जनगणना 2027 की समय सारिणी और प्रक्रिया
भारत सरकार ने जनगणना 2027 के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके तहत देश भर में जनसंख्या गणना का कार्य शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया के लिए 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि 00:00 बजे को संदर्भ तिथि के रूप में निर्धारित किया गया है। जनगणना का मुख्य चरण 25 जनवरी 2027 से शुरू होकर 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इसके अतिरिक्त, नागरिक 10 जनवरी 2027 से 24 जनवरी 2027 के बीच स्वयं गणना विकल्प का उपयोग कर सकते हैं। मुख्य गणना के बाद, 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक एक रिविजनल राउंड आयोजित किया जाएगा ताकि डेटा की सटीकता सुनिश्चित की जा सके।

स्वयं गणना की सुविधा और प्रश्नावली का विस्तार
इस बार की जनगणना में पहली बार डिजिटल माध्यम से स्वयं गणना यानी सेल्फ एन्यूमरेशन की सुविधा प्रदान की गई है। यह एक वैकल्पिक व्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि नागरिक अपनी इच्छा से सरकारी पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह सुविधा मुख्य घर घर जाकर की जाने वाली गणना से ठीक पहले उपलब्ध रहेगी। इस डिजिटल जनगणना के दौरान नागरिकों से कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे। इनमें 13 नए प्रश्न शामिल हैं, जिनमें जाति, धर्म, माता पिता का जन्म स्थान और जन्म तिथि, बैंक खातों की संख्या, जीवनसाथी का नाम, राष्ट्रीयता, डिजिटल साक्षरता, स्थायी आवासीय पता और कोविड 19 टीकाकरण स्थल जैसी जानकारियां शामिल हैं। साथ ही, पासपोर्ट नंबर, ड्राइविंग लाइसेंस की उपलब्धता, मोबाइल नंबर, आधार और वोटर आईडी की जानकारी भी मांगी जाएगी, यदि वे उपलब्ध हों। यह जनगणना प्रक्रिया 1948 के जनगणना अधिनियम की धारा 3 और 1990 के जनगणना नियमों के तहत संचालित की जा रही है।
विशिष्ट क्षेत्रों और चुनाव वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम
सरकारी अधिसूचना के अनुसार, कुछ विशिष्ट क्षेत्रों को इस चरण की जनगणना से बाहर रखा गया है। मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण जनगणना प्रक्रिया को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश, गोवा, पंजाब और उत्तराखंड जैसे चुनाव वाले राज्यों में जनगणना का कार्यक्रम अलग रखा गया है। इन चार राज्यों में जनगणना प्रक्रिया 16 नवंबर 2026 से शुरू होगी, जिसमें पोर्टल 16 नवंबर को सक्रिय हो जाएगा और घर घर जाकर गणना 1 दिसंबर 2026 से शुरू होकर 5 जनवरी 2027 तक चलेगी। लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फ से ढके इलाकों में भी इस दौरान जनगणना नहीं होगी, क्योंकि इन क्षेत्रों में यह कार्य पहले ही 30 सितंबर 2026 को पूरा किया जा चुका है।
जनगणना का महत्व और चरणबद्ध कार्यान्वयन
यह भारत की पहली डिजिटल जनगणना है जिसमें जाति आधारित गणना को भी शामिल किया गया है। जनगणना का पहला चरण, जिसे हाउसलिस्टिंग ऑपरेशंस के रूप में जाना जाता है, 1 अप्रैल 2026 को शुरू हुआ था और मणिपुर को छोड़कर पूरे देश में 30 सितंबर 2026 तक संपन्न हो गया था। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया और जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रक्रिया देश के जनसांख्यिकीय डेटा को अद्यतन करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा अभ्यास एक व्यवस्थित तरीके से संपन्न किया जाएगा ताकि सभी नागरिकों की सही जानकारी प्राप्त हो सके। 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि को संदर्भ तिथि के रूप में रखने का उद्देश्य आंकड़ों का सटीक संकलन करना है। यह पूरी कवायद केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित की जा रही है, जो जनगणना अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग कर रही है। सरकार का यह कदम देश की भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं के लिए आधार तैयार करेगा, क्योंकि इसमें पहली बार डिजिटल साक्षरता और अन्य आधुनिक मापदंडों को शामिल किया गया है। राज्य स्तर पर प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर इस कार्य को पूर्ण करें।
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