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अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ICJ क्या है: हेग में बैठते हैं 15 जज, कैसे होता है चुनाव और देशों के विवाद कैसे सुलझाता है

देशों के बीच कानूनी विवाद सुलझाने वाला अंतरराष्ट्रीय न्यायालय नीदरलैंड के हेग में है। जानिए यह कैसे काम करता है और इसकी सीमाएं क्या हैं।

तराजू, अदालत भवन और ग्लोब का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

सारांश

  • जब दो देशों के बीच सीमा, समुद्री क्षेत्र, संधि या किसी अन्य कानूनी मुद्दे पर विवाद होता है, तो उसे सुलझाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अदालत मौजूद है।
  • ICJ में 15 जज होते हैं। इन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद अलग-अलग मतदान करके चुनती हैं।
  • अक्सर ICJ और ICC यानी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को लेकर भ्रम होता है।
  • ICJ में मामला आमतौर पर एक देश द्वारा दूसरे देश के खिलाफ आवेदन दाखिल करने से शुरू होता है।

जब दो देशों के बीच सीमा, समुद्री क्षेत्र, संधि या किसी अन्य कानूनी मुद्दे पर विवाद होता है, तो उसे सुलझाने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय अदालत मौजूद है। इसका नाम है इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस यानी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, जिसे ICJ या वर्ल्ड कोर्ट भी कहा जाता है। यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है। आइए समझते हैं कि यह अदालत कैसे काम करती है।

ICJ क्या है

ICJ की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है, जिसकी स्थापना जून 1945 में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के जरिये हुई और इसने अप्रैल 1946 में काम शुरू किया। इसका मुख्यालय नीदरलैंड के हेग शहर में पीस पैलेस में है। संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में ICJ इकलौता ऐसा अंग है जो न्यूयॉर्क में नहीं है।

ICJ से पहले स्थायी अंतरराष्ट्रीय न्याय न्यायालय यानी PCIJ था, जो राष्ट्र संघ के दौर में बना था। संयुक्त राष्ट्र बनने के बाद उसकी जगह ICJ ने ली।

मुख्य बातें: तराजू, अदालत भवन और ग्लोब का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक तस्वीर (AI निर्मित) | ग्राफिक: डेमोक्रेटिक भारत लाइव

ICJ के जज कैसे चुने जाते हैं

ICJ में 15 जज होते हैं। इन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा और सुरक्षा परिषद अलग-अलग मतदान करके चुनती हैं। किसी उम्मीदवार को दोनों संस्थाओं में पूर्ण बहुमत मिलना जरूरी है। जजों का कार्यकाल 9 साल का होता है और वे दोबारा चुने जा सकते हैं। ICJ की निरंतरता बनाए रखने के लिए हर तीन साल में एक-तिहाई यानी पांच जजों का चुनाव होता है।

ICJ के नियमों के अनुसार एक ही देश के दो जज एक साथ अदालत में नहीं हो सकते। जज अपने देश के प्रतिनिधि नहीं होते, बल्कि स्वतंत्र रूप से काम करते हैं। अदालत अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव तीन साल के लिए करती है।

ICJ के दो मुख्य काम

ICJ मुख्य रूप से दो तरह का काम करता है:

  • विवादों का निपटारा: देशों द्वारा लाए गए कानूनी विवादों पर अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर फैसला देना। इन मामलों में केवल देश पक्षकार हो सकते हैं, कोई व्यक्ति, कंपनी या संगठन नहीं।
  • सलाहकार राय: संयुक्त राष्ट्र के अधिकृत अंगों और विशेष एजेंसियों द्वारा पूछे गए कानूनी सवालों पर सलाहकार राय देना। हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन से जुड़े देशों के दायित्वों जैसे मुद्दों पर भी ICJ से राय मांगी गई है।

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ICJ का अधिकार क्षेत्र

ICJ किसी मामले की सुनवाई तभी कर सकता है जब संबंधित देश उसके अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करें। यह स्वीकृति किसी विशेष समझौते, किसी संधि की धारा या ICJ के अनिवार्य अधिकार क्षेत्र को मानने की घोषणा के जरिये हो सकती है। ICJ के फैसले संबंधित पक्षों के लिए बाध्यकारी होते हैं और इनके खिलाफ अपील नहीं होती। लेकिन ICJ के पास फैसले लागू कराने की अपनी कोई ताकत नहीं है। अगर कोई देश फैसला न माने, तो दूसरा पक्ष संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जा सकता है।

ICJ और ICC में अंतर

अक्सर ICJ और ICC यानी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को लेकर भ्रम होता है। दोनों हेग में हैं, लेकिन इनका काम अलग है:

  • ICJ देशों के बीच विवाद सुलझाता है और संयुक्त राष्ट्र का अंग है।
  • ICC युद्ध अपराध, नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध जैसे मामलों में व्यक्तियों पर मुकदमा चलाता है और रोम संविधि के तहत बना एक अलग संगठन है।

भारत और ICJ

भारत के कई न्यायविद ICJ में जज रहे हैं। मौजूदा समय में भारत के न्यायमूर्ति दलवीर भंडारी 2012 से ICJ के जज हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वे 2017 में दोबारा चुने गए और उनका दूसरा कार्यकाल 6 फरवरी 2018 से शुरू हुआ, जो नौ साल का है। भारत से जुड़े मामलों में पाकिस्तान में कैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव का मामला सबसे चर्चित रहा, जिसमें 2019 में ICJ ने पाकिस्तान को उनकी सजा की प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था।

ICJ की सीमाएं

ICJ का असर काफी हद तक देशों की सहमति और सहयोग पर निर्भर करता है। कई बड़े देश सभी मामलों में इसके अनिवार्य अधिकार क्षेत्र को स्वीकार नहीं करते। फैसले लागू कराने की कमजोर व्यवस्था भी इसकी बड़ी सीमा है। इसके बावजूद यह अदालत अंतरराष्ट्रीय कानून को स्पष्ट करने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का सबसे अहम मंच है।

किसी मामले की सुनवाई कैसे होती है

ICJ में मामला आमतौर पर एक देश द्वारा दूसरे देश के खिलाफ आवेदन दाखिल करने से शुरू होता है। इसके बाद दोनों पक्ष लिखित दलीलें जमा करते हैं, जिसके बाद मौखिक सुनवाई होती है। जरूरत पड़ने पर अदालत अंतिम फैसले से पहले अंतरिम उपाय यानी प्रोविजनल मेजर्स का आदेश भी दे सकती है, ताकि विवाद के दौरान किसी पक्ष के अधिकारों को अपूरणीय नुकसान न हो। अगर किसी मामले में शामिल देश का कोई जज अदालत में नहीं है, तो वह देश उस मामले के लिए एक तदर्थ यानी एड-हॉक जज नामित कर सकता है। ICJ की आधिकारिक भाषाएं अंग्रेजी और फ्रेंच हैं।

ICJ में कितने जज होते हैं

ICJ में 15 जज होते हैं, जिनका कार्यकाल 9 साल का होता है।

क्या कोई आम नागरिक ICJ में केस कर सकता है

नहीं। ICJ में विवाद के मामलों में केवल देश ही पक्षकार हो सकते हैं।

स्रोत: International Court of Justice: The Court, United Nations: Statute of the International Court of Justice

लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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