दिवाली के समय बाजारों में भीड़ होती है और दुकानों में सामान्य दिनों से ज्यादा माल भरा रहता है। सजावटी लाइटें, एक्सटेंशन बोर्ड और आसपास जलते पटाखे आग का खतरा बढ़ा देते हैं। एक छोटी सी चिंगारी दुकानदार की साल भर की कमाई को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए दुकान की आग से सुरक्षा और बीमा, दोनों पर पहले से ध्यान देना जरूरी है।
बिजली की वायरिंग
- पुरानी या कटी-फटी वायरिंग किसी योग्य इलेक्ट्रीशियन से जांच कराएं
- एक सॉकेट पर कई उपकरण न लगाएं
- सजावटी लाइटें अच्छी गुणवत्ता की हों और ISI मार्क वाली हों
- दुकान बंद करते समय मेन स्विच बंद करें
- MCB और सही क्षमता का फ्यूज लगवाएं

पटाखों से दूरी
- पटाखों की दुकान न हो, तो दुकान में पटाखे न रखें
- दुकान के सामने या आसपास पटाखे न जलाने दें
- कपड़ा, कागज, प्लास्टिक और तेल जैसे जल्दी आग पकड़ने वाले सामान की दुकानें खास सावधानी रखें
- पटाखा विक्रेताओं के लिए प्रशासन का अस्थायी लाइसेंस और तय नियम जरूरी हैं
अग्निशामक यंत्र
- दुकान में कम से कम एक सही प्रकार का अग्निशामक यंत्र रखें
- उसकी रिफिल की तारीख देखें
- दुकान के कर्मचारियों को उसे चलाना सिखाएं
- पानी और रेत की बाल्टी भी रखी जा सकती है, लेकिन बिजली की आग पर पानी न डालें
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रास्ता खुला रखें
दुकान के दरवाजे और बाहर निकलने का रास्ता सामान से न रोकें। भीड़ के समय भी ग्राहकों के बाहर निकलने की जगह खाली रहनी चाहिए।
आग लगने पर क्या करें
- तुरंत फायर ब्रिगेड को 101 या आपात नंबर 112 पर फोन करें
- सबसे पहले लोगों को बाहर निकालें, सामान बचाने के लिए जान जोखिम में न डालें
- मेन स्विच बंद करें, अगर सुरक्षित हो
- धुआं हो, तो नीचे झुककर बाहर निकलें
दुकान बीमा क्यों
आग, चोरी या दूसरी घटनाओं में नुकसान की भरपाई के लिए बीमा कंपनियां दुकानदार पैकेज पॉलिसी देती हैं।
- इसमें दुकान की इमारत, फर्नीचर, सामान यानी स्टॉक और नकदी के लिए कवर हो सकता है
- आग, बिजली गिरने, दंगा, बाढ़ और चोरी जैसे जोखिम पॉलिसी के अनुसार कवर होते हैं
- त्योहार में स्टॉक बढ़ता है, इसलिए बीमित राशि स्टॉक के असली मूल्य के हिसाब से हो
- कम बीमित राशि होने पर क्लेम भी उसी अनुपात में कम मिल सकता है
पॉलिसी लेने से पहले शर्तें, अपवाद और क्लेम की प्रक्रिया पढ़ें। बीमा से जुड़ी शिकायत के लिए IRDAI का बीमा भरोसा पोर्टल है।
क्लेम के लिए जरूरी
- घटना की सूचना तुरंत बीमा कंपनी को दें
- आग की घटना में फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट और जरूरत हो तो पुलिस रिपोर्ट लें
- स्टॉक का रजिस्टर, खरीद के बिल और नुकसान की तस्वीरें रखें
- सर्वेयर के आने तक सामान न हटाएं, जब तक जरूरी न हो
क्या किराये की दुकान का बीमा हो सकता है?
हां, किरायेदार अपने सामान, फर्नीचर और स्टॉक का बीमा करा सकता है। इमारत का बीमा आमतौर पर मालिक कराता है।
स्रोत: भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





