दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा होती है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा याद की जाती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और राजस्थान के कई घरों में इस दिन आंगन में गोबर से गोवर्धन यानी गिरिराज की आकृति बनाकर पूजा की जाती है। इस बार तारीख को लेकर दो जानकारियां हैं। केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूची में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर को दिखाई गई है, जबकि द्रिक पंचांग नई दिल्ली के लिए 10 नवंबर 2026 बताता है। अपने क्षेत्र के पंचांग या पुरोहित से तारीख की पुष्टि करें।
गोबर क्यों
गाय और गोवंश की रक्षा गोवर्धन कथा का केंद्र है। गाय के गोबर को ग्रामीण परंपरा में पवित्र और उपयोगी माना जाता रहा है, इसलिए उसी से पर्वत की आकृति बनाई जाती है। यह खेती और पशुधन के प्रति कृतज्ञता का भी प्रतीक है।

आकृति कैसे बनाएं
1. आंगन या घर के बाहर साफ, समतल जगह चुनें और उसे लीप लें
2. ताजा गोबर लें, उसमें थोड़ी मिट्टी मिलाने से आकार टिकता है
3. लेटे हुए पुरुष के आकार में गिरिराज जी बनाएं, कई जगह इसे कृष्ण का रूप माना जाता है
4. आसपास गाय, बछड़े, ग्वाले और पेड़ों की छोटी आकृतियां बनाई जा सकती हैं
5. नाभि की जगह एक छोटा गड्ढा बनाया जाता है, जिसमें पूजा के समय दूध, दही या शहद रखा जाता है
सजावट
- फूल, खील, रुई और सींकों से सजावट
- आकृति के चारों ओर दीये
- कई परिवार अन्नकूट का भोग पास में रखते हैं
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पूजा की तैयारी
- रोली, अक्षत, फूल, धूप-दीप
- दूध, दही, बताशे और खील
- अन्नकूट या घर में बने पकवानों का भोग
- गाय की पूजा के लिए गुड़ और हरा चारा
परिक्रमा
पूजा के बाद परिवार के लोग गोवर्धन की आकृति की परिक्रमा करते हैं। कई जगह हाथ में जल का लोटा लेकर धार गिराते हुए और जौ बोते हुए परिक्रमा की जाती है। यह मथुरा की गोवर्धन परिक्रमा की प्रतीकात्मक परंपरा है।
शहरों में क्या करें
फ्लैट में रहने वालों को गोबर मिलना मुश्किल होता है। ऐसे में मिट्टी, आटे या घर की सामग्री से छोटी आकृति बनाई जा सकती है, या कृष्ण की तस्वीर के सामने अन्नकूट का भोग लगाकर पूजा की जा सकती है। भाव ही मुख्य है।
पूजा के बाद
आकृति को कुछ समय बाद खेत, बगीचे या गमले की मिट्टी में मिला दें। प्लास्टिक की सजावट इस्तेमाल न करें, ताकि यह आसानी से मिट्टी में मिल सके।
गोवर्धन पूजा का मुहूर्त कहां देखें?
मुहूर्त शहर के हिसाब से बदलता है। अपने शहर के लिए द्रिक पंचांग या स्थानीय पंचांग देखें।
बच्चों को कथा सुनाएं
पूजा के समय बच्चों को गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाएं, कि कैसे श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों और गायों को बारिश से बचाया। इससे वे परंपरा का अर्थ समझते हैं और आकृति बनाने में भी उत्साह से शामिल होते हैं। गोबर छूने के बाद हाथ अच्छी तरह साबुन से धोना न भूलें।
स्रोत: द्रिक पंचांग, भारत सरकार, छुट्टियों की सूची 2026। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





