दिवाली का सीजन किराना, कपड़ा, मिठाई, बर्तन और इलेक्ट्रॉनिक्स की छोटी दुकानों के लिए सबसे व्यस्त समय होता है। इस समय अच्छी बिक्री की उम्मीद में दुकानदार ज्यादा माल भर लेते हैं और जान-पहचान के ग्राहकों को उधार भी देते हैं। अगर हिसाब ठीक न रहे, तो त्योहार के बाद बचा हुआ माल और न लौटा उधार परेशानी बन जाता है। जानिए दिवाली पर दुकान का स्टॉक और उधार कैसे संभालें।
स्टॉक का अंदाजा कैसे लगाएं
- पिछले साल दिवाली पर कौन सा सामान कितना बिका, बही या बिल से देखें
- इस साल के ग्राहकों के रुझान और आसपास नई दुकानों का ध्यान रखें
- जो सामान हर साल बिकता है, उसका स्टॉक भरोसे से रखें
- नया या महंगा सामान कम मात्रा में मंगवाएं और बिक्री देखकर दोबारा मंगवाएं

जल्दी खराब होने वाला माल
मिठाई, दूध से बने उत्पाद, फूल और फल जल्दी खराब होते हैं। इनका ऑर्डर रोज की बिक्री के अंदाजे से करें। खाने-पीने के सामान पर पैकिंग और एक्सपायरी तारीख जरूर देखें। खाद्य कारोबार के लिए FSSAI पंजीकरण या लाइसेंस जरूरी है।
सप्लायर से उधार पर माल
कई दुकानदार थोक विक्रेता से उधार पर माल लेते हैं। ऐसे में:
- भुगतान की तारीख और शर्तें लिखित में तय करें
- न बिकने वाले माल की वापसी की शर्त पहले से पूछ लें
- अपनी क्षमता से ज्यादा उधार का माल न लें
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ग्राहकों को उधार
उधार देना ग्राहक का भरोसा बनाता है, लेकिन बेहिसाब उधार नुकसान करता है।
- हर उधार की तारीख, रकम और ग्राहक का नाम लिखें
- ग्राहक से उसी समय रकम की पुष्टि करवाएं, जैसे बही पर दस्तखत या मोबाइल पर संदेश
- एक ग्राहक के लिए उधार की सीमा तय रखें
- पुराना उधार बाकी हो, तो नया उधार सोच-समझकर दें
- त्योहार के बाद उधार वसूली की एक तारीख तय करें
कई डिजिटल बही-खाता ऐप भी उधार का हिसाब रखने में मदद करते हैं।
नकदी और डिजिटल भुगतान
- दिन के अंत में नकद और UPI से मिली रकम का अलग-अलग हिसाब मिलाएं
- ज्यादा नकदी दुकान पर न रखें, समय-समय पर बैंक में जमा करें
- UPI भुगतान का पैसा खाते में आया या नहीं, साउंड बॉक्स या बैंक ऐप से जांचें
- ग्राहक के मोबाइल पर दिखाया गया भुगतान का स्क्रीनशॉट पक्का सबूत नहीं है
- नकली नोट से बचने के लिए बड़े नोटों के सुरक्षा फीचर देखें
बिल और रिकॉर्ड
GST में पंजीकृत दुकानदार बिक्री का बिल और रिकॉर्ड नियम के अनुसार रखें। छोटे दुकानदार भी खरीद-बिक्री का रोज का हिसाब रखें, इससे लोन लेने और सरकारी योजनाओं में मदद मिलती है। उद्यम पंजीकरण मुफ्त है और MSME से जुड़ी कई योजनाओं के लिए उपयोगी है।
त्योहार के बाद बचे माल का क्या करें?
जो माल त्योहार के बाद भी बिक सकता है, उसे सामान्य स्टॉक में रखें। मौसमी सामान पर थोड़ी छूट देकर बेचना, उसे अगले साल तक रखने से बेहतर हो सकता है।
स्रोत: उद्यम पंजीकरण पोर्टल, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





