हिंदू परंपरा में श्रीमद्भगवद्गीता को जीवन का मार्गदर्शक ग्रंथ माना जाता है। मान्यता है कि मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। इसी दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है। यही एकादशी मोक्षदा एकादशी भी कहलाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए 2026 में गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी रविवार, 20 दिसंबर को है।
गीता जयंती 2026: तिथि और समय
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए:
- गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी: रविवार, 20 दिसंबर 2026
- एकादशी तिथि आरंभ: 19 दिसंबर 2026, रात लगभग 10:09 बजे
- एकादशी तिथि समाप्त: 20 दिसंबर 2026, रात लगभग 8:14 बजे
- मोक्षदा एकादशी व्रत का पारण: 21 दिसंबर की सुबह
पंचांग की गणना सूर्योदय और स्थान पर निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग शहरों में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है। विदेश में रहने वाले लोगों के लिए तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। अपने शहर का सटीक समय स्थानीय पंचांग से देख लें।

गीता जयंती का महत्व
गीता महाभारत के भीष्म पर्व का हिस्सा है और इसमें 18 अध्याय और लगभग 700 श्लोक हैं। जब अर्जुन युद्धक्षेत्र में अपने ही परिजनों को सामने देखकर मोह और दुविधा में पड़ गए, तब श्रीकृष्ण ने उन्हें कर्तव्य, कर्म, ज्ञान और भक्ति का उपदेश दिया। गीता का सबसे प्रसिद्ध संदेश निष्काम कर्म का माना जाता है, यानी फल की चिंता किए बिना अपना कर्तव्य करना।
मान्यता है कि गीता जयंती के दिन गीता का पाठ करने, उसके उपदेशों पर मनन करने और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व है। यह ऐसा पर्व है जो किसी देवता के जन्म के बजाय एक ग्रंथ की जयंती के रूप में मनाया जाता है।
मोक्षदा एकादशी क्या है
मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस एकादशी का व्रत करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है, इसलिए इसका नाम मोक्षदा पड़ा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और कई लोग निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में तय समय पर किया जाता है।
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घर पर गीता जयंती कैसे मनाएं
परंपरा के अनुसार घर पर गीता जयंती इस तरह मनाई जा सकती है:
- सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थान की सफाई करें।
- भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा या चित्र के साथ भगवद्गीता की पुस्तक रखें।
- दीपक जलाएं, फूल, तुलसी दल और नैवेद्य अर्पित करें।
- गीता के कुछ अध्यायों का पाठ करें। पूरा पाठ संभव न हो तो दूसरा, बारहवां या पंद्रहवां अध्याय पढ़ने की परंपरा कई परिवारों में है।
- परिवार के साथ बैठकर किसी एक श्लोक का अर्थ समझें और उस पर चर्चा करें।
- सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र या पुस्तकों का दान करें।
कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव
हरियाणा के कुरुक्षेत्र को गीता की जन्मभूमि माना जाता है। यहां हर साल गीता जयंती के आसपास अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होता है, जिसमें ब्रह्मसरोवर के तट पर दीपदान, गीता पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रदर्शनियां होती हैं। देश-विदेश से श्रद्धालु इसमें हिस्सा लेने पहुंचते हैं। आयोजन की इस साल की तारीखें हरियाणा सरकार की आधिकारिक घोषणा से देखें।
गीता के कुछ प्रसिद्ध उपदेश
गीता के कई श्लोक आम बोलचाल में भी उद्धृत किए जाते हैं। इनमें कर्म करने पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं वाला उपदेश सबसे प्रसिद्ध है। गीता मन को संतुलित रखने, सुख-दुख में समान रहने और अपने स्वधर्म का पालन करने की सीख देती है। आज के तनाव भरे जीवन में कई लोग गीता को आत्मबल और निर्णय लेने की स्पष्टता के स्रोत के रूप में देखते हैं।
व्रत के सामान्य नियम
जो लोग मोक्षदा एकादशी का व्रत रखते हैं, वे परंपरा के अनुसार दशमी की शाम से सात्विक भोजन लेते हैं और एकादशी के दिन अनाज, विशेषकर चावल, से परहेज करते हैं। दिन में भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण का स्मरण, भजन-कीर्तन और गीता पाठ किया जाता है। बुजुर्ग, बीमार, गर्भवती महिलाएं और नियमित दवा लेने वाले लोग अपनी सेहत के अनुसार ही व्रत का स्वरूप तय करें। अगले दिन द्वादशी में पारण के समय के भीतर व्रत खोलना जरूरी माना जाता है।
बच्चों को गीता से कैसे जोड़ें
गीता जयंती बच्चों को भारतीय ग्रंथों से परिचित कराने का अच्छा अवसर है। उन्हें गीता की कहानी सरल भाषा में सुनाएं, कुछ श्लोक याद करवाएं और उनके अर्थ पर बात करें। चित्रों वाली पुस्तकें और कहानियां भी इसमें मददगार हो सकती हैं।
गीता जयंती 2026 कब है
द्रिक पंचांग के अनुसार नई दिल्ली के लिए गीता जयंती रविवार, 20 दिसंबर 2026 को है।
गीता में कितने अध्याय हैं
भगवद्गीता में 18 अध्याय हैं और इसमें लगभग 700 श्लोक माने जाते हैं।
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी में क्या संबंध है
दोनों मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी को मनाई जाती हैं, इसलिए एक ही दिन पड़ती हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। डेमोक्रेटिक भारत लाइव इनकी पुष्टि नहीं करता।
स्रोत: Drik Panchang: Gita Jayanti 2026 (New Delhi), Drik Panchang: Mokshada Ekadashi 2026





