सोने में निवेश का एक लोकप्रिय तरीका रहा है सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड यानी SGB। इसे भारत सरकार की ओर से भारतीय रिजर्व बैंक जारी करता था। इसमें निवेशक को भौतिक सोना रखने की झंझट नहीं होती, सोने की कीमत का फायदा मिलता है और ऊपर से हर साल ब्याज भी मिलता है। अब नई सीरीज नहीं आ रही, पर लाखों निवेशकों के पास पुरानी सीरीज के बॉन्ड हैं। उनके लिए सबसे अहम सवाल है कि इन्हें कब और कैसे भुनाया जा सकता है।
SGB की बुनियादी बातें
- अवधि: 8 साल
- ब्याज: शुरुआती निवेश पर 2.5 प्रतिशत सालाना, जो हर छह महीने में खाते में आता है
- यूनिट: एक ग्राम सोने के बराबर
- परिपक्वता पर भुगतान: उस समय के सोने के औसत भाव के हिसाब से, रुपये में
- समय से पहले भुनाना: जारी होने की तारीख से 5 साल बाद, केवल ब्याज भुगतान की तय तारीखों पर

नई सीरीज क्यों नहीं आ रही
फरवरी 2024 के बाद SGB की कोई नई सीरीज जारी नहीं हुई है और नई सीरीज का कोई कैलेंडर भी घोषित नहीं किया गया है। सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण सरकार के लिए इस योजना की लागत काफी बढ़ गई थी, क्योंकि परिपक्वता पर उसे बाजार भाव से भुगतान करना होता है। इसलिए अब SGB में नया निवेश केवल शेयर बाजार में पहले से जारी बॉन्ड खरीदकर ही हो सकता है।
समय से पहले भुनाने का नियम
RBI हर छह महीने पर उन सीरीज की सूची और तारीखें जारी करता है जिन्हें समय से पहले भुनाया जा सकता है। हाल में RBI ने अक्टूबर 2026 से मार्च 2027 के बीच की 32 किस्तों का कैलेंडर जारी किया है। हर किस्त के लिए एक तय अवधि होती है जिसमें निवेशक भुनाने का अनुरोध कर सकता है। यह अवधि आम तौर पर ब्याज भुगतान की तारीख से पहले के कुछ दिनों की होती है।
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भुनाने की कीमत कैसे तय होती है
समय से पहले भुनाने पर कीमत इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन यानी IBJA द्वारा जारी 999 शुद्धता वाले सोने के पिछले तीन कारोबारी दिनों के बंद भाव के साधारण औसत से तय होती है। RBI हर रिडेम्प्शन से पहले यह कीमत घोषित करता है।
भुनाने का अनुरोध कैसे करें
- जहां से बॉन्ड खरीदा था, उसी बैंक, पोस्ट ऑफिस, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन या एजेंट से संपर्क करें
- अगर बॉन्ड डीमैट खाते में है तो अपने डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट यानी ब्रोकर से प्रक्रिया पूछें
- RBI की ओर से तय अवधि के भीतर अनुरोध जमा करें
- भुनाने की रकम उसी बैंक खाते में आती है जो बॉन्ड से जुड़ा है
- बैंक खाता बदला हो तो पहले उसे अपडेट करा लें
शेयर बाजार में बेचने का विकल्प
डीमैट रूप में रखे SGB को शेयर बाजार यानी NSE या BSE पर किसी भी कारोबारी दिन बेचा जा सकता है। लेकिन यहां कीमत मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती है और कई बार कम कारोबार के कारण सोने के भाव से कम या ज्यादा दाम मिलते हैं। बेचने से पहले भाव और कारोबार की मात्रा जरूर देखें।
टैक्स के नियम
- हर साल मिलने वाला 2.5 प्रतिशत ब्याज निवेशक की आय में जुड़ता है और स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है
- व्यक्तिगत निवेशक के लिए RBI के जरिये परिपक्वता पर भुनाने पर पूंजीगत लाभ कर नहीं लगता
- शेयर बाजार में बेचने पर पूंजीगत लाभ कर के नियम लागू होते हैं
- समय से पहले RBI के जरिये भुनाने पर टैक्स के नियमों में बदलाव हुए हैं, इसलिए अपनी सीरीज और खरीद के तरीके के हिसाब से कर विशेषज्ञ से पुष्टि करें
भुनाएं या रखें
- अगर पैसे की जरूरत नहीं है तो परिपक्वता तक रखने पर टैक्स का फायदा मिलता है
- अगर सोने का भाव बहुत ऊंचा है और आपको पोर्टफोलियो में सोने का हिस्सा घटाना है, तो समय से पहले भुनाने पर विचार किया जा सकता है
- कुल निवेश में सोने का हिस्सा आम तौर पर सीमित रखने की सलाह दी जाती है
- किसी भी फैसले से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और लक्ष्य देखें
नॉमिनी जरूर जांचें
पुराने बॉन्ड में नॉमिनी दर्ज है या नहीं, यह जांच लें। निवेशक की मृत्यु होने पर नॉमिनी या कानूनी वारिस को बॉन्ड ट्रांसफर कराने या भुनाने की प्रक्रिया अपनानी होती है।
क्या SGB पर लोन मिल सकता है
हां, SGB को बैंक से लोन के लिए गिरवी रखा जा सकता है। शर्तें बैंक के अनुसार अलग होती हैं।
क्या पांच साल से पहले भुनाया जा सकता है
RBI के जरिये नहीं। डीमैट रूप में हो तो शेयर बाजार में बेचा जा सकता है।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। निवेश या टैक्स से जुड़ा फैसला लेने से पहले वित्तीय सलाहकार या कर विशेषज्ञ से सलाह लें।





