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BREAKING: टाटा मोटर्स के कनेक्टेड ऐप्स में सुरक्षा खामियों को लेकर सीईआरटी इन की बड़ी चेतावनी

सीईआरटी इन ने टाटा मोटर्स के iRA 2.0 और iRA.ev ऐप्स में गंभीर सुरक्षा खामियों की चेतावनी दी है, जिससे हैकिंग का खतरा हो सकता है।

BREAKING: टाटा मोटर्स के कनेक्टेड ऐप्स में सुरक्षा खामियों को लेकर सीईआरटी इन की बड़ी चेतावनी
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Ank Kumar)

सारांश

  • भारत की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने टाटा मोटर्स के दो लोकप्रिय कनेक्टेड व्हीकल ऐप्स में गंभीर सुरक्षा खामियों की पहचान की है।
  • टाटा मोटर्स के कनेक्टेड ऐप्स में मिली सुरक्षा खामियां: सरकारी एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने टाटा मोटर्स की गाड़ियों से जुड़े कनेक्टेड व्हीकल ऐप्स में चार प्रमुख सुरक्षा…
  • चार प्रमुख तकनीकी खामियों का विवरण: सीईआरटी इन ने अपनी जांच में चार अलग-अलग प्रकार की सुरक्षा समस्याओं की पहचान की है जो इन ऐप्स की सुरक्षा को कमजोर बनाती हैं।
  • लॉगिंग और एसएसएल पिनिंग से जुड़ी चुनौतियां: तीसरी महत्वपूर्ण खामी ऐप के लॉग रिकॉर्ड्स से संबंधित है।

भारत की प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने टाटा मोटर्स के दो लोकप्रिय कनेक्टेड व्हीकल ऐप्स में गंभीर सुरक्षा खामियों की पहचान की है। सीईआरटी इन द्वारा जारी की गई इस चेतावनी में बताया गया है कि iRA 2.0 और iRA.ev ऐप्स में मौजूद ये कमजोरियां हैकर्स को उपयोगकर्ताओं की संवेदनशील जानकारी और वाहन की डिजिटल सेवाओं तक अनधिकृत पहुंच प्रदान कर सकती हैं। एजेंसी ने इन सुरक्षा जोखिमों को उच्च श्रेणी में रखा है और प्रभावित वर्जन का उपयोग करने वाले ग्राहकों को तुरंत सॉफ्टवेयर अपडेट करने की सलाह दी है।

प्रभावित ऐप्स और वर्जन
फाइल फोटो (Wikimedia Commons / Ank Kumar)

टाटा मोटर्स के कनेक्टेड ऐप्स में मिली सुरक्षा खामियां: सरकारी एजेंसी इंडियन कम्प्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम ने टाटा मोटर्स की गाड़ियों से जुड़े कनेक्टेड व्हीकल ऐप्स में चार प्रमुख सुरक्षा खामियों को लेकर एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। यह चेतावनी मुख्य रूप से दो ऐप्स के लिए है: iRA 2.0, जो कंपनी की पेट्रोल और डीजल कारों के लिए उपयोग किया जाता है, और iRA.ev, जो विशेष रूप से टाटा की इलेक्ट्रिक कारों के लिए बनाया गया है। एजेंसी के अनुसार, इन ऐप्स में मौजूद तकनीकी कमियों का फायदा उठाकर कोई भी हमलावर उपयोगकर्ता की डिजिटल पहचान चुरा सकता है और वाहन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी हासिल कर सकता है। यह ध्यान देना आवश्यक है कि ये सुरक्षा खामियां सीधे तौर पर कारों के मैकेनिकल सिस्टम में नहीं, बल्कि उन मोबाइल एप्लिकेशन्स में पाई गई हैं जो कार को स्मार्टफोन से जोड़ते हैं। सीईआरटी इन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे हाई सिक्योरिटी लेवल की श्रेणी में रखा है, क्योंकि इन ऐप्स के जरिए कार के कई महत्वपूर्ण फीचर्स को नियंत्रित किया जा सकता है।

प्रभावित वर्जन और सॉफ्टवेयर अपडेट की आवश्यकता: सीईआरटी इन की 4 नवंबर 2026 की एडवाइजरी के मुताबिक, सुरक्षा खामियां ऐप्स के विशिष्ट वर्जनों में देखी गई हैं। iRA 2.0 के मामले में, वर्जन 26.7.3 और उससे पुराने सभी वर्जन इन जोखिमों से प्रभावित बताए गए हैं। इसी तरह, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए उपयोग होने वाले iRA.ev ऐप के वर्जन 26.7.2 और उससे पुराने वर्जनों में भी ये सुरक्षा कमियां मौजूद हैं। सरकारी एजेंसी ने टाटा कार मालिकों को सलाह दी है कि वे अपने स्मार्टफोन में मौजूद ऐप के वर्जन की जांच करें और यदि वे पुराने वर्जन का उपयोग कर रहे हैं, तो तुरंत नवीनतम सुरक्षित वर्जन पर अपडेट करें। सॉफ्टवेयर अपडेट इन खामियों को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका है, जिससे संभावित साइबर हमलों से बचा जा सकता है। यह अपडेट प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि ऐप और कंपनी के सर्वर के बीच होने वाला संचार सुरक्षित रहे और किसी भी प्रकार की डेटा चोरी की संभावना कम हो जाए।

चार प्रमुख तकनीकी खामियों का विवरण: सीईआरटी इन ने अपनी जांच में चार अलग-अलग प्रकार की सुरक्षा समस्याओं की पहचान की है जो इन ऐप्स की सुरक्षा को कमजोर बनाती हैं। पहली खामी ऐप के भीतर ही संवेदनशील डिजिटल जानकारी के भंडारण से जुड़ी है। इसमें सर्विस अकाउंट के लॉगिन क्रेडेंशियल, एपीआई कीज और ऑथराइजेशन टोकन शामिल हैं। यदि कोई हमलावर इन कीज को ऐप से निकालने में सफल हो जाता है, तो वह कंपनी की बैकएंड सेवाओं तक पहुंचने का प्रयास कर सकता है। दूसरी खामी ऐप के वेबव्यू फीचर में पाई गई है, जो ऐप के अंदर वेब सामग्री दिखाने के लिए उपयोग किया जाता है। एजेंसी ने पाया कि ऐप यह सत्यापित करने में पर्याप्त सावधानी नहीं बरत रहा था कि कौन सा वेब पेज खोला जा रहा है, जिसका लाभ उठाकर हैकर्स उपयोगकर्ता तक गलत सामग्री पहुंचाकर उनके लाइव ऑथेंटिकेशन टोकन हासिल कर सकते हैं।

लॉगिंग और एसएसएल पिनिंग से जुड़ी चुनौतियां: तीसरी महत्वपूर्ण खामी ऐप के लॉग रिकॉर्ड्स से संबंधित है। विकास और परीक्षण के दौरान ऐप की गतिविधियों का जो रिकॉर्ड रखा जाता है, उनमें ऑथेंटिकेशन टोकन भी दर्ज हो रहे थे। यदि किसी बाहरी व्यक्ति को इन लॉग्स तक पहुंच मिल जाती है, तो वह असली उपयोगकर्ता बनकर उसकी सेवाओं का गलत इस्तेमाल कर सकता है। चौथी खामी एसएसएल सर्टिफिकेट पिनिंग के अनुचित कार्यान्वयन से जुड़ी है। यह तकनीक यह सुनिश्चित करती है कि ऐप केवल भरोसेमंद सर्वर से ही जुड़े। सुरक्षा एजेंसी ने पाया कि इस व्यवस्था को ठीक से लागू नहीं किया गया था, जिससे नेटवर्क ट्रैफिक के बीच में हस्तक्षेप करने वाले हमलावर ऐप और सर्वर के बीच होने वाली बातचीत को पढ़ सकते हैं या उसमें बदलाव कर सकते हैं। ये सभी तकनीकी कमियां मिलकर एक ऐसा जोखिम पैदा करती हैं जहां उपयोगकर्ता की गोपनीयता और वाहन की सुरक्षा दांव पर लग सकती है।

ऐप की कार्यक्षमता और संभावित जोखिम का प्रभाव: टाटा मोटर्स के ये कनेक्टेड ऐप्स स्मार्टफोन को एक तरह के रिमोट कंट्रोल में बदल देते हैं। इनके माध्यम से उपयोगकर्ता अपनी कार की लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं, वाहन की सेहत की जांच कर सकते हैं और अपनी पिछली यात्राओं का विवरण देख सकते हैं। इसके अलावा, फ्यूल लेवल या इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी हेल्थ की निगरानी भी इन्हीं ऐप्स के जरिए की जाती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन ऐप्स के माध्यम से रिमोट कमांड देकर कार के दरवाजे लॉक या अनलॉक किए जा सकते हैं। हालांकि, सीईआरटी इन ने स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसी किसी घटना की पुष्टि नहीं हुई है जहां किसी कार का नियंत्रण हैकर्स ने ले लिया हो या डेटा चोरी हुआ हो, लेकिन ये खामियां भविष्य में ऐसे हमलों के लिए रास्ता खोल सकती हैं। एजेंसी का उद्देश्य इन संभावित जोखिमों के प्रति जनता को सचेत करना है ताकि वे समय रहते सुरक्षा उपाय अपना सकें।

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स्रोत: Aaj Tak, Aaj Tak

लेखक

Shobhit Pandey

शोभित पांडेय डेमोक्रेटिक भारत लाइव के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) हैं। सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के तहत पाठकों की शिकायतें और सुधार संबंधी अनुरोध हमारे संपर्क पेज के माध्यम से भेजे जा सकते हैं।

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