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मुख्य द्वार की सजावट: धनतेरस और दिवाली पर तोरण, रंगोली, शुभ-लाभ और रोशनी से दरवाजे को कैसे सजाएं

धनतेरस से दिवाली तक घर का मुख्य दरवाजा सबसे पहले सजाया जाता है। जानिए पत्तों और फूलों का तोरण, शुभ-लाभ और स्वास्तिक, दरवाजे की रंगोली, लक्ष्मी के पदचिह्न और सुरक्षित रोशनी के आइडिया।

धनतेरस और दिवाली पर मुख्य द्वार की सजावट का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिवाली पर मान्यता है कि मां लक्ष्मी साफ और रोशन घर में प्रवेश करती हैं।
  • ताजे पत्तों और फूलों का तोरण कुछ दिनों में सूख जाता है, जिसे बाद में खाद में डाला जा सकता है।
  • दहलीज के बाहर रंगोली बनाना दिवाली की खास पहचान है। छोटी जगह हो, तो दरवाजे के दोनों ओर छोटी रंगोली बनाएं।
  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी त्योहार में आग से सावधानी की सलाह देता है।

दिवाली पर मान्यता है कि मां लक्ष्मी साफ और रोशन घर में प्रवेश करती हैं। इसलिए धनतेरस से ही घर के मुख्य द्वार को खास तौर पर सजाया जाता है। मुख्य दरवाजा घर की पहली छवि भी होता है, जिसे मेहमान सबसे पहले देखते हैं। जानिए मुख्य द्वार की सजावट के आसान और पारंपरिक तरीके।

पहले साफ-सफाई

सजावट से पहले दरवाजा, चौखट, दहलीज और आसपास की दीवारें अच्छी तरह साफ करें। दरवाजे के हैंडल और नाम की प्लेट चमकाएं। पुराने स्टिकर और सूखे तोरण हटा दें। जरूरत हो तो दरवाजे की हल्की पॉलिश या पेंट भी करा सकते हैं।

मुख्य बातें: धनतेरस और दिवाली पर मुख्य द्वार की सजावट का ग्राफिक
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तोरण और बंदनवार

दरवाजे के ऊपर तोरण लगाना सबसे पुरानी परंपरा है।

  • आम या अशोक के ताजे पत्तों का तोरण, जिसे शुभ माना जाता है
  • गेंदे के फूलों की लड़ी, जो पत्तों के साथ अच्छी लगती है
  • कपड़े, मोती या लकड़ी का बंदनवार, जो सालों तक चल सकता है
  • कागज या जूट से घर पर बने तोरण

ताजे पत्तों और फूलों का तोरण कुछ दिनों में सूख जाता है, जिसे बाद में खाद में डाला जा सकता है।

शुभ-लाभ और स्वास्तिक

कई घरों में दरवाजे के दोनों ओर शुभ-लाभ लिखने और ऊपर या बीच में स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। इन्हें रोली, सिंदूर या हल्दी से बनाया जाता है। बाजार में तैयार स्टिकर भी मिलते हैं। कई परिवार दरवाजे पर ओम या श्री गणेश का चिह्न भी बनाते हैं।

यह भी पढ़ें: दीपावली पर रंगोली के शुभ चिह्न: स्वस्तिक, कमल, लक्ष्मी के चरण और ओम का अर्थ | बालकनी की दिवाली सजावट: छोटी जगह में लाइट, दीये, लालटेन और पौधों से सजाने के आसान आइडिया

दरवाजे पर रंगोली

दहलीज के बाहर रंगोली बनाना दिवाली की खास पहचान है। छोटी जगह हो, तो दरवाजे के दोनों ओर छोटी रंगोली बनाएं। फूलों की पंखुड़ियों, चावल के आटे या रंगों से रंगोली बनाई जा सकती है। कई परिवार दरवाजे से अंदर की ओर लक्ष्मी के पदचिह्न बनाते हैं, जो मां लक्ष्मी के घर में प्रवेश का प्रतीक माने जाते हैं।

रोशनी की व्यवस्था

  • दरवाजे के ऊपर या चारों ओर LED झालर
  • दहलीज के दोनों ओर दीये या दीयों का स्टैंड
  • दरवाजे के पास टंगी लालटेन या कंदील
  • सीढ़ियों पर दीये, लेकिन किनारों पर ताकि किसी के पैर में न आएं

छोटी जगह और फ्लैट के लिए

फ्लैट में दरवाजे के बाहर की जगह साझा होती है। ऐसे में सजावट दरवाजे तक सीमित रखें और गलियारे में रास्ता न रोकें। दरवाजे पर लटकने वाला तोरण, छोटी रंगोली और दो दीये काफी हैं। सोसायटी के नियम हों, तो उनका ध्यान रखें।

सुरक्षा का ध्यान

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी त्योहार में आग से सावधानी की सलाह देता है। मुख्य द्वार पर इन बातों का ध्यान रखें:

  • दीये दरवाजे के पर्दे, तोरण और रास्ते से दूर रखें
  • साड़ी या दुपट्टे का पल्लू दीयों से दूर रहे
  • आने-जाने के रास्ते में दीये न रखें
  • बिजली की झालर के तार दरवाजे में न दबें
  • रात को सोने से पहले दरवाजे के दीये बुझा दें

तोरण कब तक लगाकर रखें?

परंपरा में ताजे पत्तों का तोरण आमतौर पर त्योहार के दिनों तक लगाया जाता है। सूखने के बाद इसे बदल दें। कपड़े या मोती का बंदनवार लंबे समय तक लगा रह सकता है।

स्रोत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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