्क्रीनशॉट से नहीं
  • कोई भी रिक्वेस्ट मंजूर करने से पहले पढ़ें कि पैसा आ रहा है या जा रहा है
  • बहुत जल्दबाजी दिखाने वाले या बिना देखे खरीदने वाले खरीदार से सावधान रहें
  • सामान दिखाने के लिए किसी को घर बुलाएं, तो घर में कोई और भी मौजूद रहे

यह भी पढ़ें: त्योहार के मौसम में UPI फ्रॉड से कैसे बचें: फर्जी ऑफर, कलेक्ट रिक्वेस्ट और QR कोड के जाल | नकली नोट कैसे पहचानें: RBI के बताए सुरक्षा फीचर, 500 और 200 रुपये के नोट की जांच का तरीका

पुराना फोन बेचते समय

फोन बेचने से पहले उसका डेटा बैकअप लें, सभी खातों से लॉगआउट करें, फैक्टरी रीसेट करें और सिम व मेमोरी कार्ड निकाल लें।

ठगी हो जाए तो

  • तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर फोन करें
  • cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
  • अपने बैंक को सूचना दें और जरूरत हो तो UPI सेवा अस्थायी रूप से बंद कराएं
  • ठग से हुई बातचीत, नंबर और लेन-देन के स्क्रीनशॉट संभालकर रखें

जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रोकने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

क्या क्लासिफाइड वेबसाइट जिम्मेदार है?

ज्यादातर क्लासिफाइड वेबसाइट सिर्फ खरीदार और विक्रेता को मिलाती हैं। वे खुद भी चेतावनी देती हैं कि भुगतान के लिए QR कोड स्कैन न करें। सावधानी आपकी अपनी है।

स्रोत: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

अपनी राय लिखें

WhatsApp Facebook X