दुनिया के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज बाइनेंस में एक बड़ी सुरक्षा सेंधमारी की घटना सामने आई है, जिसमें करीब 6.3 अरब डॉलर यानी लगभग 60,000 करोड़ रुपये की डिजिटल संपत्ति चोरी हो गई है। इस विशाल सेंध के बाद कंपनी ने तत्काल कदम उठाते हुए क्रिप्टो की खरीद और निकासी पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। ब्लॉकचेन रिसर्च फर्म टीआरएम लैब्स ने इस मामले में नॉर्थ कोरिया से जुड़े हैकर्स की भूमिका होने का दावा किया है। सुरक्षा घटना की जानकारी सामने आते ही वैश्विक क्रिप्टो बाजार में हलचल मच गई और अधिकांश डिजिटल परिसंपत्तियों की कीमतों में पांच प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

लेनदेन वॉलेट में सेंधमारी और चोरी का विवरण
क्रिप्टोकरेंसी के पूरे इतिहास में इसे अब तक की सबसे बड़ी चोरी माना जा रहा है। बाइनेंस के डिजिटल लॉकर और लेनदेन को प्रोसेस करने वाले मुख्य वॉलेट्स को इस हमले में सीधे तौर पर निशाना बनाया गया। हैकर्स ने सुरक्षा ढांचे को भेदते हुए बेहद कम समय के भीतर हजारों करोड़ रुपये मूल्य के क्रिप्टो कॉइंस बाहर ट्रांसफर कर लिए। भारतीय समयानुसार यह पूरी घटना शुक्रवार तड़के लगभग 1:30 बजे के आसपास घटित हुई। जैसे ही सुरक्षा प्रणालियों ने इस असामान्य हलचल को पकड़ा, कंपनी के तकनीकी तंत्र में खलबली मच गई।
डिजिटल लॉकर से बड़ी मात्रा में पूंजी निकलने के बाद कंपनी ने अनधिकृत निकासी के सिलसिले को रोकने के लिए आपातकालीन कदम उठाए। एक्सचेंज पर व्यापार करने वाले लाखों उपयोगकर्ता अचानक खरीदारी या अपनी जमा पूंजी निकालने में असमर्थ हो गए। कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाना अनिवार्य था ताकि अतिरिक्त संपत्तियों को चोरी होने से तुरंत बचाया जा सके।
जांच के शुरुआती निष्कर्ष और सुरक्षा समीक्षा
बाइनेंस की साइबर सुरक्षा टीम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने इस घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। कंपनी द्वारा जारी की गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती विश्लेषण में यह संकेत मिला था कि यह सुरक्षा घटना संभवतः एक से समझौता किए गए लैपटॉप के जरिए शुरू हुई थी। हालांकि, बाद में की गई गहन पड़ताल से यह उजागर हुआ कि सुरक्षा घेरे में कई अन्य बिंदु भी प्रभावित हुए थे। कंपनी ने इस हमले को एक बेहद जटिल और सुनियोजित साइबर हमला करार दिया है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर निरंतर समन्वय किया जा रहा है। सारे तथ्यात्मक विवरण जुटाए जा रहे हैं और जैसे ही आधिकारिक और सत्यापित जानकारी सामने आएगी, उसे सार्वजनिक किया जाएगा। अनुसंधान फर्म टीआरएम लैब्स के दावों ने भी इस जांच को एक अंतरराष्ट्रीय दिशा दी है, जिसमें नॉर्थ कोरिया के हैकिंग समूहों के शामिल होने की आशंका जताई गई है।
उपयोगकर्ताओं के फंड की सुरक्षा और रिकवरी के कदम
नुकसान के बड़े पैमाने को देखते हुए बाइनेंस ने अपने सभी ग्राहकों को उनके धन की पूर्ण सुरक्षा का ठोस भरोसा दिया है। कंपनी ने आधिकारिक बयान में कहा कि किसी भी उपयोगकर्ता को अपनी जमा पूंजी के नुकसान का सामना नहीं करना पड़ेगा। इस नुकसान की पूरी भरपाई बाइनेंस के विशेष सेफू यानी एसएएफयू फंड और कंपनी के अपने स्वयं के आंतरिक कोष से की जाएगी। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि ग्राहकों द्वारा पैसे जमा करने यानी डिपॉजिट की सुविधा पर कोई असर नहीं पड़ा है और वह पूरी तरह अप्रभावित है।
निकासी पर लगी रोक के विषय में कंपनी ने बताया कि अगले 45 घंटों के भीतर इस सेवा को दोबारा बहाल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। बाइनेंस ने उद्योग के अन्य साझेदारों के साथ मिलकर चुराई गई संपत्तियों को फ्रीज करने का अभियान भी चलाया है। इस त्वरित कार्रवाई के माध्यम से अब तक लगभग 3 अरब डॉलर मूल्य की संपत्तियों को सफलतापूर्वक फ्रीज किया जा चुका है। निकासी बंद करने के बाद सिस्टम से होने वाला पूंजी का अनधिकृत बहाव पूरी तरह थम चुका है।
वैश्विक प्रभाव, भारतीय यूजर्स और पूर्व की घटनाएं
बाइनेंस दुनिया भर के 100 से अधिक देशों में अपनी सेवाएं प्रदान करता है और इसके मंच पर 30 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता मौजूद हैं। इस विशाल आधार में भारतीय निवेशकों का भी एक बड़ा हिस्सा शामिल है। अनुमानों के मुताबिक भारत से करीब 2 से 2.5 करोड़ यूजर्स इस एक्सचेंज पर पंजीकृत हैं। हालांकि, अभी तक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इस सेंधमारी का असर किस श्रेणी के उपयोगकर्ताओं पर सीधे पड़ा है।
क्रिप्टो बाजार में इतनी बड़ी रकम की चोरी पहले कभी नहीं देखी गई, हालांकि पूर्व में भी कई बड़े प्लेटफॉर्म सुरक्षा उल्लंघनों का शिकार रहे हैं। वर्ष 2025 में बायबिट प्लेटफॉर्म पर बड़ा हमला हुआ था, जहां से 1.5 अरब डॉलर यानी लगभग 14,000 करोड़ रुपये की डिजिटल मुद्रा चुरा ली गई थी। इससे पहले रोनिन नेटवर्क पर हुए हमले में 625 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। वर्तमान घटना ने एक बार फिर विकेंद्रीकृत वित्त और डिजिटल वॉलेट्स की सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है।
स्रोत: Aaj Tak





