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BREAKING: सात भारतीय हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा का परीक्षण शुरू

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सात प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर ई-पासपोर्ट धारक अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा का परीक्षण शुरू किया है।

BREAKING: सात भारतीय हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा का परीक्षण शुरू
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर भारत के सात प्रमुख हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा प्रणाली का परीक्षण चरण शुरू कर दिया है।
  • सात प्रमुख हवाई अड्डों पर इन परीक्षणों की शुरुआत भारत के विमानन क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
  • डिजी यात्रा सुविधा को हवाई अड्डे के भीतर कई महत्वपूर्ण टचपॉइंट्स पर उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए परिचालन दिशानिर्देश

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर भारत के सात प्रमुख हवाई अड्डों पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए डिजी यात्रा प्रणाली का परीक्षण चरण शुरू कर दिया है। यह नई पहल उन भारतीय नागरिकों के लिए डिज़ाइन की गई है जिनके पास ई-पासपोर्ट है और जो एयर इंडिया और इंडिगो द्वारा संचालित चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यात्रा कर रहे हैं। चेहरे की पहचान तकनीक का उपयोग करके, इस प्रणाली का उद्देश्य हवाई अड्डे पर विभिन्न चौकियों के माध्यम से यात्रियों की संपर्क रहित और सुगम आवाजाही प्रदान करना है। वर्तमान में दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोचीन, मुंबई, चेन्नई और अमृतसर के हवाई अड्डों पर ये परीक्षण किए जा रहे हैं। नवंबर से दिसंबर तक चलने वाले इस परीक्षण काल के परिणाम और फीडबैक 2027 में तकनीक के अधिक व्यापक विस्तार की योजना बनाने में सहायक होंगे।

डिजी यात्रा परीक्षण विवरण
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

प्रमुख विमानन केंद्रों पर कार्यान्वयन

सात प्रमुख हवाई अड्डों पर इन परीक्षणों की शुरुआत भारत के विमानन क्षेत्र के डिजिटल परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस चरण के लिए चुने गए हवाई अड्डों में देश के कुछ सबसे व्यस्त केंद्र शामिल हैं, जैसे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु, साथ ही हैदराबाद, कोचीन, चेन्नई और अमृतसर। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय संदर्भ में डिजी यात्रा बुनियादी ढांचे की मजबूती के परीक्षण के लिए ये परीक्षण आवश्यक हैं। ई-पासपोर्ट वाले भारतीय नागरिकों पर ध्यान केंद्रित करके, मंत्रालय यह सुनिश्चित कर रहा है कि प्रणाली आधुनिक यात्रा दस्तावेजों में अंतर्निहित नवीनतम सुरक्षा सुविधाओं के साथ मिलकर काम करे। यह चरण केवल तकनीक के बारे में नहीं है, बल्कि उच्च-यातायात वाले अंतरराष्ट्रीय टर्मिनलों में यात्री व्यवहार और प्रणाली की दक्षता को समझने के बारे में भी है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए है और इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

तकनीकी आवश्यकताएं और डिजी यात्रा ऐप

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए इन परीक्षणों में भाग लेने हेतु डिजी यात्रा मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग करके एक विशिष्ट तकनीकी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक है। पहले चरण में ई-पासपोर्ट आधारित सत्यापन योग्य क्रेडेंशियल बनाना शामिल है, जिसे अक्सर वीसी कहा जाता है। इस प्रक्रिया के लिए यात्री को अपने स्मार्टफोन के कैमरे का उपयोग करके अपने ई-पासपोर्ट के मशीन रीडेबल ज़ोन या एमआरजेड को स्कैन करना होता है। इसके बाद, एप्लिकेशन पासपोर्ट के एम्बेडेड चिप में संग्रहीत डेटा को पढ़ने के लिए एक संगत स्मार्टफोन की नियर फील्ड कम्युनिकेशन या एनएफसी सुविधा का उपयोग करता है। पहचान सत्यापन को अंतिम रूप देने के लिए, यात्री को ऐप के माध्यम से एक सेल्फी लेनी होगी। ये सभी क्रेडेंशियल और सत्यापित विवरण यात्री के डिवाइस पर उनके डिजी यात्रा वॉलेट में स्थानीय रूप से संग्रहीत किए जाते हैं, जिससे डेटा गोपनीयता और यात्रा के दौरान त्वरित पहुंच सुनिश्चित होती है। यह डिजिटल वॉलेट यात्रियों को अपनी पहचान सुरक्षित रूप से प्रबंधित करने की अनुमति देता है।

चेकप्वाइंट और यात्री प्रवाह की प्रक्रिया

डिजी यात्रा सुविधा को हवाई अड्डे के भीतर कई महत्वपूर्ण टचपॉइंट्स पर उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इनमें टर्मिनल प्रवेश बिंदु, सुरक्षा होल्ड क्षेत्र और बोर्डिंग गेट शामिल हैं, बशर्ते कि इन स्थानों पर आवश्यक तकनीकी बुनियादी ढांचा उपलब्ध हो। चेहरे की पहचान का उपयोग करके, यात्री बार-बार मैन्युअल दस्तावेज़ सत्यापन की आवश्यकता के बिना इन क्षेत्रों के माध्यम से आगे बढ़ सकते हैं, जिससे प्रक्रिया काफी तेज़ हो जाती है। हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा मौजूदा यात्रा प्रक्रियाओं के पूरक के रूप में है, न कि उनके प्रतिस्थापन के रूप में। यात्रियों को अभी भी अपने पासपोर्ट और वीजा सहित अपने सभी भौतिक यात्रा दस्तावेजों को साथ रखना आवश्यक है, और मानक नियमों के अनुसार सभी अनिवार्य एयरलाइन दस्तावेज़ जांच और आव्रजन औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। यह तकनीक केवल हवाई अड्डे के भीतर आवाजाही को सुव्यवस्थित करती है, लेकिन कानूनी यात्रा आवश्यकताओं को नहीं बदलती है।

भविष्य की संभावनाएं और घरेलू सफलता

नवंबर से दिसंबर 2026 तक चलने वाले इस प्रारंभिक परीक्षण काल के दौरान प्राप्त फीडबैक का उपयोग 2027 में अपेक्षित व्यापक रोलआउट के लिए प्रणाली को परिष्कृत करने के लिए किया जाएगा। डिजी यात्रा प्रणाली ने घरेलू क्षेत्र में पहले ही अपनी प्रभावशीलता साबित कर दी है, जहां इसने 39 विभिन्न हवाई अड्डों पर 110 मिलियन से अधिक यात्राओं की सुविधा प्रदान की है। सरकार की योजना 2027 तक इस घरेलू कवरेज को अतिरिक्त 25 हवाई अड्डों तक विस्तारित करने की है। अंतरराष्ट्रीय यात्रा तक इस तकनीक का विस्तार एक स्वाभाविक प्रगति के रूप में देखा जा रहा है जो अंततः अधिक एयरलाइनों और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों की एक विस्तृत श्रृंखला को कवर करेगा, जिससे भारत डिजिटल विमानन समाधानों में एक अग्रणी देश बन जाएगा। घरेलू सफलता ने इस तकनीक के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है।

अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए परिचालन दिशानिर्देश

यात्रियों के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि हालांकि डिजी यात्रा हवाई अड्डे के अनुभव को सुव्यवस्थित करती है, लेकिन यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा की कानूनी आवश्यकताओं को दरकिनार नहीं करती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने दोहराया है कि सभी यात्रियों को आव्रजन प्रक्रियाओं और अन्य लागू यात्रा औपचारिकताओं को पूरा करना जारी रखना चाहिए। इन परीक्षणों के लिए एयर इंडिया और इंडिगो जैसे प्रमुख वाहकों के साथ सहयोग सरकार को विभिन्न एयरलाइन प्रणालियों के साथ प्रणाली के एकीकरण का परीक्षण करने की अनुमति देता है। जैसे-जैसे परीक्षण आगे बढ़ेंगे, मंत्रालय सातों हवाई अड्डों पर प्रदर्शन की निगरानी करेगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चेहरे की पहचान तकनीक सटीक और सुरक्षित बनी रहे। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की एक बड़ी आबादी के लिए प्रणाली उपलब्ध कराने से पहले किसी भी तकनीकी चुनौती का समाधान किया जाए। यात्रियों की प्रतिक्रिया इस प्रणाली के भविष्य के स्वरूप को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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स्रोत: The Hindu

लेखक

Sanjna Gupta

संजना गुप्ता डेमोक्रेटिक भारत लाइव में हिंदी कंटेंट राइटर हैं और मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, देश की खबरों और धर्म-आस्था से जुड़े विषयों पर लिखती हैं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। इससे पहले वे बीबी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड में सोशल मीडिया कंटेंट राइटर रह चुकी हैं और दैनिक भास्कर में इंटर्नशिप कर चुकी हैं।

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