दिवाली पर मान्यता है कि मां लक्ष्मी साफ और रोशन घर में प्रवेश करती हैं। इसलिए धनतेरस से ही घर के मुख्य द्वार को खास तौर पर सजाया जाता है। मुख्य दरवाजा घर की पहली छवि भी होता है, जिसे मेहमान सबसे पहले देखते हैं। जानिए मुख्य द्वार की सजावट के आसान और पारंपरिक तरीके।
पहले साफ-सफाई
सजावट से पहले दरवाजा, चौखट, दहलीज और आसपास की दीवारें अच्छी तरह साफ करें। दरवाजे के हैंडल और नाम की प्लेट चमकाएं। पुराने स्टिकर और सूखे तोरण हटा दें। जरूरत हो तो दरवाजे की हल्की पॉलिश या पेंट भी करा सकते हैं।

तोरण और बंदनवार
दरवाजे के ऊपर तोरण लगाना सबसे पुरानी परंपरा है।
- आम या अशोक के ताजे पत्तों का तोरण, जिसे शुभ माना जाता है
- गेंदे के फूलों की लड़ी, जो पत्तों के साथ अच्छी लगती है
- कपड़े, मोती या लकड़ी का बंदनवार, जो सालों तक चल सकता है
- कागज या जूट से घर पर बने तोरण
ताजे पत्तों और फूलों का तोरण कुछ दिनों में सूख जाता है, जिसे बाद में खाद में डाला जा सकता है।
शुभ-लाभ और स्वास्तिक
कई घरों में दरवाजे के दोनों ओर शुभ-लाभ लिखने और ऊपर या बीच में स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। इन्हें रोली, सिंदूर या हल्दी से बनाया जाता है। बाजार में तैयार स्टिकर भी मिलते हैं। कई परिवार दरवाजे पर ओम या श्री गणेश का चिह्न भी बनाते हैं।
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दरवाजे पर रंगोली
दहलीज के बाहर रंगोली बनाना दिवाली की खास पहचान है। छोटी जगह हो, तो दरवाजे के दोनों ओर छोटी रंगोली बनाएं। फूलों की पंखुड़ियों, चावल के आटे या रंगों से रंगोली बनाई जा सकती है। कई परिवार दरवाजे से अंदर की ओर लक्ष्मी के पदचिह्न बनाते हैं, जो मां लक्ष्मी के घर में प्रवेश का प्रतीक माने जाते हैं।
रोशनी की व्यवस्था
- दरवाजे के ऊपर या चारों ओर LED झालर
- दहलीज के दोनों ओर दीये या दीयों का स्टैंड
- दरवाजे के पास टंगी लालटेन या कंदील
- सीढ़ियों पर दीये, लेकिन किनारों पर ताकि किसी के पैर में न आएं
छोटी जगह और फ्लैट के लिए
फ्लैट में दरवाजे के बाहर की जगह साझा होती है। ऐसे में सजावट दरवाजे तक सीमित रखें और गलियारे में रास्ता न रोकें। दरवाजे पर लटकने वाला तोरण, छोटी रंगोली और दो दीये काफी हैं। सोसायटी के नियम हों, तो उनका ध्यान रखें।
सुरक्षा का ध्यान
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी त्योहार में आग से सावधानी की सलाह देता है। मुख्य द्वार पर इन बातों का ध्यान रखें:
- दीये दरवाजे के पर्दे, तोरण और रास्ते से दूर रखें
- साड़ी या दुपट्टे का पल्लू दीयों से दूर रहे
- आने-जाने के रास्ते में दीये न रखें
- बिजली की झालर के तार दरवाजे में न दबें
- रात को सोने से पहले दरवाजे के दीये बुझा दें
तोरण कब तक लगाकर रखें?
परंपरा में ताजे पत्तों का तोरण आमतौर पर त्योहार के दिनों तक लगाया जाता है। सूखने के बाद इसे बदल दें। कपड़े या मोती का बंदनवार लंबे समय तक लगा रह सकता है।
स्रोत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





