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दिवाली लाइट और बिजली बिल: LED झालर से कैसे बचाएं खर्च, स्टार रेटिंग और सुरक्षा की जरूरी बातें

दिवाली पर कई दिन तक जलती झालरें बिजली का बिल बढ़ा सकती हैं। जानिए खपत का हिसाब कैसे लगाएं, LED और पुराने बल्ब का फर्क, टाइमर और ISI मार्क की अहमियत।

दिवाली लाइट और बिजली बिल बचाने की जानकारी का ग्राफिक
ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • दिवाली पर घर को रोशनी से सजाना परंपरा है। कई घरों में धनतेरस से भाई दूज तक, यानी करीब एक हफ्ते तक, हर शाम झालरें जलती हैं।
  • आपके राज्य में प्रति यूनिट दर क्या है, यह अपने बिजली बिल या बिजली कंपनी की वेबसाइट पर देखें।
  • सस्ती और बिना मानक वाली लाइटों के तार पतले होते हैं, जो गर्म होकर पिघल सकते हैं।
  • दिवाली के बाद आने वाले बिल की तुलना पिछले महीनों से करें। अगर खपत अचानक बहुत ज्यादा दिखे, तो मीटर रीडिंग और वायरिंग की जांच कराएं।

दिवाली पर घर को रोशनी से सजाना परंपरा है। कई घरों में धनतेरस से भाई दूज तक, यानी करीब एक हफ्ते तक, हर शाम झालरें जलती हैं। अगर लाइटें ज्यादा वाट की हों और रात भर जलती रहें, तो अगले बिल में फर्क दिख सकता है। थोड़ी समझदारी से रोशनी भी भरपूर रहेगी और खर्च भी काबू में रहेगा। जानिए दिवाली लाइट और बिजली बिल से जुड़ी जरूरी बातें।

बिजली की खपत का आसान हिसाब

बिजली बिल यूनिट में बनता है। एक यूनिट का मतलब है 1000 वाट का उपकरण एक घंटे चलना। हिसाब लगाने का तरीका यह है:

  • लाइट का कुल वाट x रोज जलने के घंटे x दिन, फिर 1000 से भाग दें
  • उदाहरण के लिए 100 वाट की कुल झालरें रोज 6 घंटे और 7 दिन जलें, तो करीब 4.2 यूनिट बिजली खर्च होगी
  • अगर कुल वाट 500 हो, तो यही खपत पांच गुना हो जाएगी

आपके राज्य में प्रति यूनिट दर क्या है, यह अपने बिजली बिल या बिजली कंपनी की वेबसाइट पर देखें।

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LED झालर क्यों बेहतर है

ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के अनुसार LED बल्ब पुराने बल्बों की तुलना में काफी कम बिजली में उतनी ही रोशनी देते हैं। LED झालर कम गर्म होती है, इसलिए आग का खतरा भी कम रहता है। पुराने छोटे बल्बों वाली झालरें ज्यादा गर्म होती हैं और ज्यादा बिजली लेती हैं। झालर खरीदते समय पैकेट पर लिखा वाट जरूर देखें।

खर्च घटाने के आसान तरीके

  • टाइमर या स्मार्ट प्लग लगाएं, ताकि लाइट तय समय पर बंद हो जाए
  • रात को सोने से पहले सजावटी लाइटें बंद करें
  • सिर्फ जरूरी जगह पर लाइट लगाएं, हर दीवार को ढकने की जरूरत नहीं
  • मिट्टी के दीये और लाइट का मेल करें
  • सोलर लाइट बालकनी या बगीचे के लिए अच्छा विकल्प है

यह भी पढ़ें: दीया सजावट के आसान आइडिया: मिट्टी के दीये रंगने, सजाने और सुरक्षित तरीके से जलाने के टिप्स | फेस्टिव सीजन बजट कैसे बनाएं: दशहरा से दिवाली तक खर्च की योजना, उपहार, शॉपिंग और कर्ज से बचाव

सुरक्षा सबसे पहले

सस्ती और बिना मानक वाली लाइटों के तार पतले होते हैं, जो गर्म होकर पिघल सकते हैं। ISI मार्क वाली लाइटें और एक्सटेंशन बोर्ड ही लें। एक ही सॉकेट पर कई झालरें न जोड़ें। बालकनी या बाहर लगी लाइट को बारिश या पानी से बचाएं। पर्दों और कपड़ों के बहुत पास गर्म बल्ब न लगाएं। बच्चों की पहुंच से तार दूर रखें।

पुरानी झालर दोबारा इस्तेमाल करने से पहले

पिछले साल की झालर निकालें तो पहले उसकी जांच करें। कटे या छिले तार, ढीले प्लग और जले हुए बल्ब वाली झालर इस्तेमाल न करें। झालर को पहले कुछ देर जलाकर देखें कि वह गर्म तो नहीं हो रही।

बिल पर नजर रखें

दिवाली के बाद आने वाले बिल की तुलना पिछले महीनों से करें। अगर खपत अचानक बहुत ज्यादा दिखे, तो मीटर रीडिंग और वायरिंग की जांच कराएं। कई बिजली कंपनियां ऐप पर रोज की खपत भी दिखाती हैं।

कितनी देर लाइट जलाना ठीक है?

आमतौर पर शाम से देर रात तक, यानी चार से छह घंटे लाइट जलाना काफी होता है। रात भर लाइट जलाने से बिजली भी ज्यादा खर्च होती है और देखरेख न होने से जोखिम भी बढ़ता है।

स्रोत: ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE), विद्युत मंत्रालय। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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