Sawan 2026: भगवान शिव की उपासना का अत्यंत पवित्र और पावन महीना श्रावण (सावन) 30 जुलाई से शुरू हो चुका है। इस वर्ष सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। सनातन धर्म में सावन सोमवार के व्रत और पूजन का विशेष महत्व माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सोमवार को भगवान भोलेनाथ का व्रत रखकर विधि-विधान से जलाभिषेक और पूजन करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि शिवजी केवल भाव के भूखे हैं और मात्र जल व बेलपत्र अर्पित करने से भी प्रसन्न हो जाते हैं। हालांकि, शास्त्रीय विधि से पूजा संपन्न करने के लिए पूजा की थाली में कुछ विशेष सामग्रियों का होना अनिवार्य माना गया है।
Sawan 2026: पहले सावन सोमवार पर पूजा थाली में जरूर रखें ये 8 सामग्रियां
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव की पूजा करते समय थाली में निम्नलिखित पवित्र सामग्रियों का शामिल होना आवश्यक माना गया है, जिनके बिना पूजन अधूरा समझा जाता है:
-
अखंडित बेलपत्र: महादेव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है। ध्यान रखें कि बेलपत्र कहीं से भी कटा-फटा न हो और हमेशा तीन पत्तियों वाला अखंडित बेलपत्र ही शिवजी को अर्पित करें।
-
गंगाजल और कच्चा दूध: शिवलिंग के जलाभिषेक और पंचामृत स्नान के लिए तांबे या पीतल के पात्र में शुद्ध गंगाजल और गाय का कच्चा दूध रखें।
-
धतूरा, भांग और आक के फूल: भगवान शिव की पूजा में धतूरा, भांग की पत्तियां और आक (मदार) के सफेद पुष्प अर्पित करना बेहद शुभ और फलदायी माना जाता है।
-
सफेद चंदन या भस्म: भोलेनाथ को सफेद रंग प्रिय है। शिवलिंग पर त्रिपुंड बनाने के लिए पूजा की थाली में शुद्ध सफेद चंदन का लेप या भस्म अवश्य रखें।
-
अक्षत (साबुत चावल): पूजा में चढ़ाए जाने वाले अक्षत पूरी तरह से साबुत होने चाहिए। ध्यान रखें कि चावल का एक भी दाना टूटा हुआ न हो।
-
शहद, दही और देसी घी: शिवलिंग पर अर्पण और पंचामृत तैयार करने के लिए शुद्ध शहद, ताजा दही और गाय का देसी घी रखें।
-
धूप, दीप और कपूर: आरती और वातावरण की शुद्धि के लिए देसी घी का दीपक, धूपबत्ती, सुगंधित कपूर और मौसमी फल प्रसाद के रूप में शामिल करें।
-
मौली (कलावा) और जनेऊ: भगवान शिव को वस्त्र और उपवीत के रूप में अर्पित करने के लिए कलावा (मौली) और जनेऊ थाली में रखें।
3 अगस्त 2026: पहले सावन सोमवार का शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में पहले सावन सोमवार के दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और सुकर्मा योग का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस दिन निम्नलिखित शुभ मुहूर्तों में पूजा-अर्चना करना विशेष फलदायी रहेगा:
| मुहूर्त | समय |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक |
| प्रदोष काल | सूर्यास्त के समय (संध्या काल) |
सावन सोमवार पूजा विधि और नियम
सावन सोमवार के दिन प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और मन ही मन भगवान शिव के व्रत का संकल्प लें। मंदिर या घर के पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें।
सबसे पहले तांबे के लोटे से गंगाजल और कच्चे दूध से शिवलिंग का जलाभिषेक करें। इसके बाद क्रम से चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और भांग अर्पित करें। धूप-दीप प्रज्वलित कर महामृत्युंजय मंत्र या ‘ॐ नमः शिवाय’ का निरंतर जाप करें। अंत में शिव चालीसा का पाठ करें और कपूर से आरती उतारकर फल व मिष्ठान्न का भोग लगाएं। पूरे दिन सात्विक आचरण का पालन करते हुए शाम को आरती के बाद व्रत का पारण करें।
Read More Here
- CWG 2026 India Medal List: ग्लासगो में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन, भारत ने जीते कुल 39 पदक
- Godrej Consumer Products Hike: Good Knight, HIT और Cinthol समेत कई प्रोडक्ट्स हुए महंगे
- Long Lasting Sindoor Tips: पसीने और बारिश में भी नहीं फैलेगा सिंदूर, सावन में सुहागिनों के काम आएंगे ये 5 आसान हैक्स
- NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी काउंसलिंग का शेड्यूल जारी, एमसीसी ने सीट अपग्रेड और रेजिग्नेशन के नियमों में किया बड़ा बदलाव


[…] […]