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Sawan 2026 Pradosh Vrat: जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और सोम प्रदोष का विशेष धार्मिक महत्व

Sawan 2026 Pradosh Vrat: जानिए सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त और सोम प्रदोष का विशेष धार्मिक महत्व
Sawan 2026 Pradosh Vrat

सारांश

  • Sawan 2026 Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है।
  • शास्त्रों में सोम प्रदोष और सावन सोमवार के इस मिलन को अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है।
  • प्रदोष का दिन सप्ताह के जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसके फल की प्राप्ति होती है।
  • शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है।

Sawan 2026 Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस पूरे माह में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि और प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि सावन के प्रदोष व्रत में विधि-विधान से शिव जी की पूजा करने से साधक की हर मनोकामना पूर्ण होती है।

वर्ष 2026 में सावन महीने का पहला प्रदोष व्रत बहुत ही दुर्लभ और अत्यंत शुभ संयोग के बीच मनाया जाएगा। इस वर्ष पहला प्रदोष व्रत सोमवार के दिन पड़ रहा है, जिसके कारण इसे ‘सोम प्रदोष व्रत’ का नाम दिया गया है। ऐसे में भक्तों को सावन सोमवार और प्रदोष व्रत दोनों का एक साथ पुण्य प्राप्त होगा।

Sawan 2026 Pradosh Vrat: सावन के प्रथम प्रदोष व्रत की तिथि और अद्भुत संयोग

सावन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सावन का पहला प्रदोष व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार यह पावन तिथि 10 अगस्त 2026 को पड़ रही है। इस दिन सावन का दूसरा सोमवार भी है, जो इसके धार्मिक महत्व को कई गुना बढ़ा देता है।

शास्त्रों में सोम प्रदोष और सावन सोमवार के इस मिलन को अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। जो श्रद्धालु किसी कारणवश पूरे सावन व्रत नहीं रख पाते, वे इस दिन व्रत रखकर महादेव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। यह दिन शिव साधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त और पंचांग गणना

पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का शुभारंभ 10 अगस्त 2026 को सुबह 8:00 बजे से होगा। वहीं इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 11 अगस्त 2026 को भोर में 4:54 बजे होगा। चूंकि प्रदोष काल की पूजा शाम को होती है, इसलिए 10 अगस्त को ही व्रत रखा जाएगा।

10 अगस्त को प्रदोष काल में पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 7:09 बजे से लेकर रात 9:23 बजे तक रहेगा। इसके अलावा प्रातः कालीन पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:49 बजे से 5:34 बजे तक रहेगा। मध्याह्न में अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:18 बजे से 1:09 बजे तक रहेगा।

Sawan 2026 Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व और लाभ

प्रदोष का दिन सप्ताह के जिस वार को पड़ता है, उसी के अनुसार उसके फल की प्राप्ति होती है। सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष कहा जाता है, जो मुख्य रूप से मानसिक शांति और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

इस व्रत को नियमपूर्वक करने से दांपत्य जीवन में चल रही परेशानियां दूर होती हैं और आपसी प्रेम बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, यदि किसी जातक की कुंडली में चंद्र दोष या चंद्रमा कमजोर स्थिति में हो, तो सोम प्रदोष व्रत करने से चंद्र दोष का निवारण होता है।

प्रदोष काल में पूजा की सही विधि

प्रदोष व्रत में शाम के समय यानी सूर्यास्त के आसपास ‘प्रदोष काल’ में पूजा करने का विधान है। इस समय साधक को स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। तत्पश्चात मंदिर या पूजा स्थल की सफाई कर भगवान शिव का ध्यान लगाना चाहिए।

शिवलिंग पर शुद्ध जल, दूध, दही, शहद और गंगाजल से अभिषेक करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके बाद बेलपत्र, भांग, धतूरा, समी के पत्ते और भस्म अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हुए आरती करें।

Sawan 2026 Pradosh Vrat: सोम प्रदोष व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य नियम

प्रदोष व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को दिन भर सात्विक आचरण बनाए रखना चाहिए। सुबह और शाम दोनों समय भगवान शिव की आरती करनी चाहिए। पूरे दिन मन में किसी के प्रति बुरे विचार या क्रोध नहीं लाना चाहिए।

पूजा के बाद प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करना या सुनना अत्यंत अनिवार्य माना गया है। रात्रि में फलाहार ग्रहण करें और अगले दिन पारण के समय दान-पुण्य करके व्रत को पूर्ण करें। इस प्रकार नियमबद्ध पूजा से भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

सावन 2026 का पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को सोम प्रदोष और सावन सोमवार के महासंयोग के साथ आ रहा है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने का बेहद दुर्लभ अवसर है। शुभ मुहूर्त में की गई शिव पूजा से साधक के जीवन के समस्त कष्ट, चंद्र दोष और मानसिक तनाव समाप्त हो जाते हैं।

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लेखक

Sudhanshu Tiwari

सुधांशु तिवारी डेमोक्रेटिक भारत लाइव के संस्थापक, मालिक और संपादक हैं। डिजिटल मीडिया में 6 साल से अधिक के अनुभव के साथ वे मुख्य रूप से राजनीति और चुनाव की खबरें कवर करते हैं, साथ ही देश, कारोबार और खेल से जुड़ी अहम खबरों का संपादन करते हैं। वेबसाइट की संपादकीय नीति, तथ्य-जांच और प्रकाशित सामग्री की अंतिम जिम्मेदारी उन्हीं की है।

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