किसी हादसे, झगड़े, चोरी, छेड़छाड़ या आग जैसी आपात स्थिति में सबसे पहले जरूरत होती है तुरंत मदद की। पहले पुलिस, फायर और एंबुलेंस के अलग-अलग नंबर याद रखने पड़ते थे। अब देशभर में आपात सेवाओं के लिए एक ही नंबर 112 है। उत्तर प्रदेश में यह सेवा यूपी 112 के नाम से चलती है और राज्य पुलिस की सबसे अहम जन-सेवाओं में गिनी जाती है।
एक देश, एक आपात नंबर
केंद्रीय गृह मंत्रालय के आपात प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली यानी ERSS के तहत 112 को पूरे देश के लिए एक आपात नंबर बनाया गया है। ERSS की वेबसाइट के अनुसार इस नंबर से पुलिस, फायर, मेडिकल या एंबुलेंस, आपदा, महिलाओं और बच्चों से जुड़ी आपात सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है। हर राज्य में इसके लिए एक नियंत्रण कक्ष होता है जो कॉल लेकर संबंधित टीम भेजता है।

यूपी 112 कैसे काम करता है
यूपी 112 के सिटीजन पोर्टल के अनुसार यह व्यवस्था 24 घंटे, सातों दिन काम करती है।
- नागरिक 112 डायल करता है या ऐप से SOS भेजता है
- नियंत्रण कक्ष में बैठा कम्युनिकेशन ऑफिसर कॉल लेकर जानकारी दर्ज करता है
- सिस्टम GPS और लोकेशन आधारित तकनीक से नजदीकी पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल यानी PRV की पहचान करता है
- PRV को उसकी गाड़ी में लगे मोबाइल डेटा टर्मिनल पर घटना की जानकारी भेजी जाती है
- PRV घटनास्थल पर पहुंचकर मदद करती है और जरूरत हो तो थाने, फायर या एंबुलेंस सेवा को जोड़ती है
- मामला निपटने के बाद कॉल करने वाले से फीडबैक लिया जाता है
पोर्टल के अनुसार कॉल करने वाला PRV की स्थिति ट्रैक भी कर सकता है।
किन हालात में 112 डायल करें
- अपराध हो रहा हो या होने की आशंका हो, जैसे चोरी, लूट, मारपीट
- महिलाओं या बच्चों के साथ छेड़छाड़, उत्पीड़न या खतरा
- सड़क दुर्घटना
- आग लगना
- घरेलू हिंसा की आपात स्थिति
- कोई व्यक्ति गंभीर रूप से घायल या बेहोश हो
- बुजुर्ग अकेले हों और मुसीबत में हों
- लापता बच्चा
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112 इंडिया ऐप और दूसरे तरीके
ERSS के अनुसार मदद मांगने के कई तरीके हैं:
- 112 पर कॉल
- मोबाइल फोन के पैनिक बटन से, यह सुविधा फोन के मॉडल और सेटिंग पर निर्भर है
- 112 इंडिया मोबाइल ऐप से SOS, जिसमें लोकेशन अपने आप नियंत्रण कक्ष तक पहुंचती है
- राज्य के 112 पोर्टल पर वेब अनुरोध
ऐप में अपने भरोसेमंद लोगों के नंबर भी जोड़े जा सकते हैं, ताकि SOS भेजते ही उन्हें भी सूचना मिल जाए। ऐप हमेशा आधिकारिक प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से सरकार के नाम से ही डाउनलोड करें।
कॉल करते समय ये जानकारी दें
- अपना नाम और मोबाइल नंबर
- घटना की सही जगह, आसपास कोई पहचान वाली इमारत, दुकान या मंदिर
- क्या हुआ है और कितने लोग प्रभावित हैं
- कोई घायल है तो उसकी हालत
- आरोपी या संदिग्ध का हुलिया, गाड़ी का नंबर, अगर पता हो
घबराहट में भी शांत रहकर साफ जानकारी दें। फोन तब तक न काटें जब तक ऑपरेटर न कहे।
PRV में कौन होते हैं
पुलिस रिस्पॉन्स व्हीकल में प्रशिक्षित पुलिसकर्मी होते हैं, जिनका काम घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचकर हालात संभालना है। वे झगड़ा शांत कराने, घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद करने, संदिग्ध को पकड़ने और जरूरत हो तो स्थानीय थाने को सूचना देकर आगे की कार्रवाई शुरू कराने का काम करते हैं। गंभीर मामलों में थाने से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया जाता है। PRV लगातार गश्त करती रहती हैं, ताकि किसी भी कॉल पर कम से कम समय में पहुंचा जा सके।
112 और दूसरे हेल्पलाइन नंबर
112 के अलावा कुछ खास हेल्पलाइन भी चलती हैं, जैसे महिला हेल्पलाइन 1090 और 181, बच्चों के लिए 1098, साइबर अपराध के लिए 1930। आपात स्थिति में 112 सबसे तेज रास्ता है, जबकि शिकायत या सलाह के लिए ये विशेष हेल्पलाइन उपयोगी हैं। सरकारी कामकाज से जुड़ी शिकायत के लिए यूपी में IGRS जनसुनवाई पोर्टल है।
झूठी कॉल न करें
112 पर मजाक में या झूठी सूचना देना गंभीर मामला है। इससे असली जरूरतमंद तक मदद पहुंचने में देरी होती है और ऐसा करने वाले के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है। बच्चों को भी समझाएं कि यह नंबर केवल असली आपात स्थिति के लिए है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए सुझाव
- फोन में 112 इंडिया ऐप रखें और आपात संपर्क जोड़ें
- रात में अकेले सफर कर रही हैं तो परिवार के साथ अपनी लोकेशन साझा करें
- अकेले रहने वाले बुजुर्ग पड़ोसियों और रिश्तेदारों के नंबर याद रखें
क्या 112 पर बिना सिम या बिना बैलेंस के कॉल हो सकती है
आपात नंबर पर कॉल आम तौर पर बिना बैलेंस के भी लगती है। नेटवर्क और फोन के हिसाब से सुविधा अलग हो सकती है।
क्या दूसरे राज्य में भी 112 काम करता है
हां, 112 राष्ट्रीय आपात नंबर है और कॉल उसी राज्य के नियंत्रण कक्ष में जाती है जहां आप हैं।
स्रोत: UP 112 सिटीजन पोर्टल, ERSS 112 India, गृह मंत्रालय: ERSS





