शहरों के फ्लैटों में रहने वाले परिवारों के लिए बालकनी ही दिवाली की रोशनी का सबसे बड़ा कोना होती है। यही वह जगह है जो बाहर से दिखती है और जहां शाम को परिवार बैठकर दीये जलाता है। छोटी बालकनी को भी थोड़ी योजना से बहुत सुंदर सजाया जा सकता है। जानिए बालकनी की दिवाली सजावट के आसान आइडिया।
पहले जगह तैयार करें
सजावट से पहले बालकनी को खाली और साफ करें। पुराने डिब्बे, टूटे गमले और कबाड़ हटा दें। रेलिंग और फर्श को धोकर सुखाएं। जो चीजें हटाई नहीं जा सकतीं, जैसे कपड़े सुखाने का स्टैंड, उन्हें एक कोने में ढक दें।

लाइट लगाने के आइडिया
- रेलिंग के साथ सीधी लाइन में LED झालर लगाएं, जो बाहर से साफ दिखती है
- छत से नीचे की ओर पर्दे जैसी लटकती लाइट, जिसे कर्टेन लाइट कहते हैं
- गमलों और पौधों के चारों ओर बैटरी वाली छोटी फेयरी लाइट
- एक या दो रंग की लाइट चुनें, बहुत सारे रंग भीड़ जैसे लगते हैं
- बालकनी बाहर खुली है तो वाटरप्रूफ या आउटडोर लाइट लें
कंदील और लालटेन
दिवाली पर बालकनी में ऊपर टंगी कंदील पुरानी परंपरा का हिस्सा है। कागज, कपड़े, बांस या धातु की कंदील बाजार में मिलती हैं। कागज या कपड़े की कंदील में केवल LED बल्ब लगाएं, खुली लौ नहीं। छोटी धातु या कांच की लालटेन को फर्श या स्टूल पर रखकर भी अच्छा असर आता है।
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दीयों की सजावट
- दीयों को सीधे रेलिंग की पतली किनारी पर रखने की जगह मजबूत ट्रे या स्टैंड पर रखें
- पानी भरे बड़े बर्तन में तैरते दीये और फूल
- सीढ़ीनुमा स्टैंड पर अलग-अलग ऊंचाई पर दीये
- दीयों के पास रंगोली या फूलों की पंखुड़ियां
पौधों और फूलों से सजावट
बालकनी में रखे गमलों को ही सजावट का हिस्सा बनाएं। गमलों पर रंग या गोटा लगाएं। गेंदे के फूलों की माला रेलिंग पर बांधें। तुलसी के गमले के पास दीया जलाएं, जो कार्तिक मास की परंपरा से भी जुड़ा है। छोटे पौधे, जैसे गुलदाउदी या गेंदा, इस मौसम में आसानी से मिल जाते हैं।
बैठने का कोना
अगर जगह हो, तो फर्श पर दरी या कुशन बिछाकर छोटा बैठने का कोना बनाएं। शाम को परिवार के साथ यहां चाय या मिठाई का आनंद लिया जा सकता है।
सुरक्षा के जरूरी नियम
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी त्योहार में आग से बचाव की सलाह देता है। बालकनी में इनका खास ध्यान रखें:
- सूखे कपड़े, पर्दे और कागज जलते दीयों से दूर रखें
- दीये ऐसी जगह न रखें, जहां से वे नीचे गिर सकें
- पटाखों की चिंगारी आने की आशंका हो, तो बालकनी में ज्वलनशील सामान न रखें
- एक्सटेंशन बोर्ड को पानी से दूर और ढककर रखें
- रात को सोने से पहले लाइट और दीये बुझा दें
- पास में पानी की बाल्टी रखें
बालकनी में दीये कितनी देर जलाएं?
दीये शाम से कुछ घंटे तक जलाना काफी है। जब घर में कोई देखरेख करने वाला न हो, तब दीये न जलाएं या बुझा दें।
स्रोत: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA): अग्नि सुरक्षा। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





