मथुरा जिले का गोवर्धन कस्बा उस गिरिराज पर्वत के लिए जाना जाता है, जिसे कथा के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी उंगली पर उठाया था। यहां पर्वत के चारों ओर परिक्रमा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। गोवर्धन पूजा के समय यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। इस बार गोवर्धन पूजा सरकारी अवकाश सूची में 9 नवंबर और द्रिक पंचांग के अनुसार 10 नवंबर को है। जानिए गोवर्धन परिक्रमा से जुड़ी जरूरी बातें।
परिक्रमा का मार्ग
गोवर्धन परिक्रमा करीब 21 किलोमीटर की मानी जाती है, जिसे सात कोस की परिक्रमा भी कहा जाता है। परिक्रमा दो हिस्सों में होती है, बड़ी परिक्रमा और छोटी परिक्रमा। ज्यादातर श्रद्धालु मानसी गंगा के पास दानघाटी मंदिर से परिक्रमा शुरू करते हैं और वहीं पूरी करते हैं। पूरी परिक्रमा में आमतौर पर पांच से सात घंटे लगते हैं, जो चलने की गति पर निर्भर है।

प्रमुख स्थल
- दानघाटी मंदिर, जहां से परिक्रमा की शुरुआत होती है
- मानसी गंगा, जिसे पवित्र सरोवर माना जाता है
- राधा कुंड और श्याम कुंड
- कुसुम सरोवर
- पूंछरी का लौठा
- जतीपुरा, जहां गिरिराज जी का मुखारविंद है
परिक्रमा के नियम और परंपराएं
- परिक्रमा हमेशा पर्वत को दाहिनी ओर रखकर की जाती है
- बहुत से भक्त नंगे पैर परिक्रमा करते हैं, लेकिन यह सबके लिए अनिवार्य नहीं है
- कुछ भक्त दंडवत परिक्रमा करते हैं, जिसमें हर कदम पर लेटकर प्रणाम किया जाता है और इसमें कई दिन लगते हैं
- परिक्रमा के दौरान गिरिराज पर्वत के पत्थर उठाकर घर ले जाना ठीक नहीं माना जाता
- रास्ते में कूड़ा न फैलाएं
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यात्रा की तैयारी
- आरामदायक कपड़े पहनें और जरूरत हो तो नरम जूते या चप्पल रखें
- पानी की बोतल, थोड़ा हल्का खाना और जरूरी दवाएं साथ रखें
- बुजुर्ग और बच्चों के साथ हों, तो छोटी परिक्रमा या ई-रिक्शा से परिक्रमा का विकल्प देखें
- सुबह जल्दी शुरुआत करें, ताकि धूप और भीड़ से कुछ बचाव हो
- मोबाइल चार्ज रखें और परिवार के साथ मिलने की एक जगह तय करें
भीड़ और प्रशासन की व्यवस्था
गोवर्धन पूजा, गुरु पूर्णिमा और दूसरे बड़े पर्वों पर लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे समय में जिला प्रशासन यातायात में बदलाव और पार्किंग की व्यवस्था करता है। जाने से पहले मथुरा जिला प्रशासन और पुलिस की सूचना देख लें।
सेहत का ध्यान
लंबी परिक्रमा में थकान, पैरों में छाले और पानी की कमी हो सकती है। दिल, घुटनों या सांस की बीमारी वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही लंबी परिक्रमा करें। तबीयत बिगड़े, तो रास्ते में बने स्वास्थ्य शिविर या 108 पर संपर्क करें।
क्या परिक्रमा रात में की जा सकती है?
हां, कई श्रद्धालु रात में भी परिक्रमा करते हैं, खासकर पूर्णिमा पर। लेकिन रात में समूह के साथ ही जाएं और सुरक्षा का ध्यान रखें।
परिक्रमा के बाद क्या करें?
परिक्रमा पूरी होने पर कई श्रद्धालु दानघाटी या जतीपुरा में गिरिराज जी को दूध चढ़ाते हैं और दर्शन करते हैं। लौटते समय भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें।
स्रोत: उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश सरकार। जानकारी अक्टूबर 2026 तक की।





